
पटना: बिहार सरकार ने असामाजिक तत्वों और संगठित अपराध पर नियंत्रण के लिए बिहार सीसीए कानून में संशोधन किया है। इसके तहत जिलाधिकारियों के अधिकार बढ़ाए गए हैं और सात तरह के गंभीर अपराधों में शामिल लोगों को सीसीए के दायरे में लाया जा सकेगा। इनमें पेपर लीक, मानव तस्करी, अवैध खनन, सार्वजनिक या निजी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाना, वन्यजीवों को नुकसान, सोशल मीडिया पर घृणा फैलाना और विस्फोटक पदार्थों की खरीद-बिक्री जैसे अपराध शामिल हैं।
सीसीए लगाने के लिए बदले गए मानदंड
राज्य सरकार ने सीसीए लगाने के लिए जरूरी शर्तों में भी बदलाव किया है। अब संबंधित व्यक्ति के खिलाफ पिछले पांच वर्षों के दौरान कम से कम दो मामलों में पुलिस रिपोर्ट दाखिल होना जरूरी होगा, जिसमें उसकी संलिप्तता सामने आई हो। इसके अलावा इसी अवधि में कम से कम एक मामले में दोषसिद्धि भी होनी चाहिए। पहले इसके लिए दो वर्ष की अवधि निर्धारित थी।
संशोधित कानून की धारा 12 के तहत जिलाधिकारी पहली बार में अधिकतम छह महीने के लिए किसी व्यक्ति को जिले या संबंधित क्षेत्र से बाहर करने का आदेश दे सकेंगे। समीक्षा के बाद इस अवधि को छह-छह महीने के लिए आगे बढ़ाया जा सकेगा।
जिला बदर के आदेश के खिलाफ कर सकेंगे अपील
सीसीए के तहत जिलाधिकारी द्वारा जिला बदर या निष्कासन का आदेश दिए जाने पर प्रभावित व्यक्ति प्रमंडलीय आयुक्त के समक्ष अपील कर सकेगा। सरकार का कहना है कि कानून में किए गए बदलावों का उद्देश्य संगठित अपराध और असामाजिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।
2024 से लागू बिहार सीसीए कानून में पहले भारतीय दंड संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 से संबंधित धाराएं शामिल थीं। संशोधन के बाद इनकी जगह भारतीय न्याय संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की संबंधित धाराएं शामिल की गई हैं। इससे न्यायिक प्रक्रिया में आने वाली तकनीकी बाधाओं को दूर करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
डीएम को मिलेंगे ये अहम अधिकार
संशोधित कानून के तहत जिलाधिकारी चिह्नित अपराधी को जिले या जिले के किसी हिस्से से बाहर जाने का आदेश दे सकेंगे। इसके अलावा अपराधी को समय-समय पर थाने में हाजिरी लगाने और अपनी गतिविधियों की जानकारी देने का निर्देश भी दिया जा सकेगा।
डीएम को संदिग्धों की तलाशी, संपत्ति जब्त करने और वारंट जारी करने की शक्ति भी दी गई है। लोक व्यवस्था के लिए खतरा पैदा करने वाले अपराधियों को हिरासत में लेने का आदेश भी जिलाधिकारी दे सकेंगे।
किन अपराधों में लगेगा सीसीए
संशोधित कानून के तहत सार्वजनिक या निजी संपत्ति पर अवैध कब्जा करने अथवा उसे भारी नुकसान पहुंचाने वाले अपराधी इसके दायरे में आएंगे। अवैध तरीके से किसी व्यक्ति को उसकी चल या अचल संपत्ति से बेदखल करने वाले भू-माफियाओं पर भी कार्रवाई की जा सकेगी।
पेपर लीक और संगठित कदाचार में शामिल लोगों पर सीसीए लगाया जा सकेगा। अवैध खनन और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने वाले अपराधी भी इसके दायरे में होंगे।
सोशल मीडिया के जरिए जाति, धर्म, भाषा या समुदाय के आधार पर शत्रुता अथवा घृणा फैलाने वालों पर भी सीसीए के तहत कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। मानव तस्करी में शामिल अपराधियों के अलावा विस्फोटक पदार्थ, हथियार, गोली और बम रखने या उनके कारोबार में शामिल लोगों पर भी यह कानून लागू किया जा सकेगा।



