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कंधे की अकड़न को न करें नजरअंदाज, धीरे-धीरे बढ़ता दर्द हो सकता है फ्रोजन शोल्डर का संकेत

नई दिल्ली: कंधे में दर्द या लगातार बनी रहने वाली अकड़न को अक्सर लोग सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई मामलों में यही परेशानी फ्रोजन शोल्डर का संकेत हो सकती है। इसे एडहेसिव कैप्सुलिटिस भी कहा जाता है। इसमें कंधे के जोड़ में दर्द और अकड़न बढ़ने लगती है और समय के साथ हाथ की सामान्य गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं।

फ्रोजन शोल्डर के लक्षण आमतौर पर अचानक सामने नहीं आते, बल्कि धीरे-धीरे विकसित होते हैं। लंबे समय तक कंधे के दर्द को नजरअंदाज करने या चोट, सर्जरी के बाद कंधे को लंबे समय तक स्थिर रखने से इस समस्या का खतरा बढ़ सकता है।

40 से 60 साल की उम्र में ज्यादा खतरा

फ्रोजन शोल्डर की समस्या आमतौर पर 40 से 60 साल की उम्र के बीच अधिक देखी जाती है। महिलाओं में भी इसका जोखिम अपेक्षाकृत ज्यादा बताया जाता है। इस स्थिति में कंधे की मांसपेशियों और जोड़ के आसपास अकड़न बढ़ने लगती है, जिससे हाथ को सामान्य तरीके से हिलाना मुश्किल हो जाता है।

कंधे की गतिविधि प्रभावित होने के कारण रोजमर्रा के काम जैसे कपड़े पहनना, हाथ ऊपर उठाना या पीछे की ओर ले जाना भी मुश्किल हो सकता है। डायबिटीज से पीड़ित लोगों में फ्रोजन शोल्डर का जोखिम 10 से 20 प्रतिशत तक बताया गया है। कुछ मामलों में दोनों कंधों में भी इसके लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

क्यों होता है फ्रोजन शोल्डर

कंधे के जोड़ के बाहर एक कैप्सूल होता है। फ्रोजन शोल्डर की स्थिति में यह कैप्सूल सख्त होने लगता है, जिससे कंधे की गति सीमित हो जाती है। किन लोगों में यह समस्या विकसित होगी, इसका पहले से पता लगाना हमेशा आसान नहीं होता।

हालांकि, लंबे समय तक कंधे को स्थिर रखने की स्थिति में इसका खतरा बढ़ सकता है। सर्जरी के बाद या हाथ में फ्रैक्चर होने पर कंधे की गतिविधि कम हो जाना इसके प्रमुख कारणों में शामिल हो सकता है।

तीन चरणों में बढ़ती है समस्या

फ्रोजन शोल्डर की समस्या आमतौर पर तीन चरणों में विकसित होती है।

फ्रीजिंग स्टेज: इस चरण में कंधे को हिलाने पर दर्द होता है और धीरे-धीरे उसकी गतिविधि सीमित होने लगती है।

फ्रोजन स्टेज: इस दौरान दर्द कुछ कम हो सकता है, लेकिन कंधे की अकड़न काफी बढ़ जाती है। हाथ का इस्तेमाल करना और उसे सामान्य तरीके से हिलाना मुश्किल हो सकता है।

थॉइंग स्टेज: इस चरण में कंधे की गतिविधि धीरे-धीरे बेहतर होने लगती है और हाथ की गति में सुधार आना शुरू हो जाता है।

किन लोगों में बढ़ सकता है जोखिम

उम्र बढ़ने के साथ फ्रोजन शोल्डर का खतरा बढ़ सकता है। खासकर 40 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों और महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है।

इसके अलावा लंबे समय तक कंधे को आराम की स्थिति में रखने से भी जोखिम बढ़ सकता है। रोटेटर कफ की चोट, हाथ में फ्रैक्चर, स्ट्रोक और सर्जरी के बाद ठीक होने की प्रक्रिया के दौरान कंधे की गतिविधि कम होने जैसी स्थितियां भी इससे जुड़ी हो सकती हैं।

फ्रोजन शोल्डर से बचाव के लिए क्या करें

कंधे में चोट, हाथ में फ्रैक्चर या स्ट्रोक के बाद लंबे समय तक कंधे की गतिविधि बंद रहने से फ्रोजन शोल्डर का खतरा बढ़ सकता है। अगर चोट के बाद कंधा हिलाने में परेशानी हो रही है तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

डॉक्टर की सलाह के अनुसार कुछ विशेष व्यायाम करने से कंधे की गतिविधि बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, चोट या दर्द की स्थिति में बिना विशेषज्ञ की सलाह के कंधे पर जोर डालने वाले व्यायाम नहीं करने चाहिए। फ्रोजन शोल्डर से राहत पाने में समय लग सकता है, इसलिए लगातार दर्द और अकड़न को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

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