उत्तर प्रदेश

दिव्या मित्तल की सियासी अटकलों पर पहली बार बोलीं अनुप्रिया पटेल, कहा- कई अफसर बना चुके हैं पार्टी, जनता देगी जवाब

मीरजापुर: पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के विंध्यवासिनी धाम पहुंचने और उनके राजनीतिक कदमों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्रीय राज्यमंत्री और अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल ने पहली बार प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पहले भी कई प्रशासनिक अधिकारी राजनीति में आकर अपनी पार्टी बना चुके हैं और ऐसे लोगों को जनता अपने स्तर पर जवाब देती है।

दिव्या मित्तल के सियासी कदम को लेकर अटकलें तेज

पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल रविवार को मीरजापुर स्थित विंध्यवासिनी धाम पहुंचीं। उन्होंने नवरात्र के दौरान नौ दिनों तक दर्शन-पूजन और पाठ करने की बात कही है। इसके अलावा वह लहुरियादह क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था का निरीक्षण करेंगी और स्थानीय लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं भी सुनेंगी।

दिव्या मित्तल के इस दौरे के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि उन्होंने खुद स्पष्ट किया है कि वह फिलहाल किसी राजनीतिक दल में शामिल नहीं होने जा रही हैं। उन्होंने कहा कि अपने अगले कदम के बारे में जल्द जानकारी देंगी।

‘कई अफसर बना चुके हैं पार्टी’

वाराणसी सर्किट हाउस में बातचीत के दौरान अनुप्रिया पटेल ने दिव्या मित्तल को लेकर कहा कि कई अफसर पहले भी राजनीतिक दल बना चुके हैं। उन्होंने कहा कि मीरजापुर की जनता ऐसे फैसलों का जवाब खुद देगी। साथ ही उन्होंने आगामी चुनाव की तैयारियों को लेकर कहा कि उनका लक्ष्य इस बार शत-प्रतिशत जीत हासिल करना है।

मीरजापुर में दोनों के बीच रही थी खींचतान

अनुप्रिया पटेल मीरजापुर से सांसद हैं। दिव्या मित्तल जब मीरजापुर की जिलाधिकारी थीं, उस दौरान दोनों के बीच कई मुद्दों को लेकर खींचतान की खबरें सामने आई थीं। माना जा रहा है कि इन्हीं परिस्थितियों के बीच दिव्या मित्तल ने बाद में आईएएस सेवा से इस्तीफा दे दिया था।

दिव्या मित्तल ने हाल ही में मीरजापुर में अपने प्रस्तावित लहुरियादह विद्यालय को लेकर भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। उनके दौरे के दौरान यह मुद्दा भी चर्चा में रहा।

स्कूल निर्माण को लेकर दिव्या मित्तल ने रखी बात

पत्रकारों से बातचीत में दिव्या मित्तल ने लहुरियादह विद्यालय निर्माण को लेकर कहा कि बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल बनना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसके लिए प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को मिलकर उपयुक्त जमीन तलाशनी चाहिए, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा की सुविधा मिल सके।


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