
जयपुर: राजस्थान के जैसलमेर में रविवार को लगातार दूसरे दिन भी भीषण रेत के तूफान ने जनजीवन को प्रभावित किया। तेज रफ्तार हवाओं के साथ उठी रेत की विशाल दीवार ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे दिन के उजाले में भी अंधेरे जैसे हालात बन गए। तूफान के दौरान आसमान लाल रंग में नजर आया और कई स्थानों पर दृश्यता लगभग शून्य तक पहुंच गई।
पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों में स्थानीय तौर पर ‘काली-पीली आंधी’ के नाम से पहचाने जाने वाले इस धूल भरे तूफान ने सड़क यातायात और सामान्य गतिविधियों पर असर डाला। हालांकि भीषण गर्मी और लू से परेशान लोगों को तापमान में गिरावट के रूप में कुछ राहत भी मिली है।
एक दिन पहले आए तेज तूफान से बिजली ढांचे को नुकसान पहुंचने के बाद प्रशासन पहले से ही सतर्क था। लगातार दूसरे दिन मौसम के बिगड़े मिजाज ने स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की चिंता बढ़ा दी है।
लगातार दूसरे दिन क्यों उठा रेत का तूफान?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कई दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी और लू के कारण थार मरुस्थल का बड़ा हिस्सा अत्यधिक गर्म हो गया था। जमीन के ऊपर मौजूद गर्म हवा तेजी से ऊपर उठी, जिससे कम दबाव का क्षेत्र बन गया।
इस खाली स्थान को भरने के लिए आसपास से तेज हवाएं तेजी से पहुंचीं और अपने साथ बड़ी मात्रा में रेत को आसमान में उड़ा ले गईं। इसी प्रक्रिया के चलते रेत और धूल की विशाल दीवारें बनीं, जिसने पूरे इलाके को धुंधला कर दिया और भीषण धूल भरे तूफान का रूप ले लिया।
पश्चिमी विक्षोभ ने बढ़ाई मौसम की अस्थिरता
मौसम विभाग के अनुसार, सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ भी इस पूरे मौसमीय घटनाक्रम की प्रमुख वजहों में शामिल है। भूमध्यसागरीय क्षेत्र से आने वाला यह मौसम तंत्र वातावरण में नमी और दबाव की स्थिति को प्रभावित करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नमी वाली हवाओं और अत्यधिक गर्म रेगिस्तानी हवाओं के टकराव से वातावरण में अस्थिरता बढ़ी, जिसके परिणामस्वरूप तेज धूल भरी आंधी और रेत के तूफान की स्थिति बनी।
सीमावर्ती इलाकों में सबसे ज्यादा असर
रविवार को मोहनगढ़, सुल्ताना और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों में धूल के घने बादल छाए रहे। कई स्थानों पर तेज हवाओं के कारण बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। खराब दृश्यता की वजह से लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
हालांकि इस मौसमीय बदलाव से लंबे समय से जारी भीषण गर्मी में राहत मिली है और तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने तथा सुरक्षा संबंधी सावधानियां बरतने की अपील की है।
लाल आसमान और धूल की दीवार ने बढ़ाई दहशत
रेत के इस भीषण बवंडर के दौरान आसमान का रंग लाल दिखाई देने लगा, जिससे कई क्षेत्रों में दहशत का माहौल बन गया। तेज हवाओं के साथ उड़ती धूल और रेत ने पूरे इलाके को अपनी गिरफ्त में ले लिया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, दिन के समय भी कई जगहों पर रात जैसा अंधेरा महसूस हुआ।



