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CJI सूर्यकांत की दो टूक: ‘सुप्रीम कोर्ट पर कोई दबाव नहीं बना सकता’, राजनीतिक प्रदर्शन से जुड़े मामले में नोटिस जारी

नई दिल्ली: मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट परिसर और उसके आसपास राजनीतिक प्रदर्शनों को लेकर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई भी अदालत पर दबाव नहीं बना सकता। 12 अक्टूबर को इंडिया ब्लॉक के नेताओं के विरोध मार्च के बाद दायर याचिकाओं पर गुरुवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। साथ ही, अदालत ने इस घटनाक्रम से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया।

सीजेआई सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया की दलीलें सुनने के बाद यह कदम उठाया। याचिकाओं में अदालत परिसरों के भीतर राजनीतिक प्रदर्शनों पर रोक लगाने और सुप्रीम कोर्ट तथा हाई कोर्ट के आसपास होने वाले राजनीतिक जुलूसों को नियंत्रित करने के लिए एक समान व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।

‘कोई हमें दबाव में नहीं ला सकता’

सुनवाई के दौरान गौरव भाटिया ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट के सामने भी राजनीतिक जुलूस जैसी स्थिति पैदा होना स्वीकार्य नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि कोई भी अदालत को दबाव में नहीं ला सकता।

पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि न्यायपालिका बाहर दिए जाने वाले राजनीतिक बयानों और अदालत के भीतर रखे जाने वाले पक्षों से अनजान नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह के प्रयास न्यायिक कामकाज को प्रभावित नहीं कर सकते।

सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने का निर्देश

चार अधिवक्ताओं की ओर से दायर याचिकाओं में 12 अक्टूबर की घटना से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग की गई है। इनमें सीसीटीवी फुटेज, आगंतुकों के रिकॉर्ड, प्रवेश और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े दस्तावेज तथा अन्य डिजिटल साक्ष्य शामिल हैं।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि राजनीतिक लामबंदी के जरिए न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने या लंबित मामलों में अदालतों पर दबाव बनाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने संबंधित राजनीतिक नेताओं के आचरण की जांच और उचित आधार मिलने पर आपराधिक अवमानना की कार्यवाही पर विचार करने का भी अनुरोध किया है।

12 अक्टूबर को इंडिया ब्लॉक ने निकाला था मार्च

यह विवाद 12 अक्टूबर को इंडिया ब्लॉक के नेताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट की तरफ निकाले गए विरोध मार्च के बाद सामने आया। इस मार्च में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेता शामिल हुए थे। विपक्षी नेताओं का उद्देश्य मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखना था।

इससे पहले राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सीजेआई से मुलाकात कर इस मुद्दे पर ज्ञापन सौंपने की इच्छा जताई थी। हालांकि, सीजेआई ने मुलाकात का अनुरोध स्वीकार नहीं किया था।

SIR पर सीजेआई ने बताई थी न्यायिक प्रक्रिया की सीमा

विपक्षी नेताओं को दिए गए जवाब में सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था कि उनके पत्र में उठाए गए मुद्दे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित हैं। ऐसे मामलों पर चर्चा के लिए अलग बैठक बुलाना शक्तियों के पृथक्करण के संवैधानिक सिद्धांत के अनुरूप नहीं होगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि नागरिकों के अधिकारों को प्रभावित करने वाले मामलों की न्यायिक समीक्षा करना अदालत का दायित्व है, लेकिन विपक्षी नेताओं के पत्र के आधार पर कार्रवाई करना सुप्रीम कोर्ट के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। सीजेआई ने विपक्षी नेताओं को स्थापित कानूनी प्रक्रिया के तहत याचिका दायर करने की सलाह दी थी और कानून के मुताबिक सुनवाई का आश्वासन दिया था।

इसके बाद राहुल गांधी ने कहा था कि इंडिया ब्लॉक औपचारिक याचिका के जरिए अदालत का रुख करेगा।

SIR को चुनौती देने वाली याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक के 12 अन्य नेताओं की ओर से दायर उस याचिका पर भी चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया, जिसमें SIR प्रक्रिया को चुनौती दी गई है।

सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश दिया कि इस याचिका को विभिन्न राज्यों में SIR की वैधता को चुनौती देने वाली पहले से लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया जाए। अदालत ने कहा कि मामले की सुनवाई पहले से विचाराधीन याचिकाओं के साथ की जाएगी।

एक याचिकाकर्ता के आचरण पर अगली सुनवाई में सवाल

सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी कहा कि अगली तारीख पर याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। हालांकि, अदालत ने फिलहाल संबंधित व्यक्ति की पहचान उजागर नहीं की।

पीठ ने स्पष्ट किया कि इस याचिकाकर्ता के संबंध में नोटिस पर अंतिम रूप से विचार करने से पहले उसके आचरण को लेकर स्पष्टीकरण लिया जाएगा। इस तरह राजनीतिक प्रदर्शन, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और SIR से जुड़ी याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के केंद्र में हैं।

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