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लाडकी बहिन योजना में बड़ा खुलासा, 14 हजार पुरुष उठा रहे थे लाभ; जांच के बाद 80 लाख नाम सूची से बाहर

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना’ की जांच में बड़ा खुलासा सामने आया है। पात्रता की विस्तृत जांच के बाद सरकार ने योजना से करीब 80 लाख लाभार्थियों के नाम हटा दिए हैं। इनमें हजारों ऐसे लोग शामिल पाए गए जो योजना की निर्धारित शर्तों पर खरे नहीं उतरते थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि लाभार्थियों की सूची में लगभग 14 हजार पुरुष भी शामिल थे।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक साक्षात्कार में बताया कि विभिन्न सरकारी डेटाबेस के मिलान और दस्तावेजों की जांच के दौरान बड़ी संख्या में अपात्र लाभार्थियों की पहचान हुई। उन्होंने कहा कि जांच में लगभग 14 हजार पुरुष, पांच लाख सरकारी कर्मचारी, करीब 10 लाख आयकरदाता और चार से पांच लाख ऐसे लोग सामने आए जिनके परिवार में वाहन मौजूद था।

उन्होंने बताया कि योजना शुरू करते समय पात्रता की कुछ शर्तें निर्धारित की गई थीं, लेकिन लाभार्थियों को स्वयं प्रमाणन के आधार पर आवेदन करने की अनुमति दी गई थी। बाद में जब दस्तावेजों की गहन जांच की गई तो कई अनियमितताएं सामने आईं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने भी इस बात पर सवाल उठाए थे कि लाभार्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन क्यों नहीं किया गया। इसके बाद सरकार ने लाभार्थियों के लिए केवाईसी प्रक्रिया अनिवार्य कर दी।

केवाईसी नहीं कराने वालों पर भी कार्रवाई

सरकार के अनुसार कई लाभार्थियों ने बार-बार सूचना दिए जाने के बावजूद अपनी केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं की। फडणवीस का कहना है कि ऐसे मामलों में आशंका है कि संबंधित लोग पात्रता की शर्तों को पूरा नहीं करते थे, इसलिए उन्होंने आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं किए।

उन्होंने बताया कि सरकार ने लगभग 25 लाख ऐसे मामलों में सुधार भी कराया है, जहां केवाईसी दस्तावेजों में तकनीकी या अन्य कमियां थीं।

पुरुष लाभार्थियों से होगी रकम की वसूली

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अपात्र पाए गए लोगों को एक बार की राहत देने पर सरकार विचार कर रही है, लेकिन पुरुष लाभार्थियों के मामले में राशि की वसूली की जाएगी। उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक सहायता देना है, इसलिए पुरुषों द्वारा लिया गया लाभ नियमों के विपरीत है।

फडणवीस ने कहा कि सार्वजनिक धन का उपयोग केवल निर्धारित नियमों और पात्रता मानकों के अनुसार ही किया जा सकता है। यदि अपात्र लोगों को लगातार लाभ दिया जाता रहा तो भविष्य में वित्तीय जवाबदेही से जुड़े गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

अब भी 1.7 करोड़ महिलाओं को मिल रहा लाभ

मुख्यमंत्री के अनुसार जांच और छंटनी के बाद भी योजना के तहत करीब 1.7 करोड़ महिला लाभार्थी लाभान्वित हो रही हैं। उन्होंने दावा किया कि यह संख्या देश में किसी भी राज्य की समान योजना के मुकाबले सबसे अधिक है।

जलवायु परिवर्तन को बताया बड़ी चुनौती

साक्षात्कार के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के सामने मौजूद चुनौतियों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और इसका कृषि अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला प्रभाव सरकार के लिए सबसे बड़ी चिंताओं में शामिल है।

वहीं महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने बताया कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) से जुड़ी सभी योजनाओं में ई-केवाईसी प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली गई है, जिससे योजनाओं की पारदर्शिता और पात्रता सत्यापन को और मजबूत बनाया जा सकेगा।

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