उत्तर प्रदेशराज्य

पांच बार विधायक, फिर भी टीनशेड का घर और रोडवेज से सफर… सादगी की मिसाल रहे आलम बदी, मंत्री पद भी ठुकराया था

आजमगढ़: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ विधायक आलम बदी का गुरुवार सुबह निधन हो गया। उत्तर प्रदेश के सबसे बुजुर्ग विधायकों में शामिल आलम बदी अपनी सादगी, ईमानदारी और जनसेवा के लिए विशेष पहचान रखते थे। आजमगढ़ की निजामाबाद विधानसभा सीट से पांच बार विधायक चुने गए आलम बदी ने लंबे राजनीतिक जीवन के बावजूद सादगीपूर्ण जीवनशैली नहीं छोड़ी। टीनशेड वाले साधारण घर में रहना और रोडवेज बस, साइकिल या स्कूटर से सफर करना उनकी पहचान बन गया था।

करीब छह दशक तक सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहने वाले आलम बदी के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ। समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे आलम बदी को एक बार मुलायम सिंह यादव ने मंत्री बनने का प्रस्ताव भी दिया था, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए इसे स्वीकार नहीं किया कि मंत्री बनने से जनता से दूरी बढ़ जाएगी और वह लोगों के बीच रहकर उनकी सेवा करना चाहते हैं।

टीनशेड के घर से जुड़ी रही उनकी पहचान

पांच बार विधायक बनने के बावजूद आलम बदी आजमगढ़ के कुर्मीटोला मोहल्ले स्थित अपने पुराने टीनशेड वाले घर में ही रहते थे। उन्होंने कभी आलीशान जीवनशैली नहीं अपनाई। निजी लग्जरी वाहनों की बजाय रोडवेज बस, साइकिल और स्कूटर से सफर करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। चुनाव जीतने के बाद भी वह लगातार आम लोगों के बीच रहते और उनकी समस्याओं के समाधान का प्रयास करते थे।

चुनाव प्रचार में भी दिखाई सादगी

जहां चुनावों में बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार और खर्च आम बात मानी जाती है, वहीं आलम बदी अपने चुनाव अभियानों में पोस्टर और बैनर तक नहीं छपवाते थे। उनका कोई सोशल मीडिया अकाउंट भी नहीं था। इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के बाद उन्होंने राजनीति का रास्ता चुना और समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में अपनी भूमिका निभाई।

महात्मा गांधी के विचारों से थे प्रभावित

आलम बदी अपनी सादगी के पीछे महात्मा गांधी के जीवन को प्रेरणा मानते थे। एक बातचीत में उन्होंने कहा था कि आजादी का अर्थ वैभवपूर्ण जीवन नहीं, बल्कि जनता की सेवा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा था कि महात्मा गांधी के पास भी सुविधाएं थीं, लेकिन उन्होंने सब कुछ त्यागकर जनसेवा का रास्ता चुना। इसी विचारधारा को अपनाते हुए उन्होंने सादा जीवन और सार्वजनिक सेवा को प्राथमिकता दी।

1996 में पहली बार बने विधायक, पांच बार जीती निजामाबाद सीट

आलम बदी पहली बार वर्ष 1996 में आजमगढ़ की निजामाबाद विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे। इसके बाद उन्होंने 2002, 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भी इसी सीट से जीत दर्ज की। बीच में वर्ष 2007 में बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार अंगद यादव से उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी मनोज यादव को 34,187 मतों के अंतर से पराजित किया।

मुलायम सिंह यादव द्वारा मंत्री बनने का प्रस्ताव मिलने पर भी आलम बदी ने इसे स्वीकार नहीं किया था। उनका मानना था कि मंत्री बनने से जनता के बीच उनकी सक्रियता प्रभावित होगी, इसलिए उन्होंने जनप्रतिनिधि के रूप में लोगों के बीच रहकर सेवा करना ही बेहतर समझा।

Related Articles

Back to top button