छत्तीसगढ़राज्य

कर्रेगुट्टा पर आजादी के बाद पहली बार लहराया तिरंगा, कभी था नक्सलियों का गढ़; बस्तर के 90 गांवों में बदली तस्वीर

सुकमा। छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ लंबे संघर्ष के बाद अब बदलाव की तस्वीर सामने आ रही है। कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों पर आजादी के बाद पहली बार तिरंगा फहराया गया। कभी नक्सलियों के सबसे मजबूत गढ़ के तौर पर पहचाने जाने वाले इस इलाके में स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर तिरंगा लहराया गया। सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और बीजापुर जिलों के करीब 90 गांवों में भी 80 साल बाद पहली बार तिरंगा फहराया गया।
छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप बाइक से कर्रेगुट्टा पहुंचे और वहां तिरंगा फहराया। यह कार्यक्रम तीन दिन तक चली बस्तर तिरंगा यात्रा का हिस्सा था। यात्रा का उद्देश्य नक्सलवाद के खत्म होने के बाद ग्रामीणों के बीच सुरक्षा का भरोसा मजबूत करना और उनके मन से डर तथा भ्रम दूर करना था।
600 किलोमीटर बाइक से तय किया सफर
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा की अगुवाई में निकली तिरंगा यात्रा के आखिरी दिन की शुरुआत बीजापुर से हुई। इसके बाद यात्रा आवापल्ली, गलगम, उसूर, नम्बी और ताड़पाला होते हुए कर्रेगुट्टा पहाड़ी तक पहुंची। तीन दिनों के दौरान मंत्रियों ने नारायणपुर, कोंडागांव, सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर समेत पांच जिलों में करीब 600 किलोमीटर की दूरी बाइक से तय की।
करे्रेगुट्टा पर जवानों के साथ फहराया तिरंगा
कर्रेगुट्टा पहुंचने के बाद विजय शर्मा और केदार कश्यप ने सुरक्षा बलों के जवानों से मुलाकात की। दोनों ने शहीदों की याद में पौधे लगाए और इसके बाद स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर तिरंगा फहराया। विजय शर्मा ने इसे अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन बताया। उन्होंने कहा कि नक्सलियों के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले गढ़ में जवानों के साथ खड़े होकर तिरंगा फहराना उनके लिए विशेष अवसर है।
विजय शर्मा ने बताया कि केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के 141 पुलिस जवानों को विशिष्ट सेवा और सराहनीय सेवा पदक से सम्मानित किया है।
मंत्री बोले- कभी सोचा नहीं था यहां बिना डर आ पाएंगे
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि वह कर्रेगुट्टा की पहाड़ी पर बिना किसी डर के पहुंच पाएंगे। उनके मुताबिक, आज यहां पहुंचकर तिरंगा फहराना संभव हुआ है। सांसद महेश कश्यप ने इस मौके को ऐतिहासिक बताया और कहा कि आजादी के 79 साल बाद पहली बार इन इलाकों में तिरंगा सम्मान के साथ लहराया गया।
यात्रा के दौरान मंत्रियों और सांसद ने रास्ते में आने वाले गांवों में शहीदों की याद में पौधे लगाए। उन्होंने शहीदों की मिट्टी भी एकत्र की और उनके परिजनों तथा ग्रामीणों से मुलाकात की।
हिड़मा के गांव पूवर्ती से भी पहुंचे लोग
तिरंगा यात्रा के दूसरे दिन देर रात मंत्री टेकलगुडेम पहुंचे। कभी नक्सल गतिविधियों से प्रभावित रहे इस इलाके में लोगों ने उनका स्वागत किया। कुख्यात नक्सली हिड़मा के गांव पूवर्ती से भी ग्रामीण स्वागत के लिए पहुंचे थे।
भारी बारिश के बावजूद सिलगेर, ताड़मेटला, तर्रेम और जगरगुंडा के ग्रामीण देर शाम तक मंत्रियों के स्वागत के लिए मौजूद रहे। इस दौरान विधायक चैतराम अटामी और पूर्व विधायक महेश गागड़ा भी मौजूद थे।

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