सुरों की दुनिया को बड़ा झटका: दिग्गज गायिका सुमन कल्याणपुर का 89 वर्ष की उम्र में निधन, संगीत जगत में शोक

नई दिल्ली: भारतीय संगीत जगत की महान और प्रतिष्ठित पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का रविवार शाम निधन हो गया। 89 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही देशभर में शोक की लहर दौड़ गई। फिल्म, संगीत और राजनीतिक जगत की कई हस्तियों ने उनके निधन पर दुख व्यक्त किया और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
सुमन कल्याणपुर हिंदी सिनेमा की उन चुनिंदा आवाजों में शामिल थीं, जिन्होंने अपनी मधुर गायकी से कई पीढ़ियों के दिलों में खास जगह बनाई। उन्होंने ‘ना ना करते प्यार तुम्हीं से’, ‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे’ और ‘तुमने पुकारा और हम चले आए’ जैसे अनेक लोकप्रिय गीतों को अपनी आवाज दी थी।
परिवार के करीबी सूत्रों के अनुसार, बढ़ती उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के चलते रविवार शाम उनके घर पर उनका निधन हुआ। उनके जाने से भारतीय संगीत जगत ने अपनी एक अमूल्य धरोहर खो दी है।
अविभाजित भारत में हुआ था जन्म
सुमन कल्याणपुर का जन्म 28 जनवरी 1937 को अविभाजित भारत के भवानीपुर में हुआ था, जो वर्तमान में बांग्लादेश में स्थित है। बचपन से ही संगीत के प्रति उनका झुकाव था और आगे चलकर उन्होंने भारतीय फिल्म संगीत में अपनी अलग पहचान स्थापित की।
अपने लंबे और शानदार करियर के दौरान उन्होंने 800 से अधिक फिल्मी गीतों को स्वर दिया और अपनी गायकी के जरिए लाखों संगीत प्रेमियों का दिल जीता।
कई भारतीय भाषाओं में बिखेरा सुरों का जादू
सुमन कल्याणपुर केवल हिंदी फिल्मों तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने मराठी, असमिया, गुजराती, कन्नड़, मैथिली, भोजपुरी, राजस्थानी, बंगाली, ओड़िया और पंजाबी समेत कई भारतीय भाषाओं में गीत गाकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया।
उनकी आवाज की मिठास और भावनाओं को अभिव्यक्त करने की अद्भुत क्षमता ने उन्हें देश की सबसे सम्मानित पार्श्व गायिकाओं में शामिल किया।
‘पद्म भूषण’ से सम्मानित हुई थीं सुमन कल्याणपुर
भारतीय संगीत में उनके असाधारण योगदान को देखते हुए उन्हें देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ से भी सम्मानित किया गया था। यह सम्मान उनकी दशकों लंबी संगीत साधना और कला के प्रति समर्पण का प्रमाण माना जाता है।
आज भी लोगों की जुबान पर हैं उनके अमर गीत
सुमन कल्याणपुर के कई गीत आज भी संगीत प्रेमियों की पसंद बने हुए हैं। उनके चर्चित गीतों में ‘बुझा दिए हैं खुद अपने हाथों’ (शगुन), ‘जो हम पे गुजरती है’ (मोहब्बत इसको कहते हैं), ‘दिल एक मंदिर है’ का शीर्षक गीत, ‘ना ना करते प्यार तुम्हीं से’ (जब जब फूल खिले) और ‘मेरे महबूब ना जा’ (नूर महल) शामिल हैं।
उनकी गायकी की विशेषता यह थी कि वह हर गीत में भावनाओं को बेहद सहजता और गहराई के साथ प्रस्तुत करती थीं, जिसके कारण उनके गीत समय के साथ और भी लोकप्रिय होते गए।
‘बहना ने भाई की कलाई’ ने दिलाई विशेष पहचान
वर्ष 1974 में फिल्म ‘रेशम की डोरी’ के लिए गाया गया उनका गीत ‘बहना ने भाई की कलाई पर प्यार बांधा है’ आज भी रक्षाबंधन के अवसर पर सबसे अधिक सुने जाने वाले गीतों में शामिल है। इस गीत की लोकप्रियता इतनी अधिक रही कि इसके लिए उन्हें वर्ष 1975 में फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था।
संगीत जगत में हमेशा जीवित रहेगी उनकी आवाज
सुमन कल्याणपुर भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी मधुर आवाज और अमर गीत हमेशा संगीत प्रेमियों के दिलों में जीवित रहेंगे। भारतीय फिल्म संगीत में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।



