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इजरायल-लेबनान में संघर्ष विराम लागू करने पर सहमति, हिजबुल्लाह पर केंद्रित शर्तें बनीं विवाद की वजह

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका की मध्यस्थता में हुई वार्ता के बाद इजरायल और लेबनान ने संघर्ष विराम लागू करने पर सहमति जता दी है। वॉशिंगटन में हुई बातचीत के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने क्षेत्र में शांति बहाल करने और हिंसा रोकने के लिए कई अहम बिंदुओं पर सहमति बनने की पुष्टि की है।

हिजबुल्लाह की गैर-मौजूदगी बनी समझौते का सबसे बड़ा पहलू

इस पूरे समझौते की सबसे अहम और विवादित बात यह है कि वार्ता में हिजबुल्लाह शामिल नहीं था, जबकि शर्तें सीधे तौर पर उसी संगठन को केंद्र में रखकर तय की गई हैं। समझौते के अनुसार, संघर्ष विराम तभी प्रभावी माना जाएगा जब हिजबुल्लाह पूरी तरह गोलीबारी बंद करेगा और लिटानी नदी के दक्षिणी क्षेत्र से अपने सभी लड़ाकों को हटा लेगा।

लिटानी नदी के दक्षिण में सख्त प्रतिबंध और सैन्य व्यवस्था

समझौते में यह भी कहा गया है कि लिटानी नदी के दक्षिणी हिस्से में केवल लेबनानी सेना की मौजूदगी होगी और किसी भी गैर-सरकारी सशस्त्र समूह को वहां अनुमति नहीं दी जाएगी। इन इलाकों में हिजबुल्लाह की गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाने का प्रावधान किया गया है, जिसे समझौते की मुख्य शर्तों में शामिल किया गया है।

‘सिक्योरिटी जोन’ प्रस्ताव और नियंत्रण की नई व्यवस्था

दक्षिणी लेबनान में विशेष “पायलट सिक्योरिटी जोन” बनाए जाने की बात भी समझौते में शामिल है। इन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह लेबनानी सेना के नियंत्रण में रहेगी। अमेरिका का मानना है कि यह कदम लंबे समय तक स्थायी शांति की दिशा में निर्णायक साबित हो सकता है, हालांकि इसके क्रियान्वयन को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है।

जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण, ड्रोन हमलों में बढ़ी हिंसा

समझौते की घोषणा के बावजूद जमीनी हालात में तनाव कम नहीं हुआ है। दक्षिणी लेबनान में इजरायली ड्रोन हमलों में कम से कम छह लोगों की मौत की खबर सामने आई है। वहीं बेरूत के दक्षिणी हिस्से में एक वाहन को भी निशाना बनाया गया है, जिससे क्षेत्र में हालात और अधिक संवेदनशील बने हुए हैं।

पहले के संघर्ष विराम पर भी उठे सवाल

इससे पहले अप्रैल में दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम पर सहमति बनी थी, जिसे मई में आगे बढ़ाया गया था। हालांकि इसके बावजूद हिंसा और सैन्य कार्रवाई जारी रही। इजरायल की ओर से लगातार लेबनान के कई इलाकों में बमबारी की गई, जबकि जवाबी कार्रवाई में ड्रोन हमलों की घटनाएं सामने आती रहीं।

आने वाली वार्ता पर टिकी उम्मीदें

समझौते में यह भी तय किया गया है कि इजरायल और लेबनान 22 जून तक एक बार फिर राजनीतिक और सुरक्षा वार्ता करेंगे। इस बातचीत में लंबे समय से चले आ रहे विवादों को सुलझाने और स्थायी शांति की दिशा में आगे बढ़ने पर चर्चा की जाएगी।

हिजबुल्लाह को बाहर रखने पर बढ़ी कूटनीतिक बहस

समझौते में हिजबुल्लाह को शामिल न किए जाने को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। संयुक्त बयान में स्पष्ट किया गया है कि लेबनान के भविष्य का निर्णय केवल उसकी सरकार और इजरायल के बीच होगा, जबकि किसी भी गैर-राज्य संगठन या बाहरी ताकत को इसमें हस्तक्षेप की अनुमति नहीं होगी। इसे ईरान के लिए एक अप्रत्यक्ष संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि हिजबुल्लाह की अनुपस्थिति में इस समझौते को लागू करना सबसे बड़ी चुनौती होगी, और आने वाले दिनों में इसकी वास्तविक स्वीकार्यता जमीनी स्तर पर तय होगी।

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