राजनीतिराष्ट्रीय

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल, TMC में अंदरूनी खींचतान पर उठे सवाल; क्या दोहराया जा सकता है ‘महाराष्ट्र मॉडल’?

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर बढ़ती अंदरूनी असहमति को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी के दो विधायकों को निष्कासित किए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा है कि क्या राज्य में भी किसी बड़े राजनीतिक विभाजन की जमीन तैयार हो रही है। हालांकि, इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

हाल ही में टीएमसी ने अपने दो विधायकों ऋतब्रत बंदोपाध्याय और संदीपान साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में बाहर का रास्ता दिखाया। दोनों नेताओं पर हस्ताक्षर विवाद को लेकर पार्टी लाइन के खिलाफ आवाज उठाने का आरोप था। इस कार्रवाई के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चाओं ने और जोर पकड़ लिया है।

बागी तेवरों की अटकलों ने बढ़ाई राजनीतिक सरगर्मी

राजनीतिक सूत्रों के हवाले से ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि कुछ विधायक और सांसद पार्टी नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं। चर्चा यह भी है कि कई जनप्रतिनिधि वैकल्पिक राजनीतिक रणनीति पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

राज्य की राजनीति में उस समय और हलचल बढ़ गई जब पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के आवास पर आयोजित एक बैठक में बड़ी संख्या में विधायक शामिल नहीं हुए। इसके बाद विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषकों ने टीएमसी की आंतरिक स्थिति को लेकर कई सवाल उठाने शुरू कर दिए।

ममता बनर्जी ने बीजेपी पर लगाया दबाव बनाने का आरोप

टीएमसी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी के भीतर पैदा हुए विवादों के लिए भारतीय जनता पार्टी और पार्टी के अंदर मौजूद एक गुट को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी विभिन्न माध्यमों से टीएमसी के विधायकों और सांसदों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।

ममता बनर्जी ने दावा किया कि कुछ विधायकों ने उनसे शिकायत की थी कि उन्हें बैठक में शामिल न होने के लिए डराया-धमकाया जा रहा था। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए केंद्र सरकार और बीजेपी पर निशाना साधा।

बैठक से अनुपस्थिति बनी चर्चा का विषय

कालीघाट में आयोजित पार्टी बैठक में कई विधायकों की गैरमौजूदगी भी राजनीतिक चर्चा का केंद्र बनी रही। कुछ नेताओं ने अपनी अनुपस्थिति के पीछे व्यक्तिगत और स्वास्थ्य संबंधी कारण बताए, जबकि विपक्षी दलों ने इसे टीएमसी के भीतर बढ़ती असंतुष्टि का संकेत बताया।

क्या बंगाल में दोहराया जा सकता है महाराष्ट्र जैसा घटनाक्रम?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल टीएमसी में किसी बड़े विभाजन की आधिकारिक स्थिति सामने नहीं आई है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को सार्वजनिक चर्चा का विषय बना दिया है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व की रणनीति और असंतुष्ट नेताओं के रुख पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

Related Articles

Back to top button