जब रिकॉर्डिंग के लिए टेबल पर लेट गए थे किशोर कुमार, फिर जन्मा ‘इंतहा हो गई इंतजार की’ जैसा अमर गीत

नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा के महान पार्श्वगायक किशोर कुमार केवल अपनी आवाज के लिए ही नहीं, बल्कि अपने अनोखे अंदाज और रचनात्मक सोच के लिए भी जाने जाते थे। उनके जीवन से जुड़े कई किस्से आज भी लोगों को हैरान कर देते हैं। ऐसा ही एक रोचक किस्सा फिल्म ‘शराबी’ के मशहूर गीत ‘इंतहा हो गई इंतजार की’ से जुड़ा है, जिसने रिलीज के बाद संगीत प्रेमियों के दिलों में खास जगह बना ली थी।
साल 1984 में निर्देशक प्रकाश मेहरा अपनी चर्चित फिल्म ‘शराबी’ पर काम कर रहे थे। फिल्म में अमिताभ बच्चन मुख्य भूमिका निभा रहे थे। उनके किरदार की भावनाओं को पर्दे पर प्रभावी ढंग से पेश करने के लिए गीतकार अंजान ने गीत लिखा, जबकि संगीतकार बप्पी लाहिड़ी ने उसे मधुर धुनों से सजाया। गीत को आवाज देने की जिम्मेदारी किशोर कुमार को सौंपी गई।
पहले गाना गाने से कर दिया था इनकार
बताया जाता है कि जब किशोर कुमार को यह गीत रिकॉर्ड करने के लिए दिया गया, तो उन्होंने शुरुआत में इसे गाने से मना कर दिया। स्टूडियो में मौजूद लोग उनकी प्रतिक्रिया से हैरान रह गए। हालांकि कुछ देर बाद उन्होंने गीत की स्थिति और उसके भावों को विस्तार से समझा।
उन्हें बताया गया कि फिल्म में अमिताभ बच्चन का किरदार नशे की हालत में अपनी भावनाएं व्यक्त कर रहा है। यह सुनते ही किशोर कुमार ने गीत को अलग अंदाज में रिकॉर्ड करने का फैसला किया।
एक शर्त ने सबको कर दिया था हैरान
किशोर कुमार का मानना था कि यदि गीत में शराबी पात्र की भावनाओं और स्थिति को वास्तविक रूप देना है, तो वे इसे सामान्य तरीके से खड़े होकर नहीं गा सकते। उन्होंने रिकॉर्डिंग के दौरान लेटकर गाने की इच्छा जताई ताकि किरदार की मानसिक और शारीरिक अवस्था को बेहतर ढंग से महसूस कर सकें।
उनकी यह बात सुनकर रिकॉर्डिंग स्टूडियो में मौजूद सभी लोग चौंक गए। लेकिन किशोर कुमार अपनी शर्त पर कायम रहे। आखिरकार उनकी मांग मान ली गई और स्टूडियो में एक बड़ी टेबल की व्यवस्था की गई।
टेबल पर लेटकर हुई रिकॉर्डिंग, बन गया इतिहास
रिकॉर्डिंग शुरू होने से पहले माइक को विशेष तरीके से सेट किया गया और किशोर कुमार टेबल पर लेट गए। इसके बाद उन्होंने आशा भोसले के साथ मिलकर गीत रिकॉर्ड किया। उनकी आवाज और भावनात्मक अभिव्यक्ति ने गीत में ऐसा जादू भरा कि यह रिलीज होते ही सुपरहिट साबित हुआ।
कहा जाता है कि रिकॉर्डिंग के दौरान आशा भोसले भी किशोर कुमार के इस अनोखे तरीके को देखकर हैरान रह गई थीं। लेकिन नतीजा ऐसा निकला जिसने हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास में अपनी अलग पहचान बना ली।
आज भी लोगों की जुबान पर है यह गीत
‘इंतहा हो गई इंतजार की’ केवल फिल्म ‘शराबी’ का लोकप्रिय गीत नहीं बना, बल्कि हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार युगल गीतों में भी शामिल हो गया। दशकों बाद भी यह गाना उतनी ही पसंद के साथ सुना जाता है।
किशोर कुमार की सबसे बड़ी खासियत यही थी कि वे किसी गीत को सिर्फ गाते नहीं थे, बल्कि उसकी भावनाओं को पूरी तरह जीते थे। यही वजह है कि उनकी आवाज और उनके गीत आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में उसी ताजगी के साथ बसे हुए हैं।



