
उत्तर प्रदेश में छोटी जंगली बिल्लियों के संरक्षण की बड़ी पहल, सरकार ने गठित की दो अहम समितियां
उत्तर प्रदेश सरकार ने जंगलों में पाई जाने वाली छोटी जंगली बिल्लियों के संरक्षण को लेकर बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में इन दुर्लभ प्रजातियों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक आवास के बेहतर प्रबंधन के लिए दो महत्वपूर्ण समितियों का गठन किया गया है।
इनमें 18 सदस्यीय स्टेट प्रोजेक्ट स्टीयरिंग समिति और 15 सदस्यीय लैंडस्केप लेवल एडवाइजरी समिति शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन समितियों के माध्यम से संरक्षण से जुड़े कार्यों को व्यवस्थित और प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकेगा।
कौन करेगा समितियों की अध्यक्षता
गठित स्टेट प्रोजेक्ट स्टीयरिंग समिति की अध्यक्षता पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव करेंगे। वहीं लैंडस्केप लेवल एडवाइजरी समिति की कमान दुधवा राष्ट्रीय उद्यान के फील्ड डायरेक्टर को सौंपी गई है।
इस पहल का उद्देश्य प्रदेश में पाई जाने वाली छोटी जंगली बिल्लियों की प्रजातियों के संरक्षण के साथ-साथ उनके आवास को सुरक्षित और बेहतर बनाना है।
केंद्र की पहल पर शुरू हुई संरक्षण योजना
छोटी जंगली बिल्लियों के संरक्षण को लेकर यह पहल केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की योजना के तहत की जा रही है। इस परियोजना में उत्तर प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और राजस्थान के साथ अंतरराष्ट्रीय संगठनों का भी सहयोग लिया जा रहा है।
वैश्विक पर्यावरण सुविधा परियोजना के अंतर्गत इन प्रजातियों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास के बेहतर प्रबंधन के लिए कई स्तरों पर कार्य किए जा रहे हैं। इसी उद्देश्य से परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए इन समितियों का गठन किया गया है।
दुधवा में पाई जाती हैं चार अहम प्रजातियां
केंद्र सरकार ने छोटी जंगली बिल्लियों की कुल नौ प्रजातियों को संरक्षण के लिए चिह्नित किया है। इनमें से चार प्रजातियां दुधवा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में पाई जाती हैं।
इनमें फिशिंग कैट, लेपर्ड कैट, जंगल कैट और रस्टी-स्पाटेड कैट शामिल हैं। इन प्रजातियों की संख्या सीमित होने के कारण इनके संरक्षण को लेकर विशेष रणनीति तैयार की जा रही है।
चार प्रमुख क्षेत्रों पर होगा विशेष फोकस
इस परियोजना के तहत संरक्षण से जुड़े चार प्रमुख क्षेत्रों पर काम किया जाएगा। इनमें सहायक नीतियों और योजनाओं को मजबूत करना, जंगली बिल्लियों के प्राकृतिक आवासों का बेहतर प्रबंधन और संरक्षण शामिल है।
इसके अलावा स्थानीय समुदायों की भागीदारी के माध्यम से मानव और वन्यजीव के बीच सहअस्तित्व को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जाएगा। इससे जंगलों के आसपास रहने वाले लोगों और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
सीमा पार सहयोग और निगरानी पर भी जोर
परियोजना के तहत उत्तर प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश से सटे नेपाल और भूटान के सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ संरक्षण से जुड़े अनुभव और जानकारी साझा करने की भी योजना है।
इसके साथ ही अवैध वन्यजीव व्यापार, शिकार और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसे मुद्दों पर भी समन्वय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
केंद्र सरकार की ओर से इस परियोजना के संचालन के लिए चालू वित्तीय वर्ष में 85.32 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। यह राशि राष्ट्रीय वन्यजीव कार्ययोजना 2017-31 के अनुरूप संरक्षण, आवास प्रबंधन, सामुदायिक सहभागिता, निगरानी और क्षमता विकास जैसे कार्यों पर खर्च की जाएगी।



