मध्य प्रदेशराज्य

केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, आंदोलनकारी अमित भटनागर हिरासत में; तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल रेफर

छतरपुर: केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में बराना नदी के बीच पिछले 16 दिनों से चल रहे सांकेतिक चिता आंदोलन को रविवार तड़के पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई कर समाप्त करा दिया। कार्रवाई के दौरान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर को हिरासत में लिया गया। हिरासत के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने पर पहले बिजावर अस्पताल में प्राथमिक उपचार कराया गया, फिर बेहतर इलाज के लिए उन्हें छतरपुर जिला अस्पताल रेफर किया गया। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार, किशनगढ़ क्षेत्र की बराना नदी में आंदोलनकारी केन-बेतवा लिंक परियोजना में कथित अनियमितताओं और विस्थापन से जुड़े मुद्दों को लेकर पिछले 16 दिनों से सांकेतिक चिता बनाकर प्रदर्शन कर रहे थे। रविवार तड़के पुलिस और प्रशासन ने सुनियोजित रणनीति के तहत नदी क्षेत्र की घेराबंदी कर कार्रवाई शुरू की। कुछ देर तक आंदोलनकारियों ने विरोध किया, लेकिन भारी पुलिस बल की मौजूदगी में सभी को सुरक्षित नदी से बाहर निकाल लिया गया।

हिरासत के बाद बिगड़ी तबीयत

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने अमित भटनागर समेत कुछ प्रमुख आंदोलनकारियों को हिरासत में लिया। इसके बाद अमित भटनागर की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तत्काल बिजावर अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार दिया गया। स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने पर डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए छतरपुर जिला अस्पताल रेफर कर दिया।

पुलिस ने दर्ज मामलों का किया उल्लेख

पुलिस का कहना है कि अमित भटनागर के खिलाफ हत्या के प्रयास, शासकीय कार्य में बाधा सहित कई मामलों में पहले से प्रकरण दर्ज हैं और वह लंबे समय से फरार चल रहे थे। हिरासत में लेने के बाद उनका चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया और अब मामले में वैधानिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का दिया हवाला

छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण बराना नदी का जलस्तर बढ़ रहा था। ऐसे में नदी के बीच बैठे आंदोलनकारियों की सुरक्षा को खतरा था, इसलिए उन्हें वहां से हटाने का निर्णय लिया गया।

उन्होंने बताया कि परियोजना प्रभावित ग्रामीणों की प्रमुख मांग विस्थापन पैकेज को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 12.50 लाख रुपये करने की थी, जिसे राज्य सरकार पहले ही मंजूरी दे चुकी है। प्रशासन के अनुसार इसकी जानकारी आंदोलनकारियों को कई बार दी गई थी। साथ ही यह भी कहा गया कि आंदोलन के लिए प्रशासन से कोई अनुमति नहीं ली गई थी।

400 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के आरोपों पर मांगे साक्ष्य

कलेक्टर ने बताया कि कार्रवाई के दौरान पन्ना जिले से आए लोगों को सुरक्षित बसों के माध्यम से उनके गांव भेज दिया गया। वहीं आंदोलनकारियों द्वारा लगाए गए 400 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के आरोपों पर उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन को अब तक इस संबंध में कोई लिखित शिकायत या ठोस साक्ष्य प्राप्त नहीं हुए हैं। यदि शिकायत और प्रमाण उपलब्ध कराए जाते हैं तो नियमानुसार निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।

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