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लंबी उम्र और बेहतर सेहत के लिए डाइट में शामिल करें ये 10 फूड्स, ब्लू जोन से सीखें खानपान का तरीका

नई दिल्ली: हर व्यक्ति लंबी उम्र के साथ स्वस्थ जीवन जीना चाहता है। वैज्ञानिक शोधों में लंबी और स्वस्थ जिंदगी के पीछे सामाजिक संबंधों, नींद, खुशी, पर्यावरण और जीवन के उद्देश्य जैसे कई पहलुओं को महत्वपूर्ण माना गया है। हालांकि, खानपान भी जीवनशैली का एक अहम हिस्सा है। इसी विषय पर अमेरिका के नेशनल ज्योग्राफिक फेलो, पुरस्कार विजेता पत्रकार और डॉक्यूमेंट्री निर्माता डैन ब्यूटनर ने लंबे समय तक शोध किया है।

डैन ब्यूटनर को दुनिया के उन पांच क्षेत्रों की पहचान के लिए जाना जाता है, जिन्हें ‘ब्लू जोन’ कहा जाता है। इन इलाकों में लोग अपेक्षाकृत लंबा और स्वस्थ जीवन जीते हैं। ब्लू जोन में इकारिया (ग्रीस), सार्डिनिया (इटली), ओकिनावा (जापान), लोमा लिंडा (कैलिफोर्निया) और निकोया (कोस्टा रिका) शामिल हैं। ब्यूटनर ने 2008 में अपनी किताब ‘The Blue Zones: 9 Lessons for Living Longer from the People who’ve Lived the Longest’ में अपने निष्कर्ष प्रकाशित किए थे।

ब्यूटनर के मुताबिक, आधुनिक दुनिया में अत्यधिक प्रसंस्कृत भोजन का ज्यादा सेवन जीवन प्रत्याशा को प्रभावित करने वाले कारकों में शामिल हो सकता है। उनका कहना है कि ब्लू जोन में रहने वाले लोगों के खानपान से प्रेरणा लेकर अपनी डाइट में भी कुछ बदलाव किए जा सकते हैं।

1. पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों को दें प्राथमिकता

ब्लू जोन के पारंपरिक खानपान में पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी काफी अधिक बताई जाती है। डाइट में बीन्स, हरी पत्तेदार सब्जियां, खासकर पालक, शकरकंद, नट्स, बीज और साबुत अनाज को शामिल किया जा सकता है। ऐसे खाद्य पदार्थ फाइबर समेत कई पोषक तत्व उपलब्ध कराते हैं।

2. मांस का सेवन सीमित रखें

ब्लू जोन के चार क्षेत्रों में लोग मांस खाते हैं, लेकिन आमतौर पर इसकी मात्रा सीमित रहती है। इसे रोजाना के मुख्य भोजन के बजाय कभी-कभार साइड डिश के रूप में लिया जाता है। मांस खाने वाले लोग इसके सेवन को सप्ताह में दो बार से ज्यादा न रखने और प्रोसेस्ड मीट के बजाय ताजे मांस को प्राथमिकता देने की सलाह से प्रेरणा ले सकते हैं।

3. मछली को डाइट का हिस्सा बनाएं

ब्लू जोन के कई पारंपरिक आहार में कम मात्रा में मछली शामिल होती है। मछली से प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व मिलते हैं। अगर इसे आहार में शामिल करते हैं तो कम पारा वाली मछलियों का चुनाव करना बेहतर माना जाता है।

4. गाय के दूध के उत्पाद ही जरूरी नहीं

ब्लू जोन के पारंपरिक खानपान में गाय के दूध से बने उत्पादों की भूमिका सीमित बताई जाती है। कुछ क्षेत्रों में बकरी या भेड़ के दूध से बने दही और पनीर का सेवन किया जाता है। कैल्शियम के लिए टोफू जैसे अन्य खाद्य विकल्प भी आहार में शामिल किए जा सकते हैं।

5. अंडे की मात्रा भी सीमित रखें

ब्लू जोन के निवासियों के खानपान में अंडे आमतौर पर सीमित मात्रा में शामिल होते हैं। स्रोत के अनुसार, वहां लोग सप्ताह में करीब तीन अंडे खाते हैं। इन्हें मांस, साबुत अनाज, सूप या बीन्स के साथ भोजन का हिस्सा बनाया जाता है।

6. बीन्स और फलियां जरूर खाएं

बीन्स और फलियां ब्लू जोन के खानपान का प्रमुख हिस्सा हैं। रोजाना करीब आधा कप बीन्स या फलियां खाने का सुझाव दिया गया है। काली बीन्स, दाल, छोले और सोयाबीन जैसे विकल्प भोजन में शामिल किए जा सकते हैं। इन खाद्य पदार्थों से प्रोटीन और फाइबर मिलता है।

7. अतिरिक्त चीनी का सेवन घटाएं

ब्लू जोन के पारंपरिक खानपान में मिठाइयों का सेवन आमतौर पर विशेष मौकों तक सीमित रहता है। डाइट में अतिरिक्त चीनी की मात्रा कम रखना बेहतर माना जाता है। स्रोत में ऐसे उत्पादों से बचने की सलाह दी गई है, जिनकी शुरुआती सामग्री में चीनी शामिल हो। साथ ही रोजाना चीनी से मिलने वाली कैलोरी को सीमित रखने पर जोर दिया गया है।

8. रोजाना नट्स खाएं

बादाम, पिस्ता और अखरोट जैसे नट्स को भी डाइट में शामिल किया जा सकता है। ब्लू जोन के लोगों के खानपान में नट्स नियमित रूप से शामिल बताए जाते हैं। स्रोत में हार्वर्ड के एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा गया है कि अखरोट खाने वालों में मृत्यु दर अखरोट नहीं खाने वालों की तुलना में 20 प्रतिशत कम पाई गई थी।

9. साबुत अनाज या खट्टी ब्रेड चुनें

पारंपरिक ब्लू जोन में ब्रेड को गेहूं, राई और जौ जैसे साबुत अनाज से तैयार किया जाता है। कुछ क्षेत्रों में खट्टी ब्रेड यानी सॉरडो भी खाई जाती है। इसे साबुत अनाज में मौजूद प्राकृतिक सूक्ष्मजीवों की मदद से तैयार किया जाता है। ऐसी ब्रेड में सामान्य ब्रेड की तुलना में ग्लूटेन की मात्रा कम हो सकती है और इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

10. साबुत अनाज को डाइट में करें शामिल

ब्लू जोन के पारंपरिक खानपान में साबुत अनाज को महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है। यहां भोजन को कच्चा, हल्का पकाकर या पीसकर खाने की परंपरा बताई जाती है। इसके अलावा भोजन में कई तरह की स्थानीय सामग्री शामिल की जाती है और लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है।

हालांकि, किसी एक खाद्य पदार्थ या डाइट से लंबी उम्र की गारंटी नहीं मिलती। स्वस्थ जीवन के लिए संतुलित आहार के साथ पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि और बेहतर जीवनशैली भी महत्वपूर्ण हैं।

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