मध्य प्रदेश में उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी, इंटरनल असेसमेंट बढ़कर 40 अंक हो सकता है

भोपाल: मध्य प्रदेश में उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़े बदलावों की तैयारी शुरू हो गई है। उच्च शिक्षा विभाग शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में कई महत्वपूर्ण सुधारों पर काम कर रहा है, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शिक्षण, डिजिटल मूल्यांकन, ऑनलाइन उपस्थिति और विद्यार्थियों की डिजिटल शैक्षणिक पहचान जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
हाल ही में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में इन प्रस्तावित बदलावों को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। विभाग का लक्ष्य उच्च शिक्षा संस्थानों को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाते हुए विद्यार्थियों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है।
परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली में होगा बदलाव
उच्च शिक्षा विभाग परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए उत्तर पुस्तिकाओं के शत-प्रतिशत डिजिटल वैलिडेशन की दिशा में काम कर रहा है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद कॉपियों की जांच और मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक तेज और सटीक होने की उम्मीद है।
विभाग का मानना है कि डिजिटल मूल्यांकन से परीक्षा परिणामों में होने वाली देरी कम होगी और मूल्यांकन संबंधी शिकायतों में भी कमी आएगी।
इंटरनल असेसमेंट को मिल सकता है अधिक महत्व
वर्तमान में उच्च शिक्षा संस्थानों में 30 प्रतिशत अंक आंतरिक मूल्यांकन और 70 प्रतिशत अंक लिखित परीक्षा के आधार पर निर्धारित किए जाते हैं। अब इस अनुपात को बदलकर 40:60 करने पर विचार किया जा रहा है।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई, प्रोजेक्ट कार्य, असाइनमेंट और कक्षा में सहभागिता को पहले की तुलना में अधिक महत्व मिलेगा। इससे सतत मूल्यांकन प्रणाली को भी मजबूती मिलेगी।
महाविद्यालयों में बढ़ेगा एआई का उपयोग
उच्च शिक्षा विभाग कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को शिक्षण प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके तहत महाविद्यालयों में एआई से जुड़े प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, ताकि विद्यार्थी आधुनिक तकनीकों की समझ विकसित कर सकें।
इसके साथ ही एआई टूल्स के जिम्मेदार और रचनात्मक उपयोग पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है, जिससे छात्र भविष्य की तकनीकी चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार हो सकें।
हर छात्र की बनेगी डिजिटल शैक्षणिक पहचान
विद्यार्थियों के लिए अपार आईडी तैयार करने का कार्य भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। इस डिजिटल पहचान के माध्यम से छात्रों का पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड एक ही मंच पर उपलब्ध रहेगा।
इस व्यवस्था से प्रवेश प्रक्रिया, अंकसूची, प्रमाण-पत्र और अन्य शैक्षणिक दस्तावेजों तक पहुंच आसान होगी, साथ ही प्रशासनिक प्रक्रियाओं में भी तेजी आएगी।
मोबाइल ऐप से होगी उपस्थिति की निगरानी
कॉलेजों में विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ‘सार्थक ऐप’ आधारित उपस्थिति प्रणाली लागू करने की तैयारी की जा रही है। इस तकनीक के जरिए उपस्थिति रिकॉर्ड करना और उसकी निगरानी करना अधिक आसान हो जाएगा।
विभाग को उम्मीद है कि इससे विद्यार्थियों की कक्षाओं में सहभागिता बढ़ेगी और शैक्षणिक अनुशासन को मजबूती मिलेगी।
भारतीय भाषाओं में शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा
नई शिक्षा नीति के तहत विभिन्न भारतीय भाषाओं में पाठ्यक्रम उपलब्ध कराने की योजना पर भी काम चल रहा है। इसके अंतर्गत तेलुगु, तमिल, मराठी समेत अन्य भारतीय भाषाओं में अध्ययन के विकल्प विकसित किए जाएंगे।
इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनकी भाषा और सुविधा के अनुसार शिक्षा प्राप्त करने का अवसर उपलब्ध कराना है।
तकनीक से वैश्विक अवसरों तक पहुंच बनाने पर जोर
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि तकनीक आधारित शिक्षा केवल प्रशासनिक सुधार का माध्यम नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों से जोड़ने का प्रभावी साधन भी है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, ताकि शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता, पारदर्शिता और दक्षता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सके।



