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राजस्थान के पाली में ग्वार-गम फैक्ट्री में भीषण आग, 3 मजदूर 70% झुलसे; अंदर फंसे 2 लोगों की तलाश जारी

पाली: राजस्थान के पाली में रविवार देर रात ग्वार-गम फैक्ट्री में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। आग की लपटों के बीच मजदूर जान बचाने के लिए चिल्लाते हुए बाहर निकले। इस हादसे में तीन मजदूर करीब 70 प्रतिशत तक झुलस गए, जिन्हें गंभीर हालत में जोधपुर रेफर किया गया है। वहीं, फैक्ट्री के अंदर फंसे दो अन्य मजदूरों की तलाश जारी है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, फैक्ट्री में लिफ्ट के अंदर शॉर्ट सर्किट होने से आग लगी और देखते ही देखते इसने विकराल रूप ले लिया।

रात 11:30 बजे फैक्ट्री में लगी आग, मजदूरों में मची भगदड़

यह हादसा पाली शहर के औद्योगिक थाना क्षेत्र के फोर्थ फेज में स्थित सारड़ा बायो पॉलिमर्स ग्वार-गम फैक्ट्री में रविवार रात करीब 11:30 बजे हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार, फैक्ट्री के जिस हिस्से में काम चल रहा था, वहां लिफ्ट में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी। कुछ ही देर में आग तेजी से फैल गई और मजदूरों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

नाइट शिफ्ट में काम कर रहे थे 17 मजदूर, 12 ने बचाई जान

हादसे के समय फैक्ट्री में नाइट शिफ्ट के दौरान कुल 17 मजदूर काम कर रहे थे। आग फैलने के बाद अफरा-तफरी मच गई। इनमें से 12 मजदूर किसी तरह बाहर निकलने में कामयाब रहे। वहीं, विक्की (19), अवधेश कुमार (40) और राजू (28) भी बाहर आ गए, लेकिन गंभीर रूप से झुलसने के कारण अचेत हो गए।

तीनों मजदूर करीब 70 प्रतिशत तक झुलस गए थे। मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें संभाला और अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की। पहले तीनों को पाली के बांगड़ अस्पताल ले जाया गया, जहां से उनकी गंभीर हालत को देखते हुए जोधपुर रेफर कर दिया गया। दूसरी ओर, फैक्ट्री के अंदर फंसे दो मजदूरों का पता लगाने के लिए तलाश अभियान चलाया जा रहा है। मलबा हटाकर अंदर तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

साढ़े चार घंटे की मशक्कत के बाद आग पर पाया काबू

आग इतनी भीषण थी कि इसे बुझाने के लिए पाली के अलावा आसपास के शहरों से भी दमकल गाड़ियां बुलानी पड़ीं। दमकलकर्मी रात करीब 12 बजे घटनास्थल पर पहुंचे और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। सोजत, रानी, फालना और सुमेरपुर से भी दमकल की गाड़ियां मंगाई गईं।

करीब साढ़े चार घंटे तक चले अभियान के बाद सोमवार सुबह लगभग 4 बजे आग पर काबू पाया जा सका। इस दौरान दमकल की करीब आठ गाड़ियों ने 55 चक्कर लगाए। आग बुझने के बाद भी फैक्ट्री के भीतर फंसे मजदूरों की तलाश और मलबा हटाने का काम जारी रहा।

फैक्ट्री में रखे थे गैस के बड़े सिलेंडर, टला बड़ा हादसा

फैक्ट्री परिसर में गैस के बड़े सिलेंडर भी रखे हुए थे। राहत की बात यह रही कि आग की लपटें उन तक नहीं पहुंचीं। यदि सिलेंडरों तक आग पहुंच जाती, तो हादसा और ज्यादा गंभीर हो सकता था। आग की चपेट में आने से फैक्ट्री में खड़ा एक ट्रैक्टर-ट्रॉली भी जल गया।

घटना की सूचना मिलने पर पाली के एसडीएम विमलेंद्र सिंह राणावत, सीओ सिटी मंगलेश चुण्डावत और औद्योगिक थाना पुलिस मौके पर पहुंची। बचाव अभियान के दौरान फैक्ट्री की दीवार को जेसीबी से तोड़ा गया। इस प्रक्रिया में फैक्ट्री के अग्निशमन तंत्र की पाइपलाइन भी टूट गई।

स्थानीय लोगों ने अपनी कार से अस्पताल पहुंचाए झुलसे मजदूर

हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने भी घायलों की मदद के लिए पहल की। पाली के गुरु नगर निवासी रवि और महेंद्र ने बताया कि वे सजावट का काम करते हैं। फैक्ट्री से आग की ऊंची लपटें उठती देखकर वे घटनास्थल पर पहुंचे, जहां कुछ युवक झुलसी हालत में मिले।

दोनों ने एंबुलेंस के लिए फोन किया, लेकिन घायलों की हालत गंभीर देखकर उन्हें अपनी कार से बांगड़ अस्पताल पहुंचाया। इससे झुलसे मजदूरों को जल्द उपचार के लिए अस्पताल ले जाने में मदद मिली।

वार्ड-54 के पार्षद प्रतिनिधि गोपाल पंवार ने बताया कि वह पास के गरबा पंडाल में मौजूद थे। परिचित से फैक्ट्री में आग लगने की जानकारी मिलने पर वह मौके पर पहुंचे। वहां सड़क पर दो युवक बुरी तरह झुलसे हुए पड़े थे। उन्हें गाड़ी से अस्पताल भेजा गया और दमकल विभाग को भी सूचना दी गई। हालांकि, पंवार के मुताबिक दमकल के पहुंचने में देरी हुई।

फैक्ट्री में लगा था अग्निशमन तंत्र, लेकिन नहीं हो सका इस्तेमाल

फैक्ट्री में आग बुझाने के लिए अग्निशमन तंत्र लगा हुआ था, लेकिन आग अचानक तेजी से फैलने के कारण मजदूरों में जान बचाकर बाहर निकलने की अफरा-तफरी मच गई। ऐसे में इस व्यवस्था का इस्तेमाल नहीं हो सका। बाद में बचाव अभियान के दौरान जेसीबी से दीवार तोड़ी गई, जिससे पाइपलाइन टूट गई। फिलहाल फैक्ट्री में फंसे दो मजदूरों की तलाश जारी है।

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