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डायबिटीज मरीजों के लिए कौन सा दूध है बेहतर? ऊंटनी के दूध को लेकर रिसर्च में सामने आई ये खास बात

नई दिल्ली: दूध को आमतौर पर सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। इसमें कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर और हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करते हैं। हालांकि, डायबिटीज से जूझ रहे लोगों को दूध पीते समय कार्बोहाइड्रेट और कैलोरी की मात्रा पर खास ध्यान देना पड़ता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति को एक बार के भोजन में करीब 45 से 60 ग्राम कार्बोहाइड्रेट लेने की सलाह दी जाती है। एक गिलास दूध में लगभग 15 ग्राम कार्बोहाइड्रेट हो सकता है। ऐसे में अगर नाश्ते के साथ दूध लिया जा रहा है तो पूरे भोजन की कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट मात्रा का हिसाब रखना जरूरी हो जाता है।

गाय-भैंस के दूध में फैट और कैलोरी की मात्रा

आमतौर पर भारतीय घरों में गाय या भैंस के दूध का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, इनमें फैट और कैलोरी की मात्रा अधिक हो सकती है। यही वजह है कि डायबिटीज मरीजों के लिए दूध का चुनाव करते समय उसकी पोषण संरचना को ध्यान में रखना जरूरी माना जाता है।

कुछ शोधों में बिना चीनी वाले बादाम के दूध को भी मधुमेह से जूझ रहे लोगों के लिए एक विकल्प बताया गया है। इसमें कैल्शियम की अच्छी मात्रा होती है। एक कप बादाम के दूध में करीब 40 कैलोरी, शून्य सैचुरेटेड फैट और लगभग 2 ग्राम कार्बोहाइड्रेट बताया गया है। इसे सुबह के नाश्ते में साबुत अनाज की ब्रेड के साथ लिया जा सकता है।

टाइप-2 डायबिटीज में कच्चे दूध को लेकर क्या कहती है रिसर्च

टाइप-2 डायबिटीज को लेकर कुछ शोधों में कच्चे दूध में मौजूद पामिटोलेइक एसिड का भी जिक्र किया गया है। बताया गया है कि यह इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार से जुड़ा हो सकता है। एक अध्ययन में यह भी पाया गया कि अधिक फैट वाले डेयरी उत्पादों का सेवन करने वाले लोगों में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा 44 प्रतिशत तक कम देखा गया।

वहीं, कम फैट वाले डेयरी उत्पादों के सेवन और टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम के बीच भी अध्ययन किए गए हैं। हालांकि, अलग-अलग लोगों में मधुमेह की स्थिति अलग हो सकती है और इस संबंध को पूरी तरह समझने के लिए अभी और शोध की जरूरत बताई गई है।

नाश्ते में दूध लेने को लेकर क्या है राय

नाश्ते को दिन के अहम भोजन में शामिल किया जाता है, क्योंकि यह रात के लंबे अंतराल के बाद लिया जाता है। टाइप-2 डायबिटीज में शरीर की इंसुलिन संबंधी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। ऐसे में भोजन का चुनाव और उसकी मात्रा ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कुछ शोधों में नाश्ते के दौरान दूध को शामिल करने की बात सामने आई है। हालांकि, दूध को डाइट में शामिल करते समय व्यक्ति की कुल कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट जरूरत को ध्यान में रखना जरूरी है।

ऊंटनी के दूध को लेकर सामने आई खास जानकारी

आमतौर पर भारतीय घरों में ऊंटनी के दूध का इस्तेमाल बहुत कम होता है। हालांकि, कुछ समय पहले हुए शोधों में कैमल मिल्क यानी ऊंटनी के दूध को लेकर टाइप-1 डायबिटीज से जुड़े संभावित फायदे बताए गए।

शोध के मुताबिक, ऊंटनी के दूध का सेवन ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है। इसके अलावा कुछ शोधों में डायबिटीज के कारण लिवर और किडनी पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करने की संभावना का भी उल्लेख किया गया है।

कुछ हालिया शोधों में टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों के लिए नाश्ते या स्नैक के दौरान दूध को एक विकल्प के तौर पर देखा गया है। वहीं, अन्य अध्ययनों में पूरे दिन संतुलित आहार लेने को डायबिटीज और मोटापे से बचाव के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है।

तो क्या डायबिटीज मरीजों को दूध पीना चाहिए?

डेयरी उत्पादों और टाइप-2 डायबिटीज के बीच संबंध को लेकर कई अध्ययन हो चुके हैं। कुछ शोधों में डेयरी उत्पादों के सेवन से टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम में कमी का संबंध पाया गया है। हालांकि, यह सवाल अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि हर डायबिटीज मरीज के लिए कौन सा दूध और कितनी मात्रा उपयुक्त है।

इसलिए मधुमेह के मरीजों को अपनी डाइट में दूध या अन्य डेयरी उत्पाद शामिल करने से पहले डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। साथ ही दूध की मात्रा के साथ उसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट और कैलोरी का भी ध्यान रखना जरूरी है।

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