उत्तराखंडराज्य

नाउम्मीदी में जला रहे उम्मीदों के चिराग

रुड़की में एक बुजुर्ग बच्चों को उच्च शिक्षा मुहैया कराने का सपना ही नहीं देख रहे, उसे पूरा करने को तन, मन, धन से भी जुटे हैं।

रुड़की: जिस उम्र में इन्सान भजन-कीर्तन में ध्यान रमा लेता है, उस उम्र में डॉ. एबी गर्ग गरीब परिवारों के बच्चों को उच्च शिक्षा मुहैया कराने का सपना ही नहीं देख रहे, उसे पूरा करने को तन, मन, धन से भी जुटे हैं। इतना ही नहीं, 89 वर्षीय गर्ग ने आज भी न तो पारिवारिक जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ा, न सामाजिक जिम्मेदारियों से ही।

रुड़की से तीन किलोमीटर दूर दिल्ली रोड स्थित नागेंद्र विहार में जस्टिस डॉ. नागेंद्र सिंह मेमोरियल लाइब्रेरी है। इसकी स्थापना रुड़की यूनिवर्सिटी (अब आइआइटी) में अंग्रेजी विषय के पूर्व शिक्षक डॉ. गर्ग ने नवंबर 1994 में की थी। उद्देश्य था आर्थिक रूप से कमजोर जिन छात्रों के पास पुस्तकों का अभाव है, उन्हें बिना फीस चुकाए पुस्तकों का लाभ मिल सके।

पिछले 22 वर्षों से यह सिलसिला चल रहा है। डॉ. गर्ग ने 600 किताबों से इस लाइब्रेरी की शुरुआत की थी। आज इसमें पुस्तकों की संख्या 1500 से ऊपर पहुंच चुकी है। इनमें विधि, दर्शनशास्त्र, लाइब्रेरी साइंस, एमबीए, बीएड व एमए से लेकर 10वीं और 12वीं तक के पाठ्यक्रम की पुस्तकें हैं। यहां विद्यार्थी सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक आकर अपनी जरूरत के अनुसार अध्ययन कर सकते हैं।

इतना ही नहीं उम्र के इस पड़ाव में बाद भी डॉ. गर्ग रोजाना नियमित रूप से लाइब्रेरी खोलते हैं, चाहे वहां बच्चे आएं या न आएं। वह बताते हैं कि लाइब्रेरी की स्थापना उन्होंने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय द हेग के पूर्व अध्यक्ष एवं पद्म विभूषण से नवाजे जा चुके स्व. डॉ. नागेंद्र सिंह की स्मृति में की थी। लाइब्रेरी के सफल संचालन के लिए अब उनके बेटे डॉ. पीयूष कुमार गर्ग ने कमान संभाल ली है।

रुड़की विश्वविद्यालय से पीएचडी करने वाले और विभिन्न विश्वविद्यालयों में प्राध्यापक रह चुके डॉ. पीयूष के अनुसार 1999 से हर साल वह आर्थिक रूप से कमजोर तीन छात्रों को छात्रवृत्ति भी देते आ रहे हैं। वहीं जरूरतमंद छात्रों को पुस्तकों के सेट भी उपलब्ध करवाए जाते हैं। डॉ. पीयूष के अनुसार पिता के समान ही उनका लक्ष्य भी आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों का सहयोग करना है।

संविधान की मूल प्रति

इस लाइब्रेरी में भारत के संविधान की वह मूल प्रति भी मौजूद है, जिस पर संविधान निर्माताओं के 283 प्रमुख राजनेताओं के मूल हस्ताक्षर ऐतिहासिक धरोहर के रूप में रखे हुए हैं। इसके अलावा डॉ. सिंह के व्यक्तिगत जीवन की सैकड़ों विश्वविख्यात पुस्तकें भी यहां उपलब्ध हैं।

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