टॉप न्यूज़राज्यराष्ट्रीय

प्रधानमंत्री मोदी को मिला पहला लता दीनानाथ मंगेशकर अवॉर्ड

आज देश की स्वर कोकिला स्वर्गीय लता मंगेशकर के पिताजी मास्टर दीनानाथ मंगेशकर की 80वीं पुण्यतिथि है। इस अवसर पर भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने आज ( 24 अप्रैल ) को लता दीनानाथ मंगेशकर अवार्ड समारोह में हिस्सा लिया। मास्टर दीनानाथ मंगेशकर के पुण्यतिथि के अवसर पर लता दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार की शुरुआत की गई है और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पहले लता दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार से इस समारोह में सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर भारतीय प्रधानमंत्री ने लता मंगेशकर की पावन स्मृतियों को याद करते हुए कहा कि ” सुधीर फड़के ने लता दीदी से मेरा परिचय कराया था। इसके बाद इस परिवार से मैं जुड़ गया। लता दीदी सुर सम्राट के साथ साथ मेरी बड़ी बहन थी। लता दीदी से मुझे हमेशा अपार प्रेम मिला है। पहली बार होगा जब राखी पर लता दीदी नहीं होगी। मैं इस पुरस्कार को सभी देशवासियों के लिए समर्पित करता हूं।”

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि , ” संगीत के साथ साथ राष्ट्रभक्ति की जो चेतना लता दीदी के भीतर थी, उसका स्रोत उनके पिताजी दीनानाथ मंगेशकर ही थे। आज़ादी की लड़ाई के दौरान शिमला में ब्रिटिश वायसराय के कार्यक्रम में दीनानाथ जी ने वीर सावरकर का लिखा गीत गया था। उसकी थीम पर प्रदर्शन किया था। “

दीनानाथ मंगेशकर जी के बारे में :

29 दिसंबर 1900 को गोवा के मंगेशी नामक स्थान पर दीनानाथ मंगेशकर जी का जन्म हुआ था। दीनानाथ मूल रूप से मराठी थे ओर उनकी पहली शादी साल 1922 में गुजरात के थलनेर गांव (तापी नदी किनारे स्थित) की रहने वाली नर्मदाबेन से हुई थी। नर्मदाबेन के पिता हरिदास उस समय गुजरात के प्रसिद्ध जमींदारों में से एक थे और उन्हें नगरसेठ के नाम से जाना जाता था। खास बात यह है कि उस वक्त में एक मराठी और एक गुजराती परिवार में शादी होना बहुत बड़ी बात थी।

शादी के चार साल बाद बीमारी के चलते नर्मदाबेन की मौत हो गई थी। इनकी कोई संतान नहीं थी। इसके बाद दीनानाथ ने 1927 में नर्मदाबेन की छोटी बहन सेवंतीबेन से शादी कर ली। शादी के बाद सेवंतीबेन का नाम बदलकर सुधामती हो गया। दीनानाथ और सुधामती की पांच संतानों में चार बेटियां.. लता, मीना, आशा, ऊषा और एक बेटा हृदयनाथ हैं। लता जब 13 साल की थीं, तब उनके पिता दीनानाथ का हार्टअटैक से निधन हो गया।

दीनानाथ मंगेशकर एक बेहतरीन गायक और संगीतकार होने के साथ-साथ एक बेहतरीन अभिनेता और फिल्म निर्माता भी थे। 1930 के दशक में उन्होंने कृष्णनार्जुन युद्ध सहित तीन फिल्मों का निर्माण किया। फिल्म को हिंदी और मराठी दोनों भाषाओं में फिल्माया गया था।

ग्यारह साल की उम्र में दीनानाथ मंगेशकर ने संगीत और गायन में मंच प्रदर्शन के लिए खुद को किर्लोस्कर संगीत मंडली और किर्लोस्कर नाटक मंडली से जोड़ लिया था। बाद में उन्होंने अपने साथी चिंतामनराव कोल्हाटकर और कृष्णराव कोल्हापुरे के साथ बलवंत मंडली नाम की अपनी मंडली बनाई और किर्लोस्कर मंडली को छोड़ दिया।

समय बीतने के साथ दीनानाथ मंगेशकर मराठी रंगमंच में अपने अच्छे रूप और मधुर आवाज के साथ एक प्रसिद्ध चेहरा बन गए। तत्कालीन प्रमुख मराठी रंगमंच के दिग्गज, बाल गंधर्व ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि वह दीनानाथ मंगेशकर के संगीत और गायन से इतने प्रभावित हैं कि वह दीनानाथ का अपने संगठन में स्वागत करेंगे।

थिएटर शो जो दीनानाथ मंगेशकर द्वारा किए गए थे, वह कुछ इस प्रकार हैं मनापमन, रणदुंदुभी, पुण्यप्रभा, संन्यास खड्गा, राजसन्यास, देशकंटक, और राम राज्य वियोग आदि।

लता मंगेशकर जी की यात्रा :

लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को इंदौर, मध्य प्रदेश में हुआ था। उनका जन्म का नाम हेमा था, जिसे बाद में उनके पिता ने बदलकर लता कर दिया था। लता नाम दीनानाथ मंगेशकर के प्ले ‘भवनबंधन’ के कैरेक्टर लतिका से इंस्पायर्ड है। वहीं, कुछ तथ्य इस बात की ओर संकेत भी देते हैं कि यह नाम दीनानाथ की पहली पत्नी नर्मदाबेन से प्रेरित है। बताया जाता है कि नर्मदा की मां उन्हें लतिका कहकर बुलाती थीं। जब लता का जन्म हुआ तो उन्हें वे नर्मदा की याद में लतिका कहने लगीं और यही नाम आगे जाकर लता हो गया। लता मंगेशकर ने 30 हज़ार से अधिक गानों को गाकर देश को सुरों की मिठास में डुबो दिया और देश को सुर साधना की राह पर ले गईं।

Related Articles

Back to top button