
जौनपुर में दो नाबालिगों की शादी की तैयारी! दुल्हन 12 तो दूल्हा था 17 साल का, ऐन वक्त पर रुकी शादी
जौनपुर: उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के चंदवक क्षेत्र के एक गांव में प्रशासन, पुलिस और सामाजिक संस्था की संयुक्त कार्रवाई से करीब 12 साल की बच्ची का बाल विवाह रुकवा दिया गया। शादी की तैयारियां पूरी हो चुकी थीं और घर में बारात आने का इंतजार था। इसी दौरान आस्था महिला एवं बाल विकास संस्था के कार्यकर्ताओं को मामले की जानकारी मिली। मौके पर पहुंची टीम ने नाबालिग बच्ची की शादी रुकवा दी। बताया गया कि दूल्हे की उम्र भी महज 17 साल थी। इस कार्रवाई से दो नाबालिगों को बाल विवाह से बचाया गया।
मजदूर से मिली जानकारी, संस्था ने तुरंत की कार्रवाई
संस्था की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, एक सामाजिक कार्यकर्ता को अपने यहां काम करने वाले मजदूर से शादी की जानकारी मिली थी। मजदूर ने बताया कि उसे एक रिश्तेदार की बेटी की शादी में शामिल होने के लिए जल्दी जाना है। जब कार्यकर्ता ने बच्ची की उम्र के बारे में पूछा तो पता चला कि वह बहुत छोटी है और शादी भी नहीं करना चाहती, लेकिन परिवार उसकी शादी करने की तैयारी में जुटा है।
इसके बाद कार्यकर्ता ने आस्था महिला एवं बाल विकास संस्था को सूचना दी। संस्था के प्रतिनिधियों ने मौके पर पहुंचकर जानकारी की पुष्टि की। शादी की तैयारियां अंतिम चरण में थीं और घर में रस्में चल रही थीं। इसके बाद संस्था ने चाइल्डलाइन, बाल विवाह निषेध अधिकारी और पुलिस को सूचित किया। संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर शादी रुकवा दी।
परिजनों को समझाया कानून, पिता ने दिया लिखित आश्वासन
टीम ने बच्ची के माता-पिता को बाल विवाह से जुड़े कानूनी प्रावधानों और कम उम्र में शादी के संभावित दुष्परिणामों के बारे में बताया। इसके बाद बच्ची के पिता ने हलफनामे पर हस्ताक्षर कर लिखित आश्वासन दिया कि बेटी की शादी बालिग होने के बाद ही की जाएगी।
बच्ची मुसहर समुदाय से है और उसके माता-पिता ईंट-भट्टे पर मजदूरी कर परिवार का गुजारा करते हैं। संस्था ने शादी की तैयारियों को देखते हुए बिचौलियों और संभावित सौदेबाजी की आशंका भी जताई है। हालांकि, इस संबंध में किसी निष्कर्ष की जानकारी नहीं दी गई है।

बच्ची बोली—शादी नहीं, पढ़ाई करना चाहती हूं
बाल कल्याण समिति के सामने पेश होने पर बच्ची ने बताया कि उसने कई बार घरवालों से कहा था कि वह शादी नहीं करना चाहती, बल्कि पढ़ना चाहती है। इसके बावजूद उसकी बात नहीं सुनी गई। बच्ची के मुताबिक, उससे मजदूरी भी कराई जाती थी।
संस्था के अनुसार, बच्ची कभी स्कूल नहीं गई है, लेकिन वह पढ़ना चाहती है। अब संस्था उसे शिक्षा से जोड़ने और स्कूल में दाखिला दिलाने की प्रक्रिया शुरू करेगी, ताकि उसे पढ़ाई का अवसर मिल सके।
‘बाल विवाह बच्ची के बचपन और अधिकारों पर हमला’
आस्था महिला एवं बाल विकास संस्था के निदेशक संतोष कुमार पांडेय ने कहा कि शादी में कई लोग मौजूद थे, लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा कि बच्ची की उम्र पढ़ने की है, शादी करने की नहीं। उन्होंने कहा कि बाल विवाह केवल परिवार का निजी मामला नहीं, बल्कि बच्ची के बचपन, शिक्षा और अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
पांडेय ने लोगों से अपील की कि कहीं भी बाल विवाह की जानकारी मिलने पर चुप रहने के बजाय संबंधित अधिकारियों को सूचना दें। संस्था का कहना है कि बच्ची को स्कूल से जोड़कर उसके भविष्य को बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा।
इस मामले में एक जागरूक कार्यकर्ता की सूचना और पुलिस-प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई के बाद शादी रुक सकी। अब बच्ची को शिक्षा से जोड़ने की तैयारी की जा रही है।



