स्तम्भ
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पीएम केयर फंड: अंध विरोध से निरन्तर निखरते मोदी
स्तम्भ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता को मजबूत करने में उनकी पार्टी, उनकी निजी काबिलियत के समानन्तर विरोधियों का योगदान…
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कोरोना पैकेज में कहां खड़े है वास्तविक जरूरतमंद…!
स्तम्भ: आधार एवं डिजीटल प्लेटफार्म पर सभी सरकारी योजना और हितग्राहियों को समेकित करने के काम ने निसन्देह सरकारी सब्सिडी…
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गृह बंदी की लक्ष्मण रेखा के भीतर धधकते सवाल
स्तम्भ: पूरा देश लॉक डाउन पर है।प्रधानमंत्री की भावुक और सख्ती समिश्रित अपील का असर 135 करोड़ लोगों पर स्पष्ट…
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‘विपरीत परिस्थितियों का सामना करना ही पुरुषार्थ है’
हृदयनारायण दीक्षित स्तम्भ : आपातकाल का प्रभाव दोधारी तलवार जैसा होता है। आपदाएं असहाय होने का भाव जगाती हैं। निराश…
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‘उत्तम मनोबल वाले रोगी शीघ्र स्वस्थ होते हैं’
हृदयनारायण दीक्षित स्तम्भ : स्वास्थ्य सुख है और रोगी होना दुख। यह मान्यता भारतीय आयुर्विज्ञान की है। संक्रामक रोगों के…
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स्वस्थ होना सुख है और रूग्ण होना दुख
हृदयनारायण दीक्षित स्तम्भ : सुख सबकी कामना है। सामान्यतया अपने वातावरण व समाज की अनुकूलता सुख व प्रतिकूलता दुख कही…
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कोरोना वायरस से विश्व मानवता भयग्रस्त, राष्ट्र व राज्य डरे हुए हैं, स्वस्थ आचरण जरूरी
हृदयनारायण दीक्षित स्तम्भ : आयुर्वेद आयु का विज्ञान है और चिकित्सा विज्ञान रोगी को स्वस्थ करने का विज्ञान है। आयु…
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अन्न से होता है मानव शरीर का निर्माण, प्राचीन है दूध—भात और मालपूये का वर्णन
हृदयनारायण दीक्षित स्तम्भ : भोजन सभी जीवों की प्राथमिक आवश्यकता है। भारतीय ज्ञान परंपरा में शरीर की प्राथमिक या ऊपरी…
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मनुष्य के व्यक्तित्व की अंतःशक्ति है ‘मन’
हृदयनारायण दीक्षित स्तम्भ : मन अप्रत्यक्ष है। दिखाई नहीं पड़ता। यह मनुष्य के व्यक्तित्व की अंतः शक्ति है। मन के…
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अथर्ववेद में राज्य के जन्म और विकास का सुन्दर वर्णन
हृदयनारायण दीक्षित स्तम्भ : आदिमकाल में राजा या राज्य व्यवस्था नहीं थी। राज्य संस्था का क्रमिक विकास हुआ है। अथर्ववेद…
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युवाओं के आदर्श ‘राम’
बृजनन्दन राजू स्तम्भ : युवाओं के लिए मर्यादा पुरूषोत्तम अयोध्या के राजा राम से बढ़कर कोई आदर्श नहीं हो सकता।…
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अंतिम साँसों तक अंग्रेजों से लड़ने वाली वीरांगना अवंतीबाई
स्तम्भ : नारी ही नारायणी है। सृष्टि की आद्य शक्ति है,पालकर्ता व संहारकर्ता के रूप में भी जानी जाती है।…
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योगी के तीन साल, बेमिसाल
बृजनन्दन राजू सपा, बसपा के 15 साल पर भारी योगी के तीन साल उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अपने कार्यकाल…
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अपराजेय योद्धा छत्रपति शिवाजी
बृजनन्दन राजू स्तम्भ : विदेशी आक्रान्ताओं ने जब से भारत की धरती पर पैर रखा तब से हिन्दुओं का प्रतिकार…
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निर्बाध यौनकर्म कितना मान्य ?
के. विक्रम राव लखनऊ: अटलांटिक सागर के पूर्व तथा पश्चिम में यौन संबंधों का पैमाना जमीन आसमान के फर्क वाला…
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मातृभाषा में होनी चाहिए शिक्षा
बृजनन्दन राजू आखिर कब मिलेगी भाषाई दासतां से मुक्ति स्तम्भ : देश को अंग्रेजों से आजादी मिलने के बाद शिक्षा…
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काम कामनाओं का बीज है
हृदयनारायण दीक्षित स्तम्भ : काम प्रकृति में सर्वव्यापी है। प्राकृतिक है। प्रकृति की सृजनशक्ति है। प्रत्येक शक्ति का नियमन भी…
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नेशन और राष्ट्र पर्यायवाची नहीं हैं
हृदयनारायण दीक्षित स्तम्भ : राष्ट्र प्राचीन वैदिक धारणा है और नेशन आधुनिक काल का विचार है। राष्ट्र के लिए अंग्रेजी…
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वृक्ष, वनस्पति औषधि के रूप में हमारी सेवा करते हैं
हृदयनारायण दीक्षित स्तम्भ : भूमि और सभी प्राणी परस्पर अन्तर्सम्बन्धित हैं। यह नेह मां और पुत्र जैसा है। वैदिक साहित्य…
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कविता और विज्ञान एक साथ नहीं मिलते
हृदयनारायण दीक्षित स्तम्भ : काव्य में भाव अभिव्यक्ति की प्रमुखता होती है और विज्ञान में प्रत्यक्ष सिद्धि की। विज्ञान में…
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जंगलों में इंसान का बढ़ता दखल खतरनाक
स्तम्भ : मनुष्य और वन्यजीव के बीच सदियों से संघर्ष रहा है। इस संघर्ष को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कैसे देखें?…
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आर्थिक समृद्धि व सुधारों वाला बजट 2020 : बृजनन्दन राजू
स्तम्भ : बजट में सरकार ने लोकलुभावन घोषणा के बजाय देश की वर्तमान स्थिति का सिंहावलोकन करते हुए अपनी क्षमताओं…
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राष्ट्र की अस्मिता का बोध कराने वाला होना चाहिए संविधान
बृजनन्दन राजू स्तम्भ : आजादी के बाद दुर्भाग्य से देश के तत्कालीन नेताओं के मन में भारत को भारत जैसा…
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‘आरएसएस’ को बदनाम करने का षडयंत्र
बृजनन्दन राजू स्तम्भ : जिस संगठन की स्थापना देश को आजादी दिलाने के लिए हुई थी। आजादी मिलने के बाद…
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सामाजिक समरसता का महापर्व मकर संक्रान्ति
बृजनन्दन राजू स्तम्भ : मकर संक्रांति लोक रूचि और जन आस्था के साथ—साथ मकर संक्रान्ति समाजिक समरसता का महापर्व है।…
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बाल सवाल… आफ्टरकेयर के मोर्चे पर कहाँ खड़ा है भारत?
डॉ अजय खेमरिया स्तम्भ : “जुबेनाइल जस्टिस एक्ट 2015” भारत मे करीब 20 साल पुराना है। मौजूदा एक्ट सन 2000…
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भारत की प्रकृति, संस्कृति से मेल नहीं खाता अंग्रेजी नववर्ष
भारत में अंग्रेजी नववर्ष का पागलपन क्यों ? बृजनन्दन राजू स्तम्भ : अंग्रेजों ने न केवल भारत के आर्थिक, शैक्षिक…
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नए भारत के विरुद्ध खड़े वाममार्गी बुद्धिजीवी
भारत में अल्पसंख्यकवाद को क्यों जिंदा रखना चाहते हैं वामपंथ डॉ. अजय खेमरिया स्तम्भ : रामचन्द्र गुहा और अन्य लेखकों…
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