राज्यहरियाणा

थाने के मालखाने से गायब हुए 32 हथियार! विदेशी पिस्तौल तक का नहीं मिला सुराग, पुलिस विभाग में मचा हड़कंप

फरीदाबाद: हरियाणा के फरीदाबाद से पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। सेक्टर-8 थाना परिसर के मालखाने से 32 लाइसेंसी हथियार रहस्यमय तरीके से गायब पाए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें लाखों रुपये कीमत की विदेशी पिस्तौलें भी शामिल हैं। मामले के खुलासे के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है और जांच तेज कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार, इन हथियारों को उनके मालिकों ने सुरक्षा कारणों से थाने में जमा कराया था। आमतौर पर लोग अपने लाइसेंसी हथियार सुरक्षित रखने के लिए पुलिस के पास जमा करते हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें वापस लिया जा सके। लेकिन इस मामले में मालखाने से ही हथियारों के गायब होने ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मालखाना प्रभारी पर गिरी गाज

प्रारंभिक जांच के बाद मालखाना प्रभारी उपनिरीक्षक बिजेंद्र सिंह के खिलाफ चोरी का मामला दर्ज किया गया है। साथ ही उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है और उनकी भूमिका को लेकर गहन पड़ताल की जा रही है।

विदेशी पिस्तौल से लेकर महंगे हथियार तक लापता

सूत्रों के मुताबिक गायब हुए हथियारों में सामान्य लाइसेंसी पिस्टलों के अलावा 10 से 12 लाख रुपये तक कीमत वाली विदेशी पिस्तौलें भी शामिल हैं। आशंका जताई जा रही है कि ये हथियार अवैध रूप से बेचे गए हो सकते हैं और राजस्थान, नोएडा समेत दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न इलाकों तक पहुंच चुके हैं।

धीरे-धीरे गायब किए गए हथियार

जांच में सामने आया है कि सभी हथियार एक साथ नहीं गायब हुए। शुरुआती जानकारी के अनुसार पिछले दो से तीन महीनों के दौरान एक-एक या दो-दो हथियार करके मालखाने से हटाए गए। सबसे बड़ा सवाल यह है कि सीसीटीवी कैमरों से लैस थाने के भीतर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे होती रही और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी।

13 से बढ़कर 32 पहुंची गायब हथियारों की संख्या

नियमित जांच के दौरान पहले 13 हथियारों के गायब होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद जब रिकॉर्ड और स्टॉक का मिलान किया गया तो लापता हथियारों की संख्या बढ़कर 32 तक पहुंच गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्काल जांच के आदेश दिए।

कई पुलिसकर्मी भी जांच के दायरे में

हथियारों की चोरी और लंबे समय तक इसकी जानकारी सामने न आने के कारण थाना स्तर के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इस पूरे मामले में किसी और की भी संलिप्तता है।

हथियारों की बरामदगी सबसे बड़ी चुनौती

पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती गायब हथियारों को बरामद करना है। अधिकारियों को आशंका है कि यदि ये हथियार किसी आपराधिक वारदात में इस्तेमाल हुए तो मामले की गंभीरता और बढ़ सकती है। इसी वजह से जांच एजेंसियों पर जल्द से जल्द सभी हथियारों का पता लगाने और पूरे नेटवर्क का खुलासा करने का दबाव बना हुआ है।

गोपनीय तरीके से चल रही जांच

सूत्रों के अनुसार, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच को बेहद गोपनीय रखा गया है। वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच टीम को निर्देश दिए हैं कि जांच से जुड़ी सूचनाएं सार्वजनिक न हों और सभी पहलुओं की गहराई से जांच की जाए।

Related Articles

Back to top button