भारतीय गेंदबाजों की शॉर्ट गेंदों से पस्त हुए कीवी बल्लेबाज, 25 साल बाद न्यूजीलैंड के नाम दर्ज हुई शर्मनाक उपलब्धि

वेलिंगटन: न्यूजीलैंड की धरती पर भारतीय तेज गेंदबाजों ने अपनी रफ्तार और उछाल से मेजबान बल्लेबाजों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पांच मैचों की वनडे सीरीज के शुरुआती दोनों मुकाबलों में न्यूजीलैंड की टीम 200 रन का आंकड़ा पार नहीं कर सकी। दूसरे वनडे में कीवी टीम महज 134 रन पर सिमट गई। इसके साथ ही न्यूजीलैंड ने 25 साल पुराने अपने एक अनचाहे रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। भारतीय गेंदबाजों की शॉर्ट पिच गेंदें और बाउंसर इस प्रदर्शन की अहम वजह बनकर सामने आए हैं।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच शनिवार, 7 नवंबर को वेलिंगटन में सीरीज का दूसरा मुकाबला खेला जा रहा है। इससे पहले चार नवंबर को हुए पहले वनडे में न्यूजीलैंड की टीम 185 रन पर ऑलआउट हो गई थी। दूसरे मैच में उसका स्कोर 134 रन रहा। इस तरह न्यूजीलैंड लगातार दो वनडे मुकाबलों में 200 रन से कम के स्कोर पर सिमट गई।
2001 के बाद पहली बार दो मैचों में ऐसा हाल
न्यूजीलैंड के वनडे इतिहास में ऐसा 25 साल बाद हुआ है, जब टीम किसी सीरीज के लगातार दो मुकाबलों में 200 रन से पहले ऑलआउट हुई है। इससे पहले जनवरी-फरवरी 2001 में श्रीलंका के खिलाफ खेली गई वनडे सीरीज में कीवी टीम को लगातार दो मैचों में 200 रन से कम के स्कोर पर समेट दिया गया था। अब भारतीय गेंदबाजों ने भी न्यूजीलैंड को इसी स्थिति में पहुंचा दिया है।
शॉर्ट पिच गेंदों ने कीवी बल्लेबाजों को किया परेशान
भारतीय गेंदबाजों की सफलता के पीछे शॉर्ट पिच गेंदबाजी और बाउंसर का अहम योगदान रहा है। तेज उछाल वाली गेंदों के साथ गेंदबाजों ने लेंथ में बदलाव कर न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों को लगातार दबाव में रखा। शुरुआती दो मैचों में गिरे न्यूजीलैंड के कुल 20 विकेटों में से नौ विकेट शॉर्ट पिच गेंदों पर मिले हैं। इनमें से पांच विकेट गुरनूर बराड़ के नाम रहे।
गुरनूर बराड़ के आने से भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण को अतिरिक्त मजबूती मिली है। उनकी रफ्तार के साथ लाइन और लेंथ पर नियंत्रण भी न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में टीम के काम आया है।
गुरनूर बराड़ ने झटके सात विकेट
दोनों मुकाबलों में भारतीय गेंदबाजों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो गुरनूर बराड़ सबसे आगे रहे हैं। उन्होंने अब तक सात विकेट हासिल किए हैं। अंशुल कम्बोज और अर्शदीप सिंह ने चार-चार विकेट लिए हैं। बाकी विकेट अन्य भारतीय गेंदबाजों के खाते में गए हैं या बल्लेबाज रन आउट हुए हैं।
अंशुल कम्बोज ने भी इन दोनों मुकाबलों में प्रभावशाली गेंदबाजी की है। भारतीय तेज गेंदबाजों ने शॉर्ट पिच गेंदों, बाउंसर और अलग-अलग उछाल वाली गेंदों का इस्तेमाल कर न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। शुरुआती दो मैचों में यह रणनीति भारतीय टीम के लिए कारगर साबित हुई है।



