MP Weather Update: मध्यप्रदेश में चक्रवात अर्नब का असर, 6 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट; करवा चौथ पर छा सकते हैं बादल

भोपाल: मध्यप्रदेश में मानसून की विदाई के बाद एक बार फिर बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान अर्नब का असर प्रदेश के मौसम पर दिखाई दे रहा है। बुधवार को 31 जिलों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की आशंका है। पूर्वी मध्यप्रदेश के छह जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि भोपाल समेत कई शहरों में बादल छाने और हल्की बूंदाबांदी के आसार हैं। अगले दो दिनों में मौसम की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। वहीं, 29 अक्टूबर को करवा चौथ के दिन भी बादल चांद के दीदार में बाधा बन सकते हैं।
पूर्वी मध्यप्रदेश में बारिश की संभावना, पश्चिमी जिलों को राहत
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, बुधवार को सीधी, सिंगरौली, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में भारी बारिश हो सकती है। इन जिलों में किसानों को खेतों में खड़ी फसलों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।
इसके अलावा भोपाल, नर्मदापुरम, भिंड, दतिया, रायसेन, सीहोर, विदिशा, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सतना, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है।
दूसरी ओर, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर समेत 24 जिलों में बुधवार को बारिश का अलर्ट नहीं है। इन इलाकों में मौसम अपेक्षाकृत साफ रहने और धूप निकलने के आसार हैं।
करवा चौथ पर चांद देखने में हो सकती है परेशानी
29 अक्टूबर को चक्रवात का असर बढ़ने का अनुमान है। इस दिन प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में आंधी, गरज-चमक और बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। मौसम विभाग ने 11 जिलों में अति भारी और नौ जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। अन्य क्षेत्रों में भी हल्की बारिश होने की संभावना है।
करवा चौथ पर महिलाएं चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलती हैं। ऐसे में शाम के समय आसमान में बादल छाए रहने से कई शहरों में चांद देखने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि, चंद्र दर्शन हो पाएंगे या नहीं, यह उस समय आसमान में बादलों की स्थिति पर निर्भर करेगा। 30 और 31 अक्टूबर को भी प्रदेश में मौसम पूरी तरह सामान्य होने के आसार नहीं हैं। ऐसे में अगले कुछ दिन बारिश और बादलों के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेंगे।
किसानों की बढ़ सकती है चिंता, धान की कटाई और गेहूं की बुआई पर असर
चक्रवाती तूफान का प्रभाव पूर्वी मध्यप्रदेश में अधिक रहने का अनुमान है। इस क्षेत्र के कई जिलों में धान की फसल पकने के करीब है। ऐसे में लगातार बारिश होने पर फसल की कटाई, खेतों में उपज सुखाने और उसे सुरक्षित रखने में परेशानी आ सकती है।
जबलपुर संभाग के बालाघाट और छिंदवाड़ा समेत कई जिलों में धान की खेती होती है। वहीं, रीवा संभाग में किसान गेहूं की बुआई की तैयारी कर रहे हैं। बारिश के कारण खेतों में नमी बढ़ने पर बुआई का काम प्रभावित हो सकता है।
जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभागों में धान के अलावा सोयाबीन, मक्का, उड़द, अरहर और तिल जैसी खरीफ फसलें भी उगाई जाती हैं। इन फसलों पर बारिश का कितना असर पड़ेगा, यह वर्षा की मात्रा और उसके जारी रहने की अवधि पर निर्भर करेगा।
मानसून की विदाई के बाद भी क्यों हो रही बारिश?
मध्यप्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून तीन अक्टूबर को विदा हो चुका है। इसके बावजूद अक्टूबर में बारिश का सिलसिला जारी है। इसकी प्रमुख वजह मानसून से अलग सक्रिय होने वाली मौसमी प्रणालियां हैं। बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती तूफान का असर भी प्रदेश के मौसम पर पड़ रहा है।
मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के मुताबिक, पिछले दस वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश, गर्मी और ठंड जैसी अलग-अलग मौसमी परिस्थितियां दर्ज की गई हैं। इस बार भी महीने की शुरुआत में तेज धूप और साफ मौसम देखने को मिला, जबकि रात के तापमान में गिरावट के साथ कई जिलों में बारिश हुई है। इस साल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन सक्रिय रहा। मानसून की विदाई के बाद भी दूसरी मौसमी प्रणालियों के सक्रिय होने से बारिश हो रही है।
रात में बढ़ी ठंडक, दिन में गर्मी का असर बरकरार
प्रदेश में बारिश की संभावनाओं के बीच रात के तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। शाजापुर के गिरवर क्षेत्र में न्यूनतम तापमान 12.7 डिग्री सेल्सियस रहा। शहडोल के कल्याणपुर और पचमढ़ी में पारा 13.8 डिग्री, रायसेन में 14.5 डिग्री, कटनी के करौंदी में 14.7 डिग्री और दमोह में 15 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
वहीं, दिन के तापमान में अभी खास गिरावट नहीं आई है। उज्जैन, भोपाल के बैरसिया, धार, खंडवा, खजुराहो, सागर, मंदसौर और नीमच के मरुखेड़ा में अधिकतम तापमान 34.3 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा।
इस तरह प्रदेश में दिन और रात के मौसम में अंतर बना हुआ है। दिन में गर्मी महसूस हो रही है, जबकि रातें अपेक्षाकृत ठंडी होने लगी हैं। आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने पर तापमान में और बदलाव देखने को मिल सकता है।
मध्यप्रदेश में सामान्य से 4 फीसदी कम हुई मानसूनी बारिश
जून से सितंबर के बीच मध्यप्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश दर्ज की गई। इस अवधि में सामान्य बारिश का आंकड़ा 949.5 मिलीमीटर यानी लगभग 37.3 इंच है। इस हिसाब से प्रदेश में मानसून के दौरान सामान्य से करीब चार फीसदी कम बारिश हुई।
हालांकि, पूर्वी मध्यप्रदेश में सामान्य से चार फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि पश्चिमी मध्यप्रदेश में यह आंकड़ा सामान्य से 12 फीसदी कम रहा। प्रदेश के 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा हुआ, जबकि 30 जिलों में बारिश की कमी बनी रही।
जून में सामान्य से 14 फीसदी कम बारिश होना इसकी प्रमुख वजह रहा। इसके बाद जुलाई, अगस्त और सितंबर में अच्छी बारिश हुई, लेकिन शुरुआती कमी पूरी तरह दूर नहीं हो सकी। इसी कारण पूरे मानसून सीजन का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा।
अब चक्रवाती तूफान के चलते पूर्वी मध्यप्रदेश में बारिश बढ़ने की संभावना है। इससे जलस्रोतों और भूजल स्तर को फायदा मिल सकता है। हालांकि, खेतों में तैयार फसलों और गेहूं की बुआई पर संभावित असर को देखते हुए किसानों को मौसम के अगले पूर्वानुमान पर नजर रखनी होगी।



