बिहार

बिहार में टाउनशिप के लिए किसानों की जमीन लेने का नया प्लान, सरकार देगी 4 विकल्प; जानें लैंड पुलिंग से अधिग्रहण तक

पटना: बिहार में प्रस्तावित 12 सेटेलाइट टाउनशिप के लिए जमीन जुटाने को लेकर किसानों के विरोध के बीच राज्य सरकार ने नया रास्ता अपनाने का फैसला किया है। सम्राट चौधरी सरकार जमीन लेने से पहले किसानों को चार विकल्प देगी। नगर विकास एवं आवास विभाग की टीम किसानों के बीच जाकर इन विकल्पों की जानकारी देगी। जमीन मालिक जिस प्रक्रिया के लिए सहमत होंगे, उसी के आधार पर जमीन लेने की कार्रवाई की जाएगी।

सरकार ने 12 टाउनशिप की सीमाएं निर्धारित कर दी हैं। इनमें पाटलिपुत्र टाउनशिप की विकास योजना के प्रारूप का प्रकाशन भी किया जा चुका है। पाटलिपुत्र टाउनशिप को 30 सेक्टर में विकसित किया जाएगा। फिलहाल इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभाव का अध्ययन कराया जा रहा है। इसके बाद जमीन लेने की प्रक्रिया शुरू होगी।

किसानों से पहले संवाद, फिर जमीन लेने की प्रक्रिया
जमीन देने को लेकर किसानों की आपत्तियों को देखते हुए नगर विकास एवं आवास विभाग ने पहले उनसे बातचीत करने का फैसला किया है। विभाग की टीम किसानों को टाउनशिप योजना और जमीन लेने की अलग-अलग प्रक्रियाओं की जानकारी देगी।

सरकार की कोशिश सबसे पहले लैंड पुलिंग के जरिए किसानों की सहमति से जमीन लेने की होगी। यदि किसान इस व्यवस्था के लिए तैयार नहीं होते हैं तो दूसरे विकल्पों पर आगे बढ़ा जाएगा।

पहला विकल्प: हाइब्रिड मॉडल
अगर किसी सेक्टर के किसान पहले तीन विकल्पों में से किसी एक पर सामूहिक रूप से सहमत नहीं होते हैं तो हाइब्रिड मॉडल अपनाया जा सकेगा। इसमें लैंड पुलिंग, आपसी सहमति, जमीन की खरीद और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रियाओं को एक साथ इस्तेमाल किया जाएगा।

सेक्टर में अलग-अलग जमीन मालिक जिस प्रक्रिया के तहत सहमत होंगे, उसी के आधार पर उनकी जमीन लेने पर विचार किया जाएगा।

दूसरा विकल्प: लैंड पुलिंग
सरकार की प्राथमिकता लैंड पुलिंग व्यवस्था को लेकर है। इसके तहत किसानों की सहमति से किसी सेक्टर के लिए जमीन एक साथ जुटाई जाएगी। इस जमीन पर सड़क, नाला, पार्क, सीवरेज और दूसरी आधारभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

विकास कार्य पूरा होने के बाद विकसित जमीन का 55 प्रतिशत हिस्सा जमीन मालिकों को वापस किया जाएगा। किसानों को उनके हिस्से की जमीन विकसित सेक्टर में किसी अन्य स्थान पर भी दी जा सकती है।

तीसरा विकल्प: जमीन की खरीद या अधिग्रहण
टाउनशिप में सड़क, नाला, पार्क, स्कूल-कॉलेज और दूसरी सार्वजनिक सुविधाओं के लिए जिन जमीनों की जरूरत होगी, उन्हें वापस करने का विकल्प नहीं होगा। सरकार पहले जमीन मालिकों से जमीन बेचने के लिए बातचीत करेगी।

अगर किसान जमीन बेचने के लिए तैयार नहीं होते हैं तो निर्धारित नियमों के तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यानी सहमति से खरीद नहीं होने की स्थिति में सरकार कानून के तहत जमीन अधिग्रहित कर सकेगी।

चौथा विकल्प: आपसी समझौता
सरकार किसानों को आपसी बातचीत और समझौते के जरिए जमीन देने का विकल्प भी देगी। इस प्रक्रिया में जमीन मालिकों को अतिरिक्त लाभ देने का प्रावधान होगा।

इस नीति के तहत अतिरिक्त एफएआर यानी फ्लोर एरिया रेशियो, टीडीआर यानी हस्तांतरणीय विकास अधिकार और विकास शुल्क में छूट जैसे लाभ दिए जा सकते हैं। सरकार की कोशिश है कि किसानों के साथ बातचीत के जरिए जमीन से जुड़े विवादों को कम किया जाए और टाउनशिप परियोजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध कराई जा सके।

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