मध्य प्रदेशराज्य

सिंहस्थ-2028 की तैयारी के बीच ओंकारेश्वर में बंद का असर, दुकानें-होटल से लेकर ऑटो और नाव तक थमे

खंडवा: मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत चल रहे निर्माण कार्यों से प्रभावित स्थानीय लोग अपनी मांगों को लेकर लामबंद हो गए हैं। जिला प्रशासन के साथ सहमति नहीं बनने के विरोध में नगरवासियों ने दो दिन तक ओंकारेश्वर बंद रखने का फैसला किया है। 19 अक्टूबर को बंद के पहले दिन लगभग सभी व्यावसायिक गतिविधियां ठप रहीं। फूल-माला और प्रसाद बेचने वाले छोटे दुकानदारों ने भी अपनी दुकानें बंद रखीं। वहीं, प्रशासन का कहना है कि स्थानीय लोगों से बातचीत जारी है और उनकी ज्यादातर मांगों पर सहमति बन चुकी है।

सिंहस्थ-2028 के लिए हो रहे निर्माण कार्य

ओंकारेश्वर में सिंहस्थ-2028 के दौरान बड़ी संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए विकास और विस्तार के काम किए जा रहे हैं। इस योजना के तहत सड़कों और रास्तों के किनारे दुकानें, मकान और अन्य गतिविधियां संचालित करने वाले लोगों को विस्थापित किया जा रहा है। इसी वजह से स्थानीय लोगों के बीच अपने रोजगार, मकान और भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।

प्रशासन के सामने रखी थीं 19 मांगें

स्थानीय लोगों की समिति ने पिछले महीने जिला प्रशासन के सामने 19 मांगें रखी थीं। समिति का आरोप है कि मांगों पर सहमति नहीं बनने के कारण बंद का निर्णय लेना पड़ा। प्रभावित लोगों की मांग है कि जिनकी दुकानें, मकान और रोजगार से जुड़ी गतिविधियां इस परियोजना के कारण प्रभावित हो रही हैं, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए और बेहतर पुनर्वास की व्यवस्था की जाए।

साधु-संतों ने भी बंद को दिया समर्थन

ओंकारेश्वर बंद को स्थानीय नागरिकों के साथ साधु-संतों का भी समर्थन मिला है। उनका कहना है कि पिछले साल भी जिला प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया था, लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ। ऐसे में अब वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस और भरोसेमंद व्यवस्था चाहते हैं।

बाजार बंद होने से श्रद्धालुओं को परेशानी

बंद के दौरान ओंकारेश्वर में छोटी-बड़ी दुकानें बंद रहीं। फुटपाथ पर फूल-माला और प्रसाद बेचने वाले दुकानदारों ने भी कारोबार नहीं किया। होटल और स्थानीय परिवहन सेवाएं बंद रहने से बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। श्रद्धालुओं का कहना है कि विकास कार्यों के साथ स्थानीय लोगों के रोजगार और आजीविका का भी ध्यान रखा जाना चाहिए, ताकि बातचीत से कोई बीच का रास्ता निकाला जा सके।

प्रशासन का दावा- 19 में से 17 मांगों पर सहमति

जिला प्रशासन के मुताबिक, स्थानीय लोगों के साथ लगातार बातचीत की जा रही है। उनकी ओर से रखी गई मांगों पर गंभीरता से विचार किया गया है और 19 में से 17 मांगें मान ली गई हैं। प्रशासन ने बताया कि पुनर्वास के लिए स्थान तय करने में कुछ दिक्कत आ रही है, जिसे जल्द सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित लोगों का बेहतर पुनर्वास सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है, ताकि उनकी आजीविका पर प्रतिकूल असर न पड़े।

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