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हिमाचल में मौसम के बदले तेवर, ऊंची चोटियों पर बर्फबारी तो मैदानी इलाकों में बारिश और आंधी का असर

शिमला: हिमाचल प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। प्रदेश की ऊंची पहाड़ियों पर जहां ताजा बर्फबारी दर्ज की गई है, वहीं मैदानी और मध्य क्षेत्रों में बारिश, तेज हवाओं और ओलावृष्टि का दौर शुरू हो गया है। बदलते मौसम के बीच कई इलाकों में तापमान में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है और जनजीवन भी प्रभावित हुआ है।

बारालाचा, रोहतांग और शिंकुला में ताजा हिमपात
मंगलवार को प्रदेश की ऊंची चोटियों बारालाचा, कुंजुम, रोहतांग और शिंकुला में हल्का हिमपात हुआ। वहीं केलंग में तीन मिलीमीटर और चंबा में एक मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। मौसम विभाग ने मंडी, कुल्लू और शिमला के कुछ हिस्सों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने और ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। चंबा और कांगड़ा जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।

29 सड़कें बंद, 300 ट्रांसफार्मर खराब
लगातार खराब मौसम का असर बुनियादी सुविधाओं पर भी पड़ा है। प्रदेश में 29 सड़कें यातायात के लिए बंद हैं, जबकि करीब 300 ट्रांसफार्मर खराब होने से कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है। प्रशासन की टीमें बहाली कार्य में जुटी हुई हैं।

तापमान में भारी उतार-चढ़ाव दर्ज
प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में तापमान में एक से लेकर 7.7 डिग्री सेल्सियस तक का अंतर दर्ज किया गया। केलंग में अधिकतम तापमान में सबसे ज्यादा 7.7 डिग्री की गिरावट आई और यहां तापमान 11.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। दूसरी ओर शिमला और मंडी में अधिकतम तापमान 3.2 डिग्री तक बढ़ा, जबकि नाहन और सोलन में 2.5 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

न्यूनतम तापमान में भी बदलाव
न्यूनतम तापमान में भी दो से पांच डिग्री सेल्सियस तक का बदलाव देखा गया। ताबो में 5.1 डिग्री और केलंग में 2.7 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। वहीं कुफरी में 3.6 डिग्री और धर्मशाला में 2.5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हुई। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ बुधवार के बाद कुछ कमजोर पड़ सकता है, लेकिन 16 मई तक प्रदेश में इसका असर बना रहेगा और कई स्थानों पर बारिश की संभावना बनी हुई है।

मनाली-लेह मार्ग बहाल, सेना और पर्यटन को राहत
सीमा सड़क संगठन ने रणनीतिक दृष्टि से अहम मनाली-लेह मार्ग को बहाल कर दिया है। यह मार्ग पठानकोट-जम्मू-कारगिल-लेह मार्ग के मुकाबले छोटा और अधिक सुरक्षित माना जाता है। इस वर्ष बीआरओ ने पिछले साल की तुलना में एक सप्ताह पहले ही मार्ग बहाल कर दिया। पिछले वर्ष यह सड़क 18 मई को खोली गई थी।

42 दिनों में पूरा हुआ चुनौतीपूर्ण काम
427 किलोमीटर लंबे मनाली-लेह मार्ग की बहाली का कार्य 27 मार्च से शुरू किया गया था और महज 42 दिनों में इसे पूरा कर लिया गया। हालांकि इस दौरान खराब मौसम और लगातार बर्फबारी के कारण छह बार काम प्रभावित हुआ, लेकिन जवानों ने माइनस तापमान में भी काम जारी रखा। अब लाहौल-स्पीति प्रशासन के साथ बैठक के बाद जल्द ही वाहनों की आवाजाही शुरू की जाएगी।

बीआरओ अधिकारियों ने निभाई गोल्डन हैंडशेक रस्म
मंगलवार को सरचू में बीआरओ की दीपक और हिमांक परियोजना के अधिकारियों ने गोल्डन हैंडशेक सेरेमनी की रस्म निभाई। मनाली से सरचू तक दीपक परियोजना और सरचू से लेह तक हिमांक परियोजना सड़क बहाली का कार्य संभालती है। अधिकारियों के मुताबिक बारालाचा दर्रे को बहाल करना इस बार बेहद चुनौतीपूर्ण रहा।

जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट पर मंगलवार को नहीं रहीं उड़ानें
शिमला के जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट पर मंगलवार को उड़ानों का कोई शेड्यूल नहीं था। 20 मई तक तय कार्यक्रम के अनुसार सप्ताह में मंगलवार को छोड़कर अन्य दिनों में दिल्ली-शिमला-धर्मशाला के बीच उड़ानें संचालित की जाएंगी। हालांकि इन सेवाओं का संचालन मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगा।

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