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बंगाल में बड़ा सियासी ऐलान: धर्मांतरण विरोधी कानून, UCC और NRC लागू करने की घोषणा, विपक्ष ने बोला हमला

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब राज्य के मुख्यमंत्री और भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने धर्मांतरण विरोधी कानून, समान नागरिक संहिता (यूसीसी) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गर्मा गया और तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला।

कोलकाता के रवींद्र सदन में आयोजित ‘वंदे मातरम्’ गीत की 150वीं वर्षगांठ समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अवैध घुसपैठ और धर्मांतरण जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार जल्द सख्त कदम उठाएगी।

धर्मांतरण विरोधी कानून और NRC लागू करने की बात

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि सीमा पार से होने वाली अवैध घुसपैठ राज्य की जनसांख्यिकीय स्थिति को प्रभावित कर रही है। उन्होंने दावा किया कि इससे कई सामाजिक और सुरक्षा संबंधी समस्याएं भी पैदा हो रही हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार धर्मांतरण विरोधी कानून लाने के साथ-साथ समान नागरिक संहिता और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अवैध रूप से देश में प्रवेश करने वाले लोगों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।

CAA के तहत हिंदू शरणार्थियों को मिलेगी नागरिकता

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर भारत आने वाले हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के तहत नागरिकता प्रदान की जाएगी।

उन्होंने यह भी घोषणा की कि 9 अगस्त को आपातकाल का विरोध करने वाले लोकतंत्र सेनानियों को राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र भवानीपुर में भाजपा के नए कार्यालय का उद्घाटन भी किया।

महुआ मोइत्रा ने सरकार को घेरा

मुख्यमंत्री के बयान और विधानसभा में प्रस्तावित विधेयकों को लेकर तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के आवास पर आयोजित बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि राज्य में विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को दबाने की कोशिश की जा रही है।

महुआ मोइत्रा ने विशेष रूप से प्रस्तावित ‘बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026’ को लेकर चिंता जताई। उनका आरोप है कि इस कानून के तहत किसी व्यक्ति को केवल संदेह के आधार पर लंबे समय तक हिरासत में रखने का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने दावा किया कि प्रस्तावित कानून आपातकाल के दौरान लागू मीसा और वर्तमान यूएपीए से भी अधिक कठोर साबित हो सकता है तथा इसमें पर्याप्त न्यायिक सुरक्षा प्रावधानों का अभाव है।

भाजपा का पलटवार, कहा- अपराध पर लगेगी लगाम

तृणमूल कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष जनता के बीच भ्रम और भय का वातावरण बनाने की कोशिश कर रहा है।

भाजपा का कहना है कि प्रस्तावित ‘बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026’ का उद्देश्य संगठित अपराध, सिंडिकेट राज, जबरन वसूली और राजनीतिक हिंसा पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।

पार्टी नेताओं के अनुसार, कानून में दंगों और हिंसक प्रदर्शनों के दौरान सरकारी या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से क्षतिपूर्ति वसूलने का भी प्रावधान किया गया है।

राजनीतिक बहस के केंद्र में नए प्रस्ताव

धर्मांतरण विरोधी कानून, यूसीसी, एनआरसी और प्रस्तावित सुरक्षा कानून को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एक ओर सरकार इसे कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक सुधार से जोड़कर पेश कर रही है, वहीं विपक्ष इसे नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता के लिए चुनौती बता रहा हैआने वाले दिनों में इन प्रस्तावों को लेकर राज्य की राजनीति और अधिक गर्माने की संभावना जताई जा रही है।

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