बिहारराज्य

अगली NEET परीक्षा में भी सेंध की तैयारी, सरगना समेत 3 गिरफ्तार; छापेमारी में फर्जी दस्तावेज और ब्लैंक चेक बरामद

पटना: नीट यूजी 2026 में कथित धांधली और अनियमितताओं की जांच कर रही आर्थिक अपराध इकाई को बड़ी कामयाबी मिली है। जांच एजेंसी ने लखीसराय के तीन परीक्षा केंद्रों पर हुई कथित गड़बड़ी के मुख्य सरगना डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट, उसके भाई अश्विनी कुमार और तीन मई को रद्द हुई नीट परीक्षा से जुड़े मामले के आरोपी डॉ. उज्ज्वल राज को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि गिरोह ने अगली नीट परीक्षा में भी सेंध लगाने की तैयारी कर रखी थी।

डॉ. रविशंकर और डॉ. उज्ज्वल राज नालंदा के पावापुरी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस अंतिम वर्ष के छात्र हैं। दोनों को पटना के जक्कनपुर स्थित आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय परीक्षा केंद्र के बाहर से पकड़ा गया। दोनों एमबीबीएस में अनुत्तीर्ण छात्रों के लिए आयोजित तीसरे वर्ष की अनुपूरक परीक्षा में शामिल होने पहुंचे थे। रविशंकर के भाई अश्विनी कुमार को भी जांच एजेंसी ने गिरफ्तार किया है।

ईओयू के मुताबिक पटना जिले के शाहजहांपुर के मकसूदपुर निवासी डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट नीट यूजी 2026 में कथित धांधली को लेकर 21 जून को लखीसराय के कवैया और किऊल थानों में दर्ज तीन मामलों का मुख्य आरोपी है। उसकी पत्नी मधुप्रिया भी नीट पुनर्परीक्षा की अभ्यर्थी थी। रविशंकर पर पत्नी की जगह फर्जी परीक्षार्थी बैठाकर परीक्षा पास कराने का आरोप है। गर्भवती होने के कारण उसकी गिरफ्तारी पर फिलहाल अदालत से रोक है।

अभ्यर्थियों से 12 से 30 लाख रुपये तक वसूली का आरोप

जांच के अनुसार डॉ. रविशंकर और डॉ. उज्ज्वल राज प्रतियोगी परीक्षाओं में मूल अभ्यर्थियों की जगह स्कॉलर बैठाने के लिए 12 से 30 लाख रुपये तक लेते थे। परीक्षा फॉर्म भरते समय ही मूल अभ्यर्थी और स्कॉलर के बीच कथित तौर पर पूरी व्यवस्था तय कर ली जाती थी।

इसके बाद कुछ अधिकृत आधार एजेंटों और कॉमन सर्विस सेंटर संचालकों की मदद से मूल अभ्यर्थी के बायोमेट्रिक की जगह फर्जी अभ्यर्थी का बायोमेट्रिक अपडेट कराया जाता था। फोटो में भी कथित तौर पर बदलाव कराए जाते थे, ताकि बायोमेट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया को पार किया जा सके। ईओयू की जांच में लखीसराय, हाजीपुर, नवादा और नालंदा समेत कई जिलों के बायोमेट्रिक वेंडरों की कथित संलिप्तता सामने आई है। उनकी पहचान भी की जा चुकी है।

गिरोह में डॉक्टर की पत्नी का नाम भी सामने आया

ईओयू के अनुसार डॉ. रविशंकर की पत्नी मधुप्रिया एईडीओ की भी अभ्यर्थी थी। वह ओबीसी श्रेणी से आती हैं, जबकि संपतचक प्रखंड कार्यालय से उनके लिए कथित तौर पर फर्जी एससी जाति प्रमाण पत्र बनवाया गया था।

जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह ने नीट काउंसलिंग के जरिए अभ्यर्थियों का दाखिला कराने के लिए फर्जी आय, दिव्यांगता और जाति प्रमाण पत्र तैयार करवाए। अश्विनी कुमार के फ्लैट से बड़ी संख्या में ऐसे कथित फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए हैं। जिन अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड, दिव्यांगता प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र और ब्लैंक चेक जब्त हुए हैं, उन्हें नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है।

ईओयू को एमबीबीएस परीक्षाओं में भी सेटिंग के प्रमाण मिलने की बात कही गई है। जांच एजेंसी ने गिरोह के कई अन्य सदस्यों की पहचान की है। इनमें बिहार के मेडिकल, नर्सिंग और डेंटल कॉलेजों के छात्र, विभिन्न जिलों के बायोमेट्रिक मैनपावर सप्लायर और वेंडर तथा फर्जी आधार और अन्य प्रमाण पत्र तैयार करने वाले लोग शामिल हैं।

डॉ. उज्ज्वल पर 2024 की NEET में भी फर्जी स्कॉलर बैठाने का आरोप

मोतिहारी के केसरिया थाना क्षेत्र के दिलावरपुर निवासी डॉ. उज्ज्वल राज पर नीट यूजी 2024 में भी कथित धांधली का आरोप है। उस पर जवाहर नवोदय विद्यालय में सात फर्जी स्कॉलर बैठाने का आरोप है। इस संबंध में कटिहार के कोढ़ा थाने में मामला दर्ज है।

तीन मई 2026 को हुई नीट परीक्षा में कथित धांधली के मामले में भी उसकी गिरफ्तारी हुई थी। देशभर में अनियमितताओं के चलते यह परीक्षा बाद में रद्द कर दी गई थी। पूर्णिया के मधुबनी थाने में दर्ज परीक्षा धांधली से जुड़े मामले में स्कॉलर बैठाने के संदेह पर सीबीआई भी उससे पूछताछ कर चुकी है।

छापेमारी में खाली परीक्षा बुकलेट और कई एडमिट कार्ड मिले

ईओयू के मुताबिक अश्विनी कुमार के पटना स्थित दोनों फ्लैट पर छापेमारी के दौरान आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय की एमबीबीएस परीक्षा की कई खाली बुकलेट बरामद हुईं। इसके अलावा एईडीओ, नीट, बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग और केंद्रीय चयन पर्षद की सिपाही भर्ती परीक्षा से जुड़े कई अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड भी मिले।

छापेमारी में कई अभ्यर्थियों के स्कूल अंकपत्र, मूल प्रमाण पत्र और स्थानांतरण प्रमाण पत्र भी बरामद हुए। जांच टीम को भारतीय स्टेट बैंक समेत कई बैंकों के 25 हस्ताक्षरित और ब्लैंक चेक मिले, जिन पर बड़ी रकम अंकित थी। करीब दो लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए।

लखीसराय में नीट पुनर्परीक्षा के दौरान स्कॉलरों के आवागमन के लिए इस्तेमाल की जा रही अश्विनी कुमार के नाम से पंजीकृत टाटा हैरियर गाड़ी को भी जब्त किया गया है।

2012 में 12वीं पास, 2022 में मेडिकल कॉलेज में दाखिला

ईओयू के अनुसार डॉ. रविशंकर ने 2012 में 12वीं की परीक्षा पास की थी। इसके करीब दस साल बाद 2022 में नीट में सफलता हासिल कर उसने पावापुरी मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया। वह राजस्थान के धौलपुर जिले के निहालगंज थाने में रेलवे की ग्रुप डी परीक्षा में कथित धांधली से जुड़े मामले का भी आरोपी है और फिलहाल जमानत पर है।

एमबीबीएस की अनुपूरक परीक्षा में शामिल होने के आधार पर उसने सक्षम अदालतों से गिरफ्तारी पर रोक का आदेश हासिल किया था। जांच एजेंसी के मुताबिक 29 जुलाई को बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग की हवलदार परीक्षा में बायोमेट्रिक वेंडर की मदद से कथित धांधली कराने में भी उसने सहयोग किया था।

ईओयू का आरोप है कि रविशंकर ने नीट पुनर्परीक्षा में सफल कई अभ्यर्थियों को मेडिकल कॉलेजों में काउंसलिंग के दौरान फर्जी प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने में मदद की और इसके बदले मोटी रकम वसूली।

अगली NEET में CBT के जरिए धांधली की तैयारी

जांच में अगली नीट परीक्षा को लेकर भी कथित साजिश का खुलासा हुआ है। डॉ. रविशंकर और उसके गिरोह ने कंप्यूटर आधारित परीक्षा यानी सीबीटी मोड में प्रस्तावित अगली नीट परीक्षा में गड़बड़ी करने की तैयारी कर रखी थी।

अश्विनी कुमार के रामकृष्णा नगर स्थित फ्लैट पर हुई छापेमारी में इससे जुड़े दस्तावेज मिले। इनमें पटना के सनराइज इनोवेशन ऑनलाइन एग्जाम सेंटर से संबंधित अनुबंध पत्र भी शामिल है। पूछताछ में अश्विनी ने कथित तौर पर बताया कि आगामी सीबीटी परीक्षा में गड़बड़ी करने की योजना के तहत उसने ऑनलाइन परीक्षा केंद्र में निवेश कर एकरारनामा किया था।

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