
नई दिल्ली: 12 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण लगने वाला है। इसी दिन सावन मास की हरियाली अमावस्या भी है, जिसे पितरों के तर्पण, श्राद्ध, स्नान और दान-पुण्य के लिए विशेष माना जाता है। ऐसे में सूर्य ग्रहण और अमावस्या एक ही दिन पड़ने से लोगों के बीच पूजा-पाठ, सूतक और पितरों के तर्पण को लेकर असमंजस है। हालांकि, भारत में ग्रहण रात के समय होने के कारण इसका कोई असर नहीं होगा और अमावस्या तिथि पर सुबह स्नान, दान और पितरों का तर्पण किया जा सकता है।
भारत में किस समय लगेगा सूर्य ग्रहण
भारतीय समय के अनुसार सूर्य ग्रहण रात करीब 9 बजे शुरू होगा और 13 अगस्त को तड़के 4:25 बजे समाप्त होगा। जिस समय ग्रहण लगेगा, उस दौरान भारत में रात होगी। इसी वजह से भारत में इस सूर्य ग्रहण का प्रभाव नहीं माना जाएगा।
ऐसे में हरियाली अमावस्या के दिन सुबह पितरों का तर्पण करने के साथ स्नान और दान-पुण्य किया जा सकता है। ग्रहण के कारण अमावस्या से जुड़े इन धार्मिक कार्यों में किसी तरह की बाधा नहीं होगी।
12 अगस्त को मनाई जाएगी हरियाली अमावस्या
सावन मास की अमावस्या 12 अगस्त, बुधवार को मनाई जाएगी। इस बार तिथियों के क्रम में बदलाव के कारण 11 अगस्त को चतुर्दशी और 12 अगस्त को अमावस्या तिथि रहेगी। सनातन परंपरा में हरियाली अमावस्या को पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य के लिए विशेष महत्व दिया गया है।
इस दिन भगवान शिव की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु सुबह किसी पवित्र नदी में स्नान कर सकते हैं और इसके बाद पितरों के लिए दान-पुण्य कर सकते हैं। दान में वस्त्र और भोजन आदि देने की परंपरा है।
ऐसे करें पितरों का तर्पण
हरियाली अमावस्या की सुबह स्नान करने के बाद पितरों का स्मरण कर उनकी आत्मा की शांति के लिए तर्पण किया जा सकता है। इसके लिए जल, तिल और कुश का इस्तेमाल किया जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, अमावस्या के दिन श्रद्धापूर्वक पितरों का तर्पण और दान करने से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसी वजह से हरियाली अमावस्या को पितरों के निमित्त धार्मिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण तिथि माना जाता है।
ग्रहण को लेकर क्यों है लोगों में असमंजस
12 अगस्त को एक ओर पूर्ण सूर्य ग्रहण पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर इसी दिन हरियाली अमावस्या है। आमतौर पर ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियों को लेकर विशेष नियमों का पालन किया जाता है और सूतक काल का भी ध्यान रखा जाता है।
लेकिन इस बार भारत में ग्रहण रात के समय होने के कारण यहां इसका प्रभाव नहीं होगा। ऐसे में अमावस्या के दिन सुबह पितरों का तर्पण, स्नान और दान-पुण्य किया जा सकता है।



