
केरल सरकार शुक्रवार को होने वाली माल एवं सेवा (जीएसटी) परिषद की बैठक में नारियल के तेल ((Coconut Oil) पर लगने वाले कर को बढ़ाने के कदम का विरोध करेगी. आधिकारिक सूत्रों ने गुरुवार को ये जानकारी दी. सूत्रों ने बताया कि जीएसटी परिषद की बैठक में शामिल होने के लिए केरल के वित्त मंत्री केएन बालागोपाल लखनऊ पहुंच चुके है और वो केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में इस मुद्दे को उठाएंगे.
सूत्रों ने कहा कि जीएसटी परिषद में नारियल के तेल पर लगने वाले कर को बढ़ाकर 18 प्रतिशत किया जा सकता है, जो वर्तमान में पांच प्रतिशत है. सूत्रों के अनुसार नारियल तेल पर कर में वृद्धि से नारियल तेल की कीमतों में वृद्धि होगी, जो केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में प्रमुख खाद्य तेल वस्तु है. उन्होंने कहा कि केरल सरकार जीएसटी परिषद की बैठक में नारियल तेल पर कर बढ़ाने के किसी भी कदम का कड़ा विरोध करेगी, क्योंकि ये राज्य के लोगों के हित के खिलाफ है.
माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की 17 सितंबर को होने वाली बैठक में संभवत: पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के तहत लाने पर विचार हो सकता है. ये एक ऐसा कदम होगा जिसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों को राजस्व के मोर्चे पर जबर्दस्त समझौता करना होगा. केंद्र और राज्य दोनों को इन उत्पादों पर कर के जरिए भारी राजस्व मिलता है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अगुवाई वाली जीएसटी परिषद में राज्यों के वित्त मंत्री भी शामिल हैं. परिषद की बैठक शुक्रवार को लखनऊ में हो रही हैं.
सूत्रों ने कहा कि इस बैठक में कोविड-19 से जुड़ी आवश्यक सामग्री पर शुल्क राहत की समयसीमा को भी आगे बढ़ाया जा सकता है. देश में इस समय वाहन ईंधन के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं, ऐसे में पेट्रोल और डीजल ईंधनों के मामले में कर पर लगने वाले कर के प्रभाव को खत्म करने के लिए ये कदम उठाया जा सकता है. वर्तमान में राज्यों की तरफ से पेट्रोल, डीजल की उत्पादन लागत पर वैट नहीं लगता बल्कि इससे पहले केंद्र की तरफ से इनके उत्पादन पर उत्पाद शुल्क लगाया जाता है, उसके बाद राज्य उस पर वैट वसूलते हैं.
केरल उच्च न्यायालय ने जून में एक रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान जीएसटी परिषद से पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के तहत लाने पर फैसला करने को कहा था. सूत्रों ने कहा कि न्यायालय ने परिषद को ऐसा करने को कहा है, ऐसे में इस पर परिषद की बैठक में विचार हो सकता है. देश में जीएसटी व्यवस्था एक जुलाई, 2017 से लागू हुई थी. जीएसटी में केंद्रीय कर मसलन उत्पाद शुल्क और राज्यों के शुल्क मसलन वैट को समाहित किया गया था, लेकिन पेट्रोल, डीजल, एटीएफ, प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया.



