स्तम्भ
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अपराजेय योद्धा छत्रपति शिवाजी
बृजनन्दन राजू स्तम्भ : विदेशी आक्रान्ताओं ने जब से भारत की धरती पर पैर रखा तब से हिन्दुओं का प्रतिकार…
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निर्बाध यौनकर्म कितना मान्य ?
के. विक्रम राव लखनऊ: अटलांटिक सागर के पूर्व तथा पश्चिम में यौन संबंधों का पैमाना जमीन आसमान के फर्क वाला…
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मातृभाषा में होनी चाहिए शिक्षा
बृजनन्दन राजू आखिर कब मिलेगी भाषाई दासतां से मुक्ति स्तम्भ : देश को अंग्रेजों से आजादी मिलने के बाद शिक्षा…
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काम कामनाओं का बीज है
हृदयनारायण दीक्षित स्तम्भ : काम प्रकृति में सर्वव्यापी है। प्राकृतिक है। प्रकृति की सृजनशक्ति है। प्रत्येक शक्ति का नियमन भी…
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नेशन और राष्ट्र पर्यायवाची नहीं हैं
हृदयनारायण दीक्षित स्तम्भ : राष्ट्र प्राचीन वैदिक धारणा है और नेशन आधुनिक काल का विचार है। राष्ट्र के लिए अंग्रेजी…
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वृक्ष, वनस्पति औषधि के रूप में हमारी सेवा करते हैं
हृदयनारायण दीक्षित स्तम्भ : भूमि और सभी प्राणी परस्पर अन्तर्सम्बन्धित हैं। यह नेह मां और पुत्र जैसा है। वैदिक साहित्य…
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कविता और विज्ञान एक साथ नहीं मिलते
हृदयनारायण दीक्षित स्तम्भ : काव्य में भाव अभिव्यक्ति की प्रमुखता होती है और विज्ञान में प्रत्यक्ष सिद्धि की। विज्ञान में…
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जंगलों में इंसान का बढ़ता दखल खतरनाक
स्तम्भ : मनुष्य और वन्यजीव के बीच सदियों से संघर्ष रहा है। इस संघर्ष को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कैसे देखें?…
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आर्थिक समृद्धि व सुधारों वाला बजट 2020 : बृजनन्दन राजू
स्तम्भ : बजट में सरकार ने लोकलुभावन घोषणा के बजाय देश की वर्तमान स्थिति का सिंहावलोकन करते हुए अपनी क्षमताओं…
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राष्ट्र की अस्मिता का बोध कराने वाला होना चाहिए संविधान
बृजनन्दन राजू स्तम्भ : आजादी के बाद दुर्भाग्य से देश के तत्कालीन नेताओं के मन में भारत को भारत जैसा…
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‘आरएसएस’ को बदनाम करने का षडयंत्र
बृजनन्दन राजू स्तम्भ : जिस संगठन की स्थापना देश को आजादी दिलाने के लिए हुई थी। आजादी मिलने के बाद…
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सामाजिक समरसता का महापर्व मकर संक्रान्ति
बृजनन्दन राजू स्तम्भ : मकर संक्रांति लोक रूचि और जन आस्था के साथ—साथ मकर संक्रान्ति समाजिक समरसता का महापर्व है।…
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बाल सवाल… आफ्टरकेयर के मोर्चे पर कहाँ खड़ा है भारत?
डॉ अजय खेमरिया स्तम्भ : “जुबेनाइल जस्टिस एक्ट 2015” भारत मे करीब 20 साल पुराना है। मौजूदा एक्ट सन 2000…
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भारत की प्रकृति, संस्कृति से मेल नहीं खाता अंग्रेजी नववर्ष
भारत में अंग्रेजी नववर्ष का पागलपन क्यों ? बृजनन्दन राजू स्तम्भ : अंग्रेजों ने न केवल भारत के आर्थिक, शैक्षिक…
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नए भारत के विरुद्ध खड़े वाममार्गी बुद्धिजीवी
भारत में अल्पसंख्यकवाद को क्यों जिंदा रखना चाहते हैं वामपंथ डॉ. अजय खेमरिया स्तम्भ : रामचन्द्र गुहा और अन्य लेखकों…
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नागरिकता संशोधन कानून का बेजा विरोध
कैब का विरोध, संसद संविधान और सरकार का अपमान बृजनन्दन राजू स्तम्भ : नागरिकता संशोधन कानून के मुद्दे पर देश…
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ज्ञानी समान होकर भी एक जैसे नहीं होते
हृदयनारायण दीक्षित स्तम्भ : संसार की समझ जरूरी है और अपना ज्ञान भी। ज्ञान के अभाव में सब कुछ असंभव।…
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गीता की अन्तर्राष्ट्रीय लोकप्रियता
हृदयनारायण दीक्षित स्तम्भ : गीता लोकप्रिय ग्रन्थ है। वेदों की लोकप्रियता भी आसमान पर पहुंची। लेकिन गीता ने वेदों की…
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कांग्रेस की काली संस्कृति और राहुल गांधी का अमर्यादित बयान
मातृशक्ति का अपमान : राजनीतिक अपरिपक्वता का परिचय दे रहे पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बृजनन्दन राजू स्तम्भ : महिलाओं…
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विचार के आधार पर बनाए जाने चाहिए राजनीतिक दल
हृदयनारायण दीक्षित विचार : लोकतंत्र सांस्कृतिक अभिव्यक्ति है। सबकी भागीदारी लोकतंत्र का उद्देश्य है। विचार प्रकट करने की स्वतंत्रता भारतीय…
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हिंदी-साहित्य ही नही जगत-साहित्य में निराली है रामचरितमानस
रामकुमार सिंह महामहिम राज्यपाल उत्तर प्रदेश आनंदी बेन पटेल के जन्मदिन पर विशेेष स्तम्भ: एक सुखद सुंदर मनोहारी तस्वीर,उत्तर प्रदेश…
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अयोध्या निर्णय : सेक्यूलर चश्मे से भी समझने की आवश्यकता
रामलला भी जीते हैं और इमाम-ए-हिन्द, इस निर्णय ने नकली सेक्युलरिज्म को बेनकाब कर दिया है डॉ. अजय खेमरिया स्तम्भ…
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पटेल पर भ्रांतियाँ
के. विक्रम राव स्तम्भ : यदि वल्लभ भाई पटेल गृहमंत्री के बजाय कोई अन्य विभाग सँभालते तो मानसरोवर और कश्मीर…
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देश में चिकित्सा शिक्षा में सुधार की प्रबल आवश्यकता
डॉ. अजय खेमरिया हकीकत यह है कि आज सभी कॉलेजों में पढ़ाने के लिये फैकल्टी है ही नहीं चिकित्सा शिक्षा…
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राम मंदिर निर्माण की निर्णायक घड़ी सन्निकट
सुप्रीम श्रद्धा के प्रश्न का उत्तर अब बहुत पास स्पष्ट सुनाई दे रही भव्य राम मन्दिर निर्माण के घड़ी की…
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ : राष्ट्र सेवा के 94 वर्ष
संघ को जानें तो सही बृजनन्दन राजू हिन्दू संगठन और राष्ट्र को परमवैभव पर ले जाने के जिस उद्देश्य को…
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‘ऐसा मस्तिष्क बनाओ, जैसा था बापू का’
‘एक ही छत के नीचे हो अब सब धर्मों की प्रार्थना’ ‘अहिंसा’ के विचार से ही ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की अवधारणा…
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क्या अफसरशाही के आगे दम तोड़ गया गांधी का पंचायत राज मॉडल!
डॉ. अजय खेमरिया गांधी जी की 150 जयंती पर उनकी वैचारिकी के विविध पक्षों पर दुनिया भर में चर्चा हो…
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