
नई दिल्ली: चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवालों के बीच आयोग ने बुधवार को अपनी स्थिति स्पष्ट की। आयोग ने कहा कि आंतरिक विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय, सुझाव और आपत्तियां सामने आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि, आयोग के मुताबिक अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। यह सफाई ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की उस रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें दो चुनाव आयुक्तों की ओर से आयोग के भीतर कई मुद्दों पर आपत्तियां दर्ज किए जाने का दावा किया गया था।
लिखित नोट और अलग राय को बताया सामान्य प्रक्रिया
चुनाव आयोग ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत काम करने वाली संवैधानिक संस्था है। आयोग के भीतर लिखित नोट, आपसी चर्चा और आंतरिक जांच-परख की व्यवस्था सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग के मुताबिक किसी भी फैसले से पहले अधिकारी और चुनाव आयुक्त अपने सवाल, सुझाव या आपत्तियां दर्ज कर सकते हैं।
अलग राय का मतलब अंतिम फैसले से असहमति नहीं
आयोग ने स्पष्ट किया कि तीनों चुनाव आयुक्तों में से प्रत्येक को अपनी राय और सुझाव रखने का अधिकार है। इसलिए किसी प्रस्ताव या मसौदे पर आंतरिक स्तर पर दर्ज की गई अलग राय को अंतिम फैसले से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा। आयोग ने कहा कि पिछले 10 महीनों के कुछ चुनिंदा आंतरिक नोट्स के आधार पर उसके पूरे कामकाज की तस्वीर नहीं देखी जा सकती।
करीब 40 नई पहल और चुनाव सुधारों का दावा
चुनाव आयोग के अनुसार, पिछले एक साल में करीब 40 नई पहल और कई चुनाव सुधार किए गए हैं। इनमें देशभर में लागू किया गया विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR भी शामिल है। आयोग का कहना है कि इन सभी फैसलों को पूरे आयोग की सर्वसम्मति से लिया गया।
आधिकारिक आदेश कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी होते हैं
आयोग ने अपने आधिकारिक आदेशों और फैसलों को लेकर भी सफाई दी। उसने कहा कि सभी आधिकारिक आदेश निर्धारित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी किए जाते हैं। आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 324 के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 का भी हवाला दिया। आयोग के मुताबिक किसी प्रस्ताव या मसौदे पर आंतरिक स्तर पर सवाल उठना अलग बात है, जबकि अंतिम आदेश तय प्रक्रिया के तहत जारी किया जाता है।
मतदाता सूची और ECINet पर भी आयोग का जवाब
मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पर उठे सवालों को लेकर आयोग ने कहा कि यह काम संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी और जिला निर्वाचन अधिकारी अपने कानूनी अधिकारों के तहत करते हैं। आयोग ने अपने डिजिटल मंच ECINet का जिक्र करते हुए कहा कि यह सख्त डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत संचालित होता है। वहीं, ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट में ECINet के जरिए मतदाता सूची के प्रबंधन और अधिकारियों की पहुंच को लेकर भी सवालों का उल्लेख किया गया है।
Form 6 में बदलाव को लेकर सामने आई थी आपत्ति
‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में SIR से जुड़े सवाल जोड़े गए थे। रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने मई में इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि वैधानिक Form 6 में बदलाव के लिए संबंधित नियमों में संशोधन जरूरी है। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने भी इस आपत्ति से सहमति जताई थी।
कांग्रेस ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि आयोग में फैसले बहुमत के आधार पर होते हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अपने सहयोगियों को भ्रमित करते हुए आयोग को अपने नियंत्रण में ले लिया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ये विपक्ष की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं, जबकि आयोग ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि उसकी आंतरिक प्रक्रिया में अलग-अलग राय रखना सामान्य है और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
चुनाव आयोग ने संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने की बात कही
चुनाव आयोग ने कहा कि वह अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी के साथ निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। आयोग ने अपने हालिया चुनावी कामकाज का उल्लेख करते हुए बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में चुनाव कराए जाने की बात भी कही।



