
नई दिल्ली: दीपावली के पांच दिवसीय त्योहार में गोवर्धन पूजा का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के साथ गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा की जाती है। घरों में गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर उसे फूलों से सजाया जाता है और अन्नकूट का भोग लगाया जाता है। आमतौर पर यह पर्व दिवाली के अगले दिन मनाया जाता है, लेकिन वर्ष 2026 में तिथि के संयोग के कारण लोगों के बीच इसकी तारीख को लेकर असमंजस है। ऐसे में सवाल है कि गोवर्धन पूजा 9 नवंबर को होगी या 10 नवंबर को? आइए जानते हैं सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजन सामग्री और पूजा की पूरी विधि।
10 नवंबर को मनाई जाएगी गोवर्धन पूजा
हिंदू पंचांग के अनुसार, गोवर्धन पूजा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर शुरू होगी और 10 नवंबर को दोपहर 2 बजे तक रहेगी।
उदया तिथि के आधार पर गोवर्धन पूजा 10 नवंबर, मंगलवार को मनाई जाएगी। इस बार दीपावली और गोवर्धन पूजा के बीच एक दिन का अंतर रहेगा।
गोवर्धन पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त
गोवर्धन पूजा के लिए सुबह का समय विशेष शुभ माना जाता है। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय के समय के अनुसार पूजा के मुहूर्त में अंतर रहेगा।
- पटना में पूजा का शुभ समय सुबह 6 बजकर 4 मिनट से 8 बजकर 16 मिनट तक रहेगा।
- दिल्ली में पूजा का शुभ समय सुबह 6 बजकर 40 मिनट से 8 बजकर 50 मिनट तक रहेगा।
श्रद्धालु अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय देख सकते हैं।
क्यों मनाई जाती है गोवर्धन पूजा?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में ब्रज के लोग अच्छी बारिश और फसल की कामना से इंद्र देव की पूजा किया करते थे। भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया कि जीवन और आजीविका के लिए गोवर्धन पर्वत, गायों और प्रकृति का विशेष महत्व है। इसके बाद ब्रजवासियों ने इंद्र की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा की।
इससे नाराज होकर इंद्र देव ने ब्रज में मूसलाधार बारिश शुरू कर दी। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया और सभी ब्रजवासियों को उसके नीचे आश्रय देकर बारिश से उनकी रक्षा की। इसी घटना की याद में हर साल गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है।
गोवर्धन पूजा के लिए जुटा लें ये सामग्री
गोवर्धन पूजा की तैयारी के लिए कुछ जरूरी पूजन सामग्री पहले से जुटा लेना बेहतर रहता है। पूजा में इन चीजों की आवश्यकता होती है:
- गाय का गोबर
- फूल और फूलों की माला
- रोली और अक्षत
- हल्दी और धूप
- दीपक, घी और रुई की बाती
- गंगाजल या साफ पानी
- फल और मिठाइयां
- पान और सुपारी
- नारियल और कलश
- भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर
- अन्नकूट के लिए मौसमी सब्जियां, अनाज और पकवान
कैसे करें गोवर्धन पर्वत की पूजा?
गोवर्धन पूजा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद घर के आंगन या किसी खुले स्थान पर गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं। इसे फूलों, रोली और अक्षत से सजाएं।
इसके पास भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा स्थापित करें और दीपक जलाकर विधि-विधान से पूजा करें। भगवान को फल, मिठाई और विभिन्न पकवानों का भोग लगाएं। इसके बाद गोवर्धन पर्वत की सात परिक्रमा करने की परंपरा है। परिक्रमा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
अन्नकूट का भोग लगाने की क्या है परंपरा?
गोवर्धन पूजा को अन्नकूट पर्व के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को कई तरह के अनाज, मौसमी सब्जियों और पकवानों से तैयार भोजन का भोग लगाया जाता है। मंदिरों में भी इस अवसर पर विशेष आयोजन होते हैं। कई स्थानों पर भगवान को 56 प्रकार के व्यंजन अर्पित करने की परंपरा है।
धार्मिक मान्यता है कि अन्नकूट का प्रसाद ग्रहण करने से घर में अन्न-धन की कमी नहीं होती और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
गोवर्धन पूजा में गायों की आराधना का भी विशेष महत्व
इस पर्व पर गोवर्धन पर्वत के साथ गायों की पूजा करने की भी परंपरा है। हिंदू धर्म में गाय को पूजनीय और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। इस दिन गायों को स्नान कराकर सजाया जाता है और उनके माथे पर तिलक लगाया जाता है। इसके बाद उन्हें हरा चारा, गुड़ और अन्य खाद्य सामग्री खिलाई जाती है।
भगवान श्रीकृष्ण को गोपाल और गोविंद के नाम से भी जाना जाता है। यही वजह है कि गोवर्धन पूजा पर गोवंश, प्रकृति और अन्न के प्रति आभार व्यक्त करने की परंपरा है।



