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परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने अपने भजनों से किया मंत्रमुग्ध

परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने अपने भजनों से किया मंत्रमुग्ध।

ऋषिकेश। आज की युवा पीढ़ी की दुनिया मोबाइल स्क्रीन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया और तेजी से बदलते जीवन मूल्यों के बीच अपनी पहचान खोज रही है, ऐसे समय में परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती और साध्वी भगवती सरस्वती के पावन सान्निध्य में 10 हजार से अधिक युवाओं की उपस्थिति में कोलकाता में राघव व प्राची के द्वारा भजन जैमिंग का अद्भुत, अलौकिक, विलक्षण और ऊर्जावान कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस अवसर पर पूज्य स्वामी जी ने उस मां को भी सम्मानित किया जिन्होंने ऐसे सुन्दर संस्कार देकर अपने दोनों बच्चों के जीवन को भारतीय संस्कृति के संस्कारों से युक्त किया।
संस्कृति और आत्मिक शक्ति से जोड़ने का कार्य कर रहे
बचपन से अपने परिवार के साथ गंगा के पावन तट पर आने वाले ये दो विलक्षण प्रतिभा सम्पन्न युवा ’भजन जैमिंग’ के माध्यम से देश के युवाओं को अपनी जड़ों, संस्कृति और आत्मिक शक्ति से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। भजन जैमिंग एक ऐसी आध्यात्मिक क्रांति है जो आधुनिकता और सनातन के बीच एक सुंदर सेतु का निर्माण कर रही है।
जिस पीढ़ी को अक्सर तनाव, अकेलापन, अवसाद, डिजिटल व्यसन और पहचान के संकट से जूझता हुआ देखा जाता है, उसी पीढ़ी के युवा जब भजन जैमिंग में शामिल होते हैं तो उनके भीतर एक अद्भुत परिवर्तन दिखाई देता है। संगीत की लय, मंत्रों की शक्ति और भक्ति की ऊर्जा उनके मन को स्थिरता, सकारात्मकता और आत्मविश्वास प्रदान करती है। जहां शोर था वहां शांति है।
झूमते व नाचते हुये भजन जैमिंग का आनंद लिया
गिटार, तबला, ढोलक और भजनों के साथ जब भक्ति के स्वर गूंजें तो युवा केवल श्रोता नहीं बल्कि, सहभागी बनकर आज दस हजार से अधिक युवा पूज्य स्वामी जी और पूज्य साध्वी जी के पावन सान्निध्य में एक साथ गाते, झूमते व नाचते हुये भजन जैमिंग का आनंद लिया।
आज देश को ऐसे ही युवा नेतृत्व की आवश्यकता है जो केवल करियर ही नहीं, बल्कि कैरेक्टर निर्माण की बात करे, जो केवल सफलता नहीं, बल्कि सार्थकता का मार्ग दिखाए, जो केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि अंतर्मन को प्रकाशित करने वाली प्रेरणा दे।
आज का युवा सबसे शक्तिशाली परिवर्तनकारी माध्यम
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि आज का युवा केवल भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान का सबसे शक्तिशाली परिवर्तनकारी माध्यम है। यदि युवा अपनी ऊर्जा को सही दिशा देे तो वह स्वयं के साथ समाज और राष्ट्र का भी उत्थान कर सकता है। भजन जैमिंग केवल संगीत का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक आंदोलन है। जब युवा भक्ति, संगीत और संस्कृति से जुड़ता है तो जीवन के प्रति एक नई दृष्टि का जन्म होता है।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि आधुनिक तकनीक का उपयोग आवश्यक है, लेकिन तकनीक हमारे हाथों में रहे, हमारे मन और जीवन पर उसका नियंत्रण न हो। भजन, ध्यान और आध्यात्मिकता युवाओं को अपने भीतर की शांति, शक्ति और उद्देश्य से जोड़ते हैं। भारत की आध्यात्मिक विरासत ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है और जब युवा अपनी जड़ों से जुड़ा रहेगा तभी वह विश्व का नेतृत्व कर सकता है।
भजन जैमिंग युवाओं को आंतरिक जुड़ाव की ओर ले जाने का माध्यम
साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि भजन जैमिंग युवाओं को आंतरिक जुड़ाव की ओर ले जाने का एक सुंदर माध्यम है। संगीत हृदय की भाषा है और भक्ति आत्मा की। जब दोनों का संगम होता है तो जीवन में आनंद, संतुलन और शांति का उदय होता है। यह देखकर अत्यंत प्रसन्नता होती है कि हजारों युवा अपनी संस्कृति, आध्यात्मिकता और भारतीय मूल्यों से जुड़ने के लिए आगे आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता किसी विशेष स्थान तक सीमित नहीं है इसकी शुरुआत अपने घर, अपने हृदय और अपने दैनिक जीवन से की जा सकती है। जब युवा स्वयं को पहचान लेता है, तब उसके जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल जाती हैं।
गंगा की पवित्र धारा से निकला यह संगीत संदेश
भजन जैमिंग इसी परिवर्तन का सशक्त माध्यम बन रहा है। गंगा की पवित्र धारा से निकला यह संगीत संदेश आज देश के कोने-कोने तक पहुंच रहा है और जेन जी को याद दिला रहा है कि उनकी सबसे बड़ी शक्ति उनकी आध्यात्मिक विरासत है। जब युवा अपनी जड़ों से जुड़ता है, तभी वह अपने पंखों को सही दिशा में फैलाकर आकाश की नई ऊंचाइयों को छू सकता है।
राघव और प्राची “मौर्या रे” गीत की जीवंत प्रस्तुति
भजन जैमिंग के प्रसिद्ध युवा कलाकार राघव और प्राची “मौर्या रे” गीत की जीवंत प्रस्तुति देकर पूरे सभागार को संगीत और ऊर्जा से सराबोर कर दिया। कोलकाता की इस यादगार संध्या ने यह संदेश दिया कि आधुनिक जीवन की चुनौतियों के बीच भी आध्यात्मिकता, संगीत और सार्थक संवाद युवाओं के जीवन को दिशा और संतुलन प्रदान कर सकते हैं।

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