
रायपुर: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि चार दशकों तक नक्सलवाद की मार झेलने के कारण बस्तर विकास की मुख्यधारा से दूर रहा, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से बस्तर को देश का सबसे सुंदर और विकसित आदिवासी संभाग बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री राजधानी रायपुर में आयोजित ‘तेरा राज नहीं आएगा रे’ पुस्तक के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. शशांक शर्मा, पांचजन्य के संपादक हितेश शंकर समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
‘अब नए और समृद्ध बस्तर के निर्माण का अवसर’
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सलवाद की वजह से बस्तर विकास की दौड़ में काफी पीछे रह गया था, लेकिन अब एक नए, विकसित और समृद्ध बस्तर के निर्माण का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लगातार ऐसे कदम उठा रही है, जिनसे आम लोगों तक मूलभूत सुविधाएं और जरूरी सेवाएं आसानी से पहुंच सकें।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मिली बड़ी सफलता: साय
मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे हुए हैं और उनके नेतृत्व में देश ने कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ मिली सफलता को भी महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल बताया। साय ने कहा कि नक्सलवाद देश की आंतरिक सुरक्षा के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में इस चुनौती का प्रभावी मुकाबला किया गया।
लेखकों, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों की भूमिका को सराहा
मुख्यमंत्री ने कहा कि मजबूत नेतृत्व समाज में विश्वास और उत्साह पैदा करता है। उन्होंने कहा कि माओवाद के खिलाफ लड़ाई में सुरक्षा बलों के साथ-साथ आम जनता, लेखकों, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। साय ने उल्लेख किया कि हाल ही में बस्तर दौरे पर आए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पत्रकारों से मुलाकात कर उनके योगदान की सराहना की थी।
माओवाद के दौर को दस्तावेजी रूप में सहेजना जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजीव रंजन प्रसाद और सुरचना नायडू ने यह पुस्तक ऐसे समय में लिखी है, जब माओवाद की समाप्ति हो चुकी है। उन्होंने कहा कि समय के साथ घटनाओं की स्मृतियां धुंधली पड़ जाती हैं, इसलिए माओवाद के कठिन दौर और उससे मुक्ति के संघर्ष को दस्तावेजी रूप में संरक्षित करना आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियां उससे सीख ले सकें।
‘हिंसा कभी स्थायी समाधान नहीं हो सकती’
साय ने कहा कि यह पुस्तक भविष्य की पीढ़ियों को बताएगी कि माओवाद से मुक्ति के लिए समाज और सुरक्षा बलों ने कितना कठिन संघर्ष किया और कितने जवानों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि यह कृति यह भी संदेश देती है कि हिंसा किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकती और लोगों का विश्वास केवल संविधान तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के माध्यम से ही जीता जा सकता है।
शोध के जरिए सामने आया माओवाद का सच
मुख्यमंत्री ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि लेखकों ने व्यापक और गंभीर शोध किया है। उन्होंने बस्तर समाज के विभिन्न वर्गों, आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सलवाद को करीब से देखने वाले लोगों से संवाद कर महत्वपूर्ण तथ्यों का संकलन किया है। पुस्तक में यह भी बताया गया है कि किस तरह माओवादी नेतृत्व ने अपने संगठन का विस्तार किया और कई परिवारों पर सदस्य भेजने का दबाव बनाया।
‘जिस उम्र में कलम होनी चाहिए थी, उस उम्र में हथियार थमा दिए गए’
साय ने कहा कि शोध के दौरान जिन पूर्व नक्सलियों से बातचीत की गई, उनमें लगभग 80 प्रतिशत लोग अशिक्षित या केवल पांचवीं कक्षा तक शिक्षित पाए गए। उन्होंने कहा कि जिस उम्र में बच्चों के हाथों में कलम होनी चाहिए थी, उस उम्र में उन्हें हथियार थमा दिए गए। माओवाद ने एक पूरी पीढ़ी को शिक्षा, परिवार और समाज से दूर कर दिया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राजीव रंजन प्रसाद ने इससे पहले भी बस्तर पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें माओवाद की वास्तविकता के साथ जनजातीय संस्कृति का भी प्रभावी चित्रण किया गया है।
‘बस्तर रोडमैप 2.0’ से होगा क्षेत्र का नवनिर्माण
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब बस्तर के नवनिर्माण का समय है और राज्य सरकार ‘बस्तर रोडमैप 2.0’ के तहत योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है। उन्होंने बताया कि नियद नेल्ला नार योजना और बस्तर मुन्ने अभियान के माध्यम से शासकीय योजनाओं का लाभ सैचुरेशन मोड में लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। जहां पहले सुरक्षा कैंप थे, वहां अब सेवा डेरे विकसित किए जा रहे हैं, जो शासकीय सेवाओं, कौशल विकास और उद्यमिता के केंद्र बनेंगे।
तीन साल में आय दोगुनी करने का लक्ष्य
साय ने बताया कि वर्तमान में बस्तर की लगभग 85 प्रतिशत आबादी की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन के जरिए अगले तीन वर्षों में इस आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि सहकारिता आधारित मॉडल के माध्यम से बस्तर को अग्रणी संभाग बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। जनजातीय परिवारों को गाय या भैंस उपलब्ध कराकर कृषि के साथ पशुपालन को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
स्वास्थ्य, शिक्षा और सिंचाई पर विशेष फोकस
मुख्यमंत्री ने बताया कि स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत अब तक लाखों लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है और उन्हें बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि नए बस्तर में कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा। बंद पड़े 421 स्कूलों को दोबारा शुरू किया गया है। साथ ही अबूझमाड़ और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी स्थापित करने की दिशा में काम चल रहा है। इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार बैराज का निर्माण भी किया जा रहा है, जिससे बड़ी संख्या में किसानों को सिंचाई सुविधा मिलेगी।
पर्यटन और संस्कृति को मिलेगी नई पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों के जरिए यहां की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। उन्होंने पुस्तक के दोनों लेखकों को इस महत्वपूर्ण कृति के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
डॉ. रमन सिंह बोले- वर्षों की मेहनत का नतीजा है यह पुस्तक
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि ‘तेरा राज नहीं आएगा रे’ वर्षों की मेहनत, शोध और जमीनी अध्ययन का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक किसी बंद कमरे में बैठकर नहीं लिखी गई, बल्कि बस्तर के दूरस्थ जंगलों तक पहुंचकर, आत्मसमर्पित नक्सलियों से बातचीत कर और वास्तविक परिस्थितियों को समझकर तैयार की गई है।
विजय शर्मा का दावा- माओवाद विचारधारा के रूप में आया था
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि माओवाद किसी आर्थिक मजबूरी से नहीं, बल्कि एक विचारधारा के रूप में आया था, जिसका उद्देश्य बंदूक के बल पर सत्ता स्थापित करना था। उन्होंने कहा कि आज वे बंदूकें वापस रखवाई जा चुकी हैं और समाज सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है।
उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के खत्म होने के बाद बस्तर में मेलों, मड़इयों और साप्ताहिक बाजारों की रौनक लौट आई है। देवगुड़ियों में फिर से पूजा-पाठ शुरू हो गया है। राज्य सरकार आत्मसमर्पित नक्सलियों और प्रभावित परिवारों के लिए बेहतर पुनर्वास व्यवस्था सुनिश्चित कर रही है तथा इसके लिए पुनर्वास केंद्र भी स्थापित किए गए हैं। शर्मा ने भी पुस्तक के दोनों लेखकों को बधाई और शुभकामनाएं दीं।



