जमीन खरीदने से पहले सिर्फ दिशा नहीं, इन बातों पर भी दें ध्यान! वास्तु के मुताबिक छोटी सी चूक पड़ सकती है भारी

नई दिल्ली: अपना घर बनाना हर व्यक्ति का सपना होता है और इस सपने की शुरुआत सही जमीन या प्लॉट के चयन से होती है। अधिकांश लोग भूखंड खरीदते समय सबसे पहले उसकी दिशा पर ध्यान देते हैं। खासकर उत्तरमुखी और पूर्वमुखी प्लॉट को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि दक्षिणमुखी प्लॉट को लेकर कई तरह की भ्रांतियां प्रचलित हैं। हालांकि वास्तु शास्त्र के जानकारों का कहना है कि केवल दिशा के आधार पर किसी भी प्लॉट को शुभ या अशुभ नहीं माना जा सकता। वास्तु के अनुसार सभी दिशाएं समान रूप से महत्वपूर्ण हैं, अंतर केवल उनके अनुरूप किए गए निर्माण और योजना का होता है।
सबसे पहले प्लॉट के आकार को परखें
विशेषज्ञों के अनुसार जमीन खरीदते समय सबसे पहले उसके आकार पर ध्यान देना चाहिए। वर्गाकार और आयताकार प्लॉट वास्तु की दृष्टि से सबसे उपयुक्त माने जाते हैं, क्योंकि इनमें ऊर्जा का संतुलित प्रवाह बना रहता है। इसके विपरीत अत्यधिक टेढ़े-मेढ़े, त्रिकोणीय या अनियमित आकार वाले भूखंड कई बार वास्तु दोष का कारण बन सकते हैं और निर्माण की योजना को भी प्रभावित कर सकते हैं।
जमीन की ढलान और ऊंचाई भी है अहम
वास्तु शास्त्र में प्लॉट की ऊंचाई और ढलान को भी महत्वपूर्ण माना गया है। इसके अनुसार दक्षिण और पश्चिम दिशा अपेक्षाकृत ऊंची तथा उत्तर और पूर्व दिशा थोड़ी नीची होना बेहतर माना जाता है। ऐसी संरचना को सकारात्मक ऊर्जा और आर्थिक उन्नति के लिए अनुकूल माना जाता है। वहीं गलत ढलान वाले प्लॉट में जलभराव जैसी व्यावहारिक समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
आसपास का वातावरण भी जरूर जांचें
जमीन की दिशा जितनी महत्वपूर्ण है, उससे कम महत्वपूर्ण उसका आसपास का वातावरण नहीं है। यदि प्लॉट के आसपास स्वच्छता, हरियाली और खुला वातावरण हो तो उसे बेहतर माना जाता है। वहीं कूड़े के ढेर, गंदे नाले या अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्र के पास स्थित जमीन भविष्य में कई तरह की परेशानियों का कारण बन सकती है। इसलिए केवल कम कीमत देखकर जमीन खरीदने का निर्णय नहीं लेना चाहिए।
मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता भी देखें
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि प्लॉट खरीदने से पहले वहां तक सड़क की पहुंच, बिजली, पानी और अन्य आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता की भी जांच करनी चाहिए। विकसित क्षेत्र में स्थित और अच्छी कनेक्टिविटी वाला प्लॉट भविष्य में बेहतर निवेश साबित हो सकता है और रहने के लिहाज से भी अधिक सुविधाजनक रहता है।
प्राकृतिक रोशनी और हवा का रखें ध्यान
वास्तु शास्त्र प्राकृतिक तत्वों के संतुलन पर विशेष जोर देता है। इसलिए ऐसे प्लॉट का चयन बेहतर माना जाता है, जहां पर्याप्त धूप पहुंचती हो और हवा का आवागमन सुचारु रूप से होता हो। अच्छा वेंटिलेशन और प्राकृतिक प्रकाश स्वास्थ्य के साथ-साथ सकारात्मक वातावरण बनाए रखने में भी सहायक माने जाते हैं।
केवल दिशा देखकर न लें फैसला
वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी दिशा को अशुभ मानकर केवल उसी आधार पर प्लॉट को अस्वीकार करना उचित नहीं है। वास्तु शास्त्र दिशा से अधिक संतुलित निर्माण, उचित योजना और प्राकृतिक ऊर्जा के सही उपयोग को महत्व देता है। यदि जमीन का चयन सोच-समझकर किया जाए और निर्माण के दौरान वास्तु सिद्धांतों का पालन किया जाए, तो किसी भी दिशा में सुख, समृद्धि और सफलता प्राप्त की जा सकती है।



