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लॉन्च से महज 1 सेकंड पहले रुकी एलन मस्क की स्टारशिप, इंजन में गड़बड़ी से टला SpaceX का 13वां टेस्ट मिशन

वॉशिंगटन: एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की महत्वाकांक्षी मेगा रॉकेट स्टारशिप का 13वां परीक्षण मिशन लॉन्च से महज एक सेकंड पहले रोक दिया गया। उड़ान से ठीक पहले कुछ इंजनों के निर्धारित तरीके से सक्रिय नहीं होने पर सुरक्षा प्रणाली ने स्वतः लॉन्च को निरस्त कर दिया। इसके बाद रॉकेट को लॉन्च पैड पर सुरक्षित रखते हुए ईंधन निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई।

लॉन्च से पहले आखिर क्या हुई तकनीकी गड़बड़ी?

स्पेसएक्स के अनुसार, अब इंजीनियर यह पता लगाएंगे कि तकनीकी खराबी किस कारण हुई। जांच पूरी होने के बाद ही अगली लॉन्च तारीख तय की जाएगी। करीब 407 फीट (124 मीटर) ऊंची स्टारशिप दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे शक्तिशाली रॉकेट मानी जाती है, जिसमें 33 मुख्य इंजन लगे हैं। यह इसका 13वां परीक्षण मिशन था।

इंजन इग्निशन शुरू हुआ, फिर अचानक थम गया मिशन

स्पेसएक्स के लाइव वेबकास्ट में देखा गया कि निर्धारित लॉन्च से लगभग तीन सेकंड पहले इंजनों की इग्निशन प्रक्रिया शुरू हुई। लॉन्च पैड के ऊपर उड़ रहे ड्रोन कैमरे में यह पूरा दृश्य कैद हुआ। हालांकि कुछ इंजन सक्रिय होने के बाद अचानक बंद हो गए और स्टारशिप लॉन्च पैड से उड़ान नहीं भर सकी। इसके तुरंत बाद मिशन कंट्रोल ने रॉकेट से ईंधन निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी।

अगली लॉन्च कोशिश पर क्या बोले एलन मस्क?

एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि कंपनी को उम्मीद है कि अगली लॉन्च कोशिश कुछ ही दिनों में की जाएगी। फिलहाल तकनीकी टीम सभी प्रणालियों की विस्तृत जांच में जुटी हुई है।

इस मिशन का उद्देश्य क्या था?

मिशन के तहत स्पेसएक्स के 20 नए और उन्नत स्टारलिंक उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे जाने थे। लगभग एक घंटे की उड़ान के दौरान इन उपग्रहों को पहले से कक्षा में मौजूद स्टारलिंक नेटवर्क से जोड़ने के साथ-साथ स्टारशिप की हीट शील्ड की तस्वीरें भी लेनी थीं।

इस परीक्षण में न तो पहले चरण के बूस्टर को वापस लाने की योजना थी और न ही अंतरिक्ष यान को। मिशन पूरा होने के बाद दोनों को समुद्र में गिरना था।

नासा के लिए क्यों अहम है स्टारशिप?

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा अपने भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए स्टारशिप पर बड़ा भरोसा जता रही है। नासा ने स्पेसएक्स और जेफ बेजोस की कंपनी ब्लू ओरिजिन को ऐसे लूनर लैंडर विकसित करने की जिम्मेदारी दी है, जिनकी मदद से दशकों बाद इंसानों की चंद्रमा पर वापसी कराई जाएगी।

आर्टेमिस मिशन पर क्या होगा असर?

दोनों कंपनियों को अगले वर्ष तक अपने-अपने लूनर लैंडर उड़ान के लिए तैयार रखने होंगे, ताकि आर्टेमिस-III मिशन के अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की कक्षा में अपने कैप्सूल की लैंडर के साथ डॉकिंग का अभ्यास कर सकें। इसके बाद प्रस्तावित आर्टेमिस-IV मिशन के तहत दो अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में उतारने की योजना है।

फिलहाल स्पेसएक्स की तकनीकी टीम गड़बड़ी की जांच में जुटी है और अगली लॉन्च विंडो की तैयारी शुरू कर दी गई है।

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