उज्जैन जमीन सौदे पर सियासी संग्राम! CM मोहन यादव पर लगे आरोपों को CMO ने नकारा, विपक्ष ने मांगी जांच

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजनीति में उज्जैन से जुड़े कथित जमीन सौदे को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। एक मीडिया रिपोर्ट में मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार से जुड़े लोगों पर बड़े पैमाने पर जमीन खरीदने के आरोप लगाए जाने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विवाद बढ़ने पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने सामने आकर सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि दिसंबर 2023 में मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद से न तो मोहन यादव और न ही उनके परिवार के किसी सदस्य ने कोई नई जमीन खरीदी है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री की पत्नी सीमा यादव के नाम पर भी इस अवधि में कोई भूमि क्रय नहीं की गई है।
मीडिया रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ विवाद
पूरा विवाद एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ, जिसमें दावा किया गया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव के परिवार से जुड़े व्यक्तियों और संबंधित रियल एस्टेट कंपनियों ने उज्जैन क्षेत्र में 137 भूखंड खरीदे। रिपोर्ट में इन जमीनों का कुल क्षेत्रफल करीब 168 एकड़ और अनुमानित मूल्य लगभग 45 करोड़ रुपये बताया गया।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि खरीदी गई जमीनें उन क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां भविष्य में सड़क परियोजनाएं, मास्टर प्लान के तहत भूमि उपयोग परिवर्तन और वर्ष 2028 के सिंहस्थ महापर्व से जुड़े विकास कार्य प्रस्तावित हैं। आरोप लगाया गया कि इन परियोजनाओं के कारण भविष्य में जमीनों के दाम बढ़ने की संभावना है।
विपक्ष ने सरकार को घेरा, जांच की मांग तेज
आरोप सामने आने के बाद कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला बोल दिया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मामले को गंभीर बताते हुए सरकार पर निशाना साधा और इसे सत्ता से जुड़े हितों का मामला बताया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पूरे प्रकरण की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश से कराने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद परिवार से जुड़ी जमीनों में असामान्य वृद्धि हुई है।
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत और तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए आरोपों को गंभीर बताया।
अखिलेश यादव ने दी अलग राजनीतिक व्याख्या
विवाद के बीच समाजवादी पार्टी प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का बयान भी चर्चा में आ गया। उन्होंने पूरे घटनाक्रम को भाजपा की आंतरिक राजनीति से जोड़ते हुए दावा किया कि यह मामला मुख्यमंत्री मोहन यादव को कमजोर करने या हटाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि मोहन यादव पहले से रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े रहे हैं, इसलिए इस प्रकार के आरोपों में उन्हें कोई नई बात नजर नहीं आती। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा के भीतर कुछ नेताओं को बदलने की कोशिशें चल रही हैं और यह विवाद उसी दिशा में देखा जा सकता है।
हालांकि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेज या प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया।
इन जमीनों को लेकर उठ रहे सवाल
रिपोर्ट में जिन जमीनों का उल्लेख किया गया है, उनमें से करीब 111 एकड़ भूमि इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर और अन्य प्रस्तावित विकास परियोजनाओं के आसपास बताई गई है। रिपोर्ट में मुख्यमंत्री के कुछ कथित करीबी लोगों के नामों का भी जिक्र किया गया है।
इसी आधार पर विपक्ष यह सवाल उठा रहा है कि क्या विकास परियोजनाओं की संभावित जानकारी का लाभ उठाकर जमीन खरीद की गई थी। हालांकि इन आरोपों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
CMO ने कहा- सभी आरोप निराधार
मुख्यमंत्री कार्यालय ने दो टूक कहा है कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार के खिलाफ लगाए जा रहे आरोप तथ्यहीन हैं। सूत्रों के अनुसार सरकार जल्द ही इस पूरे मामले पर विस्तृत आधिकारिक जवाब जारी कर सकती है, जिसमें रिपोर्ट में किए गए सभी दावों पर क्रमवार स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
फिलहाल मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के दौर में है और विपक्ष जहां जांच की मांग पर अड़ा हुआ है, वहीं सरकार सभी आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर रही है।



