दिल्लीराज्यराष्ट्रीयलखनऊव्यापार

इस स्वतंत्रता दिवस, पर्यावरण को लेकर दिल्ली वाले ने दिया दुकान दारो को लेक्चर


नई दिल्ली : स्वतंत्रता दिवस के एक हफ्ते पहले से ही आप ट्रैफिक सिग्नल और बाजारों में तिरंगे बेचने वालों को देखते होंगे। सारा नजारा पिछले वर्षों की तरह ही है, लेकिन इसमें एक बड़ा बदलाव नजर आ रहा है। इस बार प्लास्टिक के झंडों की जगह कपड़े के झंडे बेचे जा रहे हैं। जबकि प्लास्टिक के झंडे पर किसी तरह का सरकारी प्रतिबंध नहीं है।

गृह मंत्रालय ने लोगों से केवल अपील की थी कि, प्लास्टिक के बने राष्ट्रीय ध्वज का इस्तेमाल न किया जाए। वहीं राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से भी “गृह मंत्रालय” ने कहा था, कि राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े नियमों का पालन किया जाए। वहीं मंत्रालय का कहना है कि कागज के झंडे प्रयोग में लाए जा सकते हैं| लेकिन लास्टिक के झंडे ठीक नहीं, जबकि थोक विक्रेता और अन्य दुकानदार भी इस बार प्लास्टिक के तिरंगे नहीं बेच रहे हैं। उनका कहना है कि जब वे प्लास्टिक के झंडे बेचते हैं, तो लोग उन्हें ज्ञान देते हैं। लोगों का कहना है कि प्लास्टिक से पर्यावरण को नुकसान होता है, और कुछ लोग सोशल मीडिया पर विडियो भी डाल देते हैं।
वहीं एक विक्रेता ने बताया कि, जब उन्होंने प्लास्टिक का तिरंगा बेचने की कोशिश की तो दिल्ली वालों ने बड़े-बड़े लेक्चर दिए। उन्होंने कहा, ‘पहला सवाल ये पूछते हैं कि प्लास्टिक फ्लैग क्यों बेच रहे हो? पिछले साल मैंने प्लास्टिक के फ्लैग रखे थे| और जब भी ट्रैफिक सिग्नल पर गाड़ियों में बैठे लोगों को बेचने जाते थे, तो लोग फोन निकालकर फोटो लेने लगते थे। इसलिए इसबाार सिर्फ कपड़े वाला झंडा रखा है। वहीं आईटीओ पर तिरंगे बेचने वाले लोगों से बच्चे भी सवाल कर बैठते हैं। एक विक्रेता सोनू का कहना है| स्कूल के बच्चे प्लास्टिक का झंडा लेने से मना कर देते हैं। कहते हैं कि स्कूल में मना है। मुझे तो बच्चों ने कितनी बार कहां प्लास्टिक के फ्लैग्स बेचना ही बुरा है। इसलिए इसबार अपने पास प्लास्टिक के झंडे रखे ही नहीं। केवल कपड़े के फ्लैग हैं। पेपर वाले बारिश में खराब हो जाते हैं।

Related Articles

Back to top button