UPI पर MDR शुल्क से PhonePe-Google Pay को कैसे होगा फायदा? 0.4% चार्ज के बीच समझें पूरा खेल, व्यापारी क्यों कर रहे विरोध

नई दिल्ली: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने की प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर फिनटेक सेक्टर में चर्चा तेज हो गई है। 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट यानी P2M लेनदेन पर 0.4% MDR लागू होने की बात कही जा रही है। इस बदलाव का असर जहां व्यापारियों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, वहीं UPI बाजार में बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले PhonePe और Google Pay के लिए यह अतिरिक्त राजस्व का रास्ता खोल सकता है।
भारत में डिजिटल भुगतान के सबसे बड़े माध्यमों में शामिल UPI पर मर्चेंट शुल्क लागू होने की खबर के बाद फिनटेक कंपनियों की रणनीति और कमाई को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, इस शुल्क का विरोध भी राजनीतिक स्तर के साथ-साथ व्यापारी संगठनों की ओर से किया जा रहा है।
PhonePe और Google Pay को सालाना कितना फायदा हो सकता है?
ब्रोकरेज फर्म Bernstein की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नए MDR से मार्च 2028 तक फिनटेक और पेमेंट ऐप्स के लिए सालाना करीब 1.1 अरब डॉलर यानी लगभग 9,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व पैदा हो सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, UPI के करीब 80% बाजार पर PhonePe और Google Pay की हिस्सेदारी है। ऐसे में अनुमान है कि नए राजस्व में लगभग 900 मिलियन डॉलर यानी करीब 7,500 करोड़ रुपये इन दोनों कंपनियों के हिस्से में आ सकते हैं।
PhonePe के सह-संस्थापक राहुल चारी ने इस बदलाव का स्वागत किया है। उनके मुताबिक, MDR से कंपनियों की परिचालन लागत और देनदारियों की भरपाई करने के साथ डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
छोटी कंपनियां हाई-वैल्यू पेमेंट पर कर सकती हैं फोकस
MDR से मिलने वाले नए राजस्व के कारण बड़ी फिनटेक कंपनियों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क विस्तार को बढ़ावा मिल सकता है। ग्रामीण इलाकों में लेनदेन का औसत आकार छोटा होने के बावजूद वहां से मिलने वाला डेटा कंपनियों को वित्तीय उत्पाद, बीमा और लोन जैसी सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है।
वहीं, MobiKwik जैसी छोटी कंपनियां टिकट बुकिंग, यूटिलिटी बिल भुगतान और बड़े व्यावसायिक लेनदेन जैसे हाई-वैल्यू पेमेंट पर अधिक ध्यान दे सकती हैं। MobiKwik के सह-संस्थापक बिपिन प्रीत सिंह के मुताबिक, यह बदलाव उद्योग को केवल P2P ट्रांसफर से आगे बढ़ाकर मर्चेंट पेमेंट और ई-कॉमर्स कारोबार की ओर ले जा सकता है।
हालांकि, Bloom Ventures के जोसेफ सेबेस्टियन का कहना है कि इस तरह के बड़े नीतिगत बदलाव से मिलने वाला वित्तीय लाभ मुख्य रूप से पहले से स्थापित बड़ी कंपनियों को मिल सकता है।
30% मार्केट शेयर कैप पर फिर शुरू हो सकती है बहस
बड़ी कंपनियों की वित्तीय ताकत बढ़ने के साथ UPI ऐप्स के लिए NPCI की 30% मार्केट शेयर सीमा को लेकर चर्चा फिर तेज हो सकती है। किसी एक ऐप की बाजार हिस्सेदारी को सीमित करने से जुड़ा यह मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है।
वैश्विक डिजिटल भुगतान मॉडल से तुलना करें तो भारत की नई व्यवस्था को चीन के Alipay और ब्राजील के Pix जैसे सिस्टम से जोड़कर देखा जा रहा है। Alipay पर 0.6% से 1.5% तक शुल्क लगने का उल्लेख किया गया है।
व्यापारी क्यों कर रहे MDR का विरोध?
2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 0.4% MDR लागू होने से व्यापारी संगठनों को अपने मार्जिन और मुनाफे पर असर पड़ने की चिंता है। नियमों के मुताबिक, व्यापारी यह शुल्क सीधे ग्राहकों से वसूल नहीं सकते। इसके बावजूद कारोबारियों को आशंका है कि अतिरिक्त लागत का बोझ उन्हें खुद उठाना पड़ेगा।
इंदौर में व्यापारियों ने इस मुद्दे पर विरोध भी दर्ज कराया। 23 सितंबर को शहर में 125 से अधिक व्यापारी संगठनों और 2 लाख से ज्यादा व्यापारियों ने ‘नो क्यूआर कोड, ओनली कैश’ अभियान चलाया। विरोध के दौरान व्यापारियों ने अपने QR कोड पर काला कपड़ा बांधा। राजबाड़ा, सियागंज, क्लॉथ मार्केट, सराफा, मारोठिया बाजार, लोहामंडी, प्लायवुड, किराना और पेट्रोल-डीजल एसोसिएशन समेत कई कारोबारी समूह इस अभियान में शामिल हुए।
क्या नकद भुगतान की ओर लौट सकते हैं ग्राहक?
इस फैसले की राजनीतिक स्तर पर भी आलोचना हुई है। आलोचकों का तर्क है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बाद शुल्क लागू करने से आम लोगों और छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त लागत का असर पड़ सकता है।
उपभोक्ता समूहों की ओर से यह आशंका भी जताई गई है कि व्यापारी सीधे ग्राहकों से MDR नहीं ले सकेंगे, लेकिन इसकी भरपाई के लिए उत्पादों और सेवाओं की कीमतें बढ़ा सकते हैं। इससे अप्रत्यक्ष रूप से इसका बोझ ग्राहकों पर पड़ सकता है।
आलोचकों का एक तर्क यह भी है कि MDR से बचने के लिए कुछ व्यापारी ग्राहकों से नकद भुगतान की मांग कर सकते हैं। इससे डिजिटल भुगतान के बजाय नकद लेनदेन बढ़ने की आशंका पैदा हो सकती है। हालांकि, RBI और उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक UPI लोगों की रोजमर्रा की भुगतान आदत का हिस्सा बन चुका है, इसलिए व्यापारी और उपभोक्ता आसानी से नकद व्यवस्था की ओर वापस नहीं लौटेंगे। उनके अनुसार, शुल्क से डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे को लंबे समय में अधिक टिकाऊ और सुरक्षित बनाने में मदद मिल सकती है।



