
संभल में दिखाया सिंघम अवतार, अब बिजनौर के नए एसपी बने केके बिश्नोई; UPSC में हासिल की थी 174वीं रैंक
बिजनौर: उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में कई आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए हैं। इसी क्रम में 2018 बैच के आईपीएस अधिकारी कृष्ण कुमार बिश्नोई को बिजनौर का नया पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। संभल में अपनी सख्त कार्यशैली और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर चर्चा में रहे केके बिश्नोई अब बिजनौर में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालेंगे।
केके बिश्नोई की पहचान ऐसे पुलिस अधिकारी के तौर पर बनी है, जो अपराधियों पर सख्ती के साथ कार्रवाई के लिए जाने जाते हैं। संभल में करीब 23 महीने के कार्यकाल के दौरान भू-माफिया, बच्चा तस्करों और उपद्रवियों के खिलाफ की गई कार्रवाई ने उन्हें काफी चर्चित बनाया। इसी वजह से उन्हें ‘संभल का सिंघम’ भी कहा जाने लगा।
भारत-पाक सीमा के पास गांव में हुआ जन्म
केके बिश्नोई का जन्म वर्ष 1994 में राजस्थान के बालोतरा जिले के धौरीमन्ना गांव में हुआ था। उनका गांव भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब स्थित है। उनके पिता सुजाना राम बिश्नोई और मां गंगा देवी किसान हैं। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उनके माता-पिता ने बच्चों की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी।
केके बिश्नोई बचपन से ही पढ़ाई में बेहद होनहार रहे। वर्ष 2008 में महज 14 साल की उम्र में उन्होंने आठवीं कक्षा में पूरे राजस्थान में पहला स्थान हासिल किया था। वह छह भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। उनके भाई-बहन भी अलग-अलग सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं, जिनमें आरएएस अधिकारी, पटवारी, डॉक्टर और नर्सिंग अधिकारी शामिल हैं।
दिल्ली में पढ़ाई, चीन मामलों के विशेषज्ञ रहे
गांव से शुरुआती शिक्षा पूरी करने के बाद केके बिश्नोई दिल्ली पहुंचे। उन्होंने सेंट स्टीफंस कॉलेज से राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र में स्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा में परास्नातक की डिग्री हासिल की। उनके पास चीन अध्ययन में एमफिल की डिग्री भी है।
आईपीएस बनने से पहले केके बिश्नोई विदेश मंत्रालय में चीन मामलों के विशेषज्ञ के तौर पर काम कर चुके हैं। इसके अलावा वह संयुक्त राष्ट्र में भी सेवाएं दे चुके हैं। प्रशासनिक और अंतरराष्ट्रीय मामलों की उनकी पृष्ठभूमि ने उनके करियर को अलग पहचान दी।
दूसरे प्रयास में UPSC में हासिल की 174वीं रैंक
सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य लेकर केके बिश्नोई ने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी शुरू की। वर्ष 2017 की सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में अखिल भारतीय स्तर पर 174वीं रैंक हासिल की।
इसके बाद वह 2018 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी बने। हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश में सेवा का अवसर मिला।
मेरठ और गोरखपुर में भी दिखा सख्त अंदाज
आईपीएस बनने के बाद केके बिश्नोई ने मेरठ और गोरखपुर में भी सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने माफिया बदन सिंह बद्दो जैसे अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की। उनके कार्यकाल में अपराधियों की अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई की गई और 800 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति जब्त किए जाने का दावा किया गया।
इसके बाद उन्हें संभल का पुलिस अधीक्षक बनाया गया। वहां उन्होंने करीब 23 महीने तक जिम्मेदारी संभाली और अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की।
संभल में ‘सिंघम’ की बनी पहचान
संभल में भू-माफिया, बच्चा तस्करों और उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के चलते केके बिश्नोई की अलग पहचान बनी। शाही जामा मस्जिद विवाद और उसके बाद हुई हिंसा के दौरान भी उन्होंने स्थिति को संभालने में अहम भूमिका निभाई। उनकी कार्यशैली की प्रदेश स्तर पर चर्चा हुई और उन्हें ‘संभल का सिंघम’ कहा जाने लगा।
अब बिजनौर में नई जिम्मेदारी मिलने के बाद उनके सामने जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपराध पर प्रभावी नियंत्रण की चुनौती होगी।
पत्नी भी हैं आईपीएस अधिकारी
केके बिश्नोई की पत्नी अंशिका वर्मा भी उत्तर प्रदेश कैडर की आईपीएस अधिकारी हैं। वह 2021 बैच की अधिकारी हैं और वर्तमान में बरेली में अपर पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात हैं।
केके बिश्नोई की कहानी ग्रामीण परिवेश से निकलकर देश की प्रतिष्ठित सिविल सेवा में पहुंचने और फिर पुलिस प्रशासन में अपनी अलग पहचान बनाने की यात्रा के तौर पर सामने आती है। उनकी शैक्षणिक उपलब्धियां और पुलिस सेवा में सख्त कार्यशैली उन्हें छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए प्रेरणा का उदाहरण बनाती हैं।



