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रक्षा सौदे पर अमेरिका ने भारत को किया इशारा- हममें या रूस में से किसी एक को चुनना होगा

अमेरिका भारत जैसे देशों के लिए अपने उस कानून को लचीला बनाने पर काम कर रहा है जिसके तहत रूस से हथियार खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने की व्यवस्था की गई है। हालांकि अमेरिका ने यह साफ कर दिया है कि नई दिल्ली को इसके बदले मॉस्को के साथ अपनी प्रस्तावित 5.5 डॉलर बिलियन की एस-400 ट्रंफ एयर डिफेंस मिसाइल की डील को आगे नहीं बढ़ाना होगा। इससे एक तरह से अमेरिका साफ संदेश देना चाहता है कि भारत रक्षा सौदों के लिए रूस की बजाए उसे ही चुने।

अमेरिका की सशस्त्र सेवा समिति के विलियम मैक थोर्नबेरी ने सोमवार को कहा, ‘अमेरिका प्रशासन और कांग्रेस की कुछ चिंताए हैं। रूस से एस-400 सिस्टम की खरीद से दोनों देशों के बीच आपसी सैन्य सहयोग को झटका लग सकता है। हम एक अहम रणनीतिक साझेदार के तौर पर भारत का आदर करते हैं।’ यूएस कांग्रेस के सदस्यों के एक प्रतिनिधिमंडल ने इशारा किया कि भारत द्वारा एस-400 की डील करने से इसका असर उनके देश के साथ एमक्यू-9 रीपर या प्रीडेटर-बी और दूसरे उच्च तकनीक उपकरणों की होने वाली डील पर पड़ सकता है।

अमेरिकता चाहता है कि भारत कम्युनिकेशन कम्पैटिबिलिटी एंड सिक्योरिटी अरेंजमेंट (सीओएमसीएएसए) और बेसिक एक्सचेंज एंड कॉपरेशन एंग्रीमेंट फॉर जियोस्पाशियल कॉपरेशन (बीईसीए) जैसे समझौतों पर आपसी रणनीतिक साझेदारी बनाए रखने के लिए हस्ताक्षर करे ताकि चीन को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय साझेदारी को आगे बढ़ाया जा सके। हालांकि भारत और रूस के बीच 12 बिलियन डॉलर के प्रस्तावित रक्षा सौदे को लेकर बातचीत जारी है। दोनों ही अमेरिका के नए कानून काउंटरिंग अमेरिका एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शन एक्ट (सीएएटीएसए) से निपटने के लिए रोडमैप पर बात कर रहे हैं।

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