हर साल 23 अक्टूबर को मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय हिम तेंदुआ दिवस

देहरादून ( दस्तक डेस्क) : अंतर्राष्ट्रीय हिम तेंदुआ दिवस हर साल 23 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह दिवस एशिया के ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले दुर्लभ हिम तेंदुओं (Panthera uncia) के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास को बचाने के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है।

इस दिवस को मनाने की नींव 23 अक्टूबर 2013 को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में हुई ऐतिहासिक ‘बिश्केक घोषणा’ के बाद रखी गई थी। गौरतलब है कि वर्ष 2013 में 12 स्नो लेपर्ड रेंज देशों (अफगानिस्तान, भूटान, चीन, भारत, कज़ाखस्तान, किर्गिज गणराज्य, मंगोलिया, नेपाल, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान) द्वारा बिश्केक घोषणा पर हस्ताक्षर किये गए थे।साथ ही इस अवसर पर ‘वैश्विक हिम तेंदुआ और पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण’ (Global Snow Leopard and Ecosystem Protection-GSLEP) कार्यक्रम की शुरुआत की गई थी।

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रस्ताव पारित कर इसे आधिकारिक मान्यता दी है। गौरतलब है कि आवास का नुकसान, अवैध शिकार, जलवायु परिवर्तन और चरागाहों में कमी स्नो लेपर्ड की संख्या के लिए मुख्य संकट हैं।
हिम तेंदुओं के बारे में :
हिम तेंदुए को IUCN रेड लिस्ट में सुभेद्य (Vulnerable) की सूची में रखा गया है। इसे ‘वन्यजीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन’ (The Convention of International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora- CITES) के परिशिष्ट-I में शामिल किया गया है।

भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत हिम तेंदुए के शिकार को प्रतिबंधित किया गया है। वन्यजीवों की प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण (Conservation of Migratory Species of Wild Animals- CMS) के तहत हिम तेंदुए को परिशिष्ट-I में शामिल किया गया है। मानव-वन्यजीव संघर्ष, शिकार और जलवायु परिवर्तन के परिणामस्वरूप शिकार और प्रवास की हानि आदि हिम तेंदुए के अस्तित्व के लिये प्रमुख खतरे हैं।

प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड’ (Project Snow Leopard- PSL):
प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड की शुरुआत वर्ष 2009 में देश के पाँच राज्यों (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश) में की गई थी। इसका उद्देश्य सभी हितधारकों की भागीदारी को प्रोत्साहित कर देश में तेंदुओं की आबादी और उनके प्रवास क्षेत्र के संरक्षण को बढ़ावा देना है। भारत में हिम तेंदुओं की भौगोलिक सीमा में पश्चिमी हिमालय का एक बड़ा हिस्सा आता है, जिसके अंतर्गत जम्मू -कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड , सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के भू-भाग शामिल हैं।

इस कार्यक्रम के तहत अधिसूचित क्षेत्रों में स्थानीय आबादी के साथ सार्वजनिक और निजी एजेंसियों के सहयोग से हिम तेंदुओं, उनके आहार तथा प्रवास के संरक्षण, जागरूकता एवं संरक्षण संबंधी कानूनों के व्यापक क्रियान्वयन का प्रयास किया जाता है।



