‘गदर’ के क्लाइमेक्स के लिए उठाया बड़ा जोखिम, डायरेक्टर ने बेटे को बैठाया चलती ट्रेन पर

नई दिल्ली : हिंदी सिनेमा की सबसे सफल फिल्मों (Films) में शामिल ‘गदर: एक प्रेम कथा’ केवल अपनी कहानी, संवाद और देशभक्ति (Patriotism) से जुड़े भावनात्मक दृश्यों के लिए ही याद नहीं की जाती, बल्कि इसके निर्माण से जुड़ी कई दिलचस्प कहानियां भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसी ही एक कहानी फिल्म के क्लाइमेक्स दृश्य से जुड़ी है, जिसे लेकर निर्देशक अनिल शर्मा ने वर्षों बाद एक महत्वपूर्ण खुलासा किया था। उन्होंने बताया था कि फिल्म के एक दृश्य को वास्तविकता के करीब दिखाने की कोशिश में उन्हें अपने बेटे की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता का सामना करना पड़ा था।
साल 2001 में रिलीज हुई ‘गदर: एक प्रेम कथा’ ने भारतीय सिनेमा में नई मिसाल कायम की थी। फिल्म में सनी देओल द्वारा निभाया गया तारा सिंह का किरदार और अमीषा पटेल की सकीना दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुए। फिल्म का क्लाइमेक्स भी इसकी सबसे चर्चित विशेषताओं में शामिल रहा, जहां तारा सिंह अपने परिवार को लेकर पाकिस्तान से भारत लौटने की कोशिश करता है। इसी हिस्से में फिल्माया गया एक दृश्य बाद में निर्देशक के लिए सबसे यादगार और चुनौतीपूर्ण अनुभव बन गया।
फिल्म में तारा सिंह और सकीना के बेटे चरणजीत का किरदार उत्कर्ष शर्मा ने निभाया था, जो वास्तविक जीवन में निर्देशक अनिल शर्मा के बेटे हैं। उस समय उत्कर्ष की उम्र बेहद कम थी। क्लाइमेक्स के दौरान फिल्माए गए एक दृश्य में सनी देओल को चलती ट्रेन के ऊपर अपने कंधों पर उत्कर्ष को बैठाकर एक बोगी से दूसरी बोगी तक जाना था। बताया जाता है कि उस समय ट्रेन वास्तविक गति से चल रही थी और दृश्य को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए इसे वास्तविक परिस्थितियों में शूट किया गया था।
अनिल शर्मा ने एक साक्षात्कार में बताया था कि इस दृश्य की शूटिंग के दौरान वह बेहद तनाव में थे। उनके मन में लगातार यह चिंता बनी हुई थी कि कहीं कोई अप्रिय घटना न हो जाए। उन्होंने स्वीकार किया था कि शूटिंग के समय उन्होंने कई बार अपनी आंखें बंद कर ली थीं क्योंकि एक पिता के रूप में उनके लिए यह क्षण बेहद कठिन था। उनके अनुसार, यह उनके पूरे करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण दृश्यों में से एक था और आज भी वह उस फैसले को याद कर सोचते हैं कि उस समय उन्होंने कितना बड़ा जोखिम उठाया था।
निर्देशक ने यह भी कहा था कि उन्हें अभिनेता सनी देओल पर पूरा भरोसा था, लेकिन इसके बावजूद एक अभिभावक के रूप में मन में चिंता स्वाभाविक थी। शूटिंग सफलतापूर्वक पूरी हो गई और दृश्य फिल्म का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया, लेकिन उस अनुभव ने उन्हें लंबे समय तक प्रभावित किया।
‘गदर: एक प्रेम कथा’ ने रिलीज के बाद बॉक्स ऑफिस पर अभूतपूर्व सफलता हासिल की थी। सीमित बजट में बनी इस फिल्म ने रिकॉर्ड स्तर की कमाई की और लंबे समय तक दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनी रही। फिल्म के संवाद, गीत और किरदार आज भी भारतीय सिनेमा की चर्चाओं में शामिल रहते हैं। इसके दो दशक बाद रिलीज हुई ‘गदर 2’ ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए बॉक्स ऑफिस पर नए रिकॉर्ड स्थापित किए और यह साबित किया कि तारा सिंह की कहानी का प्रभाव दर्शकों के दिलों में अब भी बरकरार है।



