बिहार के युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी! तीन कॉलेजों में शुरू होंगे 7 नए रोजगारपरक कोर्स, पढ़ाई के साथ मिलेगी नौकरी की तैयारी

समस्तीपुर : बिहार के युवाओं को रोजगार से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। समस्तीपुर जिले के तीन प्रमुख कॉलेजों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से सात नए रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय प्रशासन ने पीएम-उषा योजना के तहत इन पाठ्यक्रमों को मंजूरी दे दी है। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ उद्योगों और कॉरपोरेट क्षेत्र की व्यावहारिक समझ प्रदान करना है, ताकि डिग्री पूरी करते ही वे रोजगार के लिए तैयार हो सकें।
पढ़ाई के साथ मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण
नए पाठ्यक्रम ‘अप्रेंटिसशिप एंबेडेड डिग्री प्रोग्राम’ के तहत संचालित किए जाएंगे। इसके अंतर्गत छात्रों को नियमित स्नातक डिग्री के साथ कंपनियों और उद्योगों में काम करने का व्यावहारिक अनुभव भी मिलेगा। इससे युवाओं को पढ़ाई के दौरान ही कार्यक्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों को समझने का अवसर मिलेगा।
कॉलेज प्रशासन का मानना है कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप शुरू किए जा रहे ये पाठ्यक्रम छात्रों के कौशल विकास को मजबूत करेंगे और स्वरोजगार तथा रोजगार दोनों के नए अवसर खोलेंगे।
डिजिटल और कॉरपोरेट क्षेत्र से जुड़े होंगे कोर्स
बदलती तकनीक और सेवा क्षेत्र की बढ़ती मांग को देखते हुए आधुनिक विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। इनमें ई-कॉमर्स और रिटेल ऑपरेशंस, बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विस एंड इंश्योरेंस, ह्यूमन रिसोर्स ऑपरेशंस, डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स, हेल्थ केयर मैनेजमेंट तथा कंटेंट एंड क्रिएटिव राइटिंग जैसे पाठ्यक्रम शामिल हैं।
इन कोर्सों का उद्देश्य छात्रों को सीधे उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है, जिससे रोजगार की संभावनाएं बढ़ सकें।
तीन कॉलेजों में होगा पाठ्यक्रमों का संचालन
विश्वविद्यालय की योजना के अनुसार बीआरबी कॉलेज और यूपी कॉलेज में ई-कॉमर्स, बैंकिंग, मानव संसाधन और वित्तीय सेवाओं से जुड़े पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे।
वहीं बीआरबी कॉलेज और आरबी कॉलेज में डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स की पढ़ाई कराई जाएगी। इसके अलावा यूपी कॉलेज में हेल्थ केयर मैनेजमेंट और कंटेंट एंड क्रिएटिव राइटिंग जैसे नए दौर के पाठ्यक्रम शुरू होंगे।
मैथिली और मनोविज्ञान पाठ्यक्रम भी होंगे अपडेट
रोजगार की संभावनाओं को बढ़ाने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय ने मैथिली और मनोविज्ञान विषयों के पाठ्यक्रम में भी बदलाव को मंजूरी दी है। चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के तहत संशोधित पाठ्यक्रम को तीसरे से आठवें सेमेस्टर तक लागू किया जाएगा।
विश्वविद्यालय का मानना है कि इससे पारंपरिक विषयों के छात्रों को भी रोजगार और कौशल विकास के बेहतर अवसर मिल सकेंगे।



