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पुराने घरों के आंगन में बीचों-बीच क्यों होता था तुलसी का चौरा? आस्था के साथ छिपे थे ये वैज्ञानिक कारण

नई दिल्ली: पुराने भारतीय घरों की पहचान उनके खुले आंगन और बीचों-बीच बने तुलसी चौरे से भी होती थी। हिंदू धर्म में तुलसी को बेहद पवित्र और शुभ माना जाता है, इसलिए घर के आंगन में इसका पौधा लगाना धार्मिक परंपरा का हिस्सा रहा है। लेकिन तुलसी को घर के बीच में लगाने की वजह केवल धार्मिक आस्था नहीं थी। इसके पीछे हवा की गुणवत्ता, कीट-पतंगों से बचाव, औषधीय उपयोग और मानसिक शांति से जुड़े कारण भी बताए जाते हैं।

हवा को बेहतर रखने में मदद

तुलसी के पौधे को प्राकृतिक रूप से हवा को शुद्ध करने वाले पौधों में गिना जाता है। यह लंबे समय तक ऑक्सीजन छोड़ता है और वातावरण में मौजूद कुछ हानिकारक गैसों को अवशोषित करने में मदद करता है। पुराने घरों में आंगन खुला और घर के बीच का हिस्सा होने के कारण यहां तुलसी का पौधा लगाने से आसपास के वातावरण को बेहतर रखने में मदद मिलती थी।

कीट-पतंगों से बचाव में भी उपयोगी

तुलसी के पौधे में पाए जाने वाले तेल और इसकी विशिष्ट सुगंध को कीट-पतंगों के लिए अप्रिय माना जाता है। पुराने समय में मच्छरों और दूसरे कीड़ों से बचने के लिए आज की तरह रासायनिक साधन आसानी से उपलब्ध नहीं थे। ऐसे में घर के आंगन में तुलसी का पौधा रखना पारंपरिक रूप से उपयोगी माना जाता था।

औषधीय गुणों के लिए भी खास थी तुलसी

तुलसी को लंबे समय से औषधीय पौधे के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। सर्दी-जुकाम, बुखार, पाचन से जुड़ी दिक्कतों और त्वचा संबंधी कुछ समस्याओं में इसके पत्तों का पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता है। घर के आंगन में तुलसी का पौधा होने से जरूरत के समय इसके पत्ते आसानी से उपलब्ध हो जाते थे।

तुलसी के आसपास सफाई से जुड़ी थी परंपरा

तुलसी के पौधे के आसपास की जगह को आमतौर पर साफ रखा जाता था। धार्मिक मान्यता के कारण परिवार के लोग नियमित रूप से तुलसी चौरे की सफाई करते थे। इससे घर के बीच के खुले हिस्से में स्वच्छता बनाए रखने की आदत भी बनी रहती थी। तुलसी की सुगंध को मन को शांत करने वाला भी माना जाता है, इसलिए इसके आसपास का वातावरण मानसिक सुकून से भी जोड़ा जाता रहा है।

धार्मिक आस्था ने तुलसी को बनाया घर का केंद्र

तुलसी का हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व है। पूजा और प्रसाद में तुलसी की पत्तियों का इस्तेमाल किया जाता है। पुराने घरों में सुबह तुलसी को जल चढ़ाने और शाम को उसके पास दीपक जलाने की परंपरा भी रही है। इसी वजह से तुलसी चौरा घर के आंगन में ऐसी जगह बनाया जाता था, जहां परिवार के सभी सदस्य आसानी से पहुंच सकें।

इस तरह पुराने घरों में आंगन के बीच तुलसी का चौरा धार्मिक परंपरा के साथ-साथ रोजमर्रा की जीवनशैली का भी हिस्सा था। इसके आसपास नियमित सफाई, पौधे की देखभाल और उपयोग ने इसे घर के दैनिक जीवन से जोड़ दिया था।

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