
नई दिल्ली: सावन के महीने में कई घरों में दूध, दही और इनसे बनी चीजों के सेवन से परहेज किया जाता है। अक्सर लोग इस परंपरा का पालन करते हैं, लेकिन इसके पीछे की वजह सभी को पता हो, ऐसा जरूरी नहीं है। इसके पीछे मौसम, खान-पान और पाचन से जुड़ी कई वजहें बताई जाती हैं।
बारिश में बढ़ जाते हैं कीड़े-मकोड़े
सावन के दौरान बारिश होने से जगह-जगह घास और हरे पौधे तेजी से उगने लगते हैं। इसी वजह से इन स्थानों पर कई तरह के कीड़े-मकोड़े भी पनपने लगते हैं। गाय, भैंस और बकरी जैसे दूध देने वाले पशु इसी घास और चारे को खाते हैं।
ऐसे में चारे के साथ कुछ कीड़े या अन्य हानिकारक तत्व पशुओं के शरीर में पहुंचने की आशंका जताई जाती है। इसी आधार पर सावन में दूध के सेवन से बचने की सलाह दी जाती है। दूध से दही, पनीर और दूसरी चीजें तैयार होती हैं, इसलिए इनसे बनी चीजों से भी परहेज करने की परंपरा बताई जाती है।
बारिश में कमजोर पड़ सकता है पाचन तंत्र
सावन बारिश के मौसम में आता है और इस दौरान कई लोगों का पाचन तंत्र प्रभावित हो सकता है। दूध, दही या इनसे बनी चीजों का सेवन कुछ लोगों में अपच, गैस, पेट दर्द, उल्टी, दस्त और एसिडिटी जैसी समस्याओं की वजह बन सकता है।
इसी कारण बारिश के मौसम में हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करने की सलाह दी जाती है। सावन में दूध और उससे बनी चीजों से दूरी रखने की परंपरा को भी इसी मौसमी बदलाव से जोड़कर देखा जाता है।
पानी और संक्रमण का भी बताया जाता है संबंध
बारिश के मौसम में वातावरण और पानी में कई तरह के बैक्टीरिया पनपने की संभावना बढ़ जाती है। हर घर में पानी को शुद्ध करने की व्यवस्था होना संभव नहीं है और कई लोग नल के पानी का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में दूषित पानी के संपर्क में आने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
दूध या दूध से तैयार दही और पनीर के जरिए भी दूषित तत्व शरीर में पहुंचने की आशंका बताई जाती है। इससे उल्टी, दस्त, पेट दर्द, मरोड़ और ऐंठन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में खांसी, जुकाम और बुखार जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं।
सावन में खान-पान को लेकर बरती जाती है सावधानी
सावन के दौरान दूध, दही और इनसे बनी चीजों से परहेज करने की परंपरा को मुख्य रूप से बारिश के मौसम में स्वच्छता, पाचन और संक्रमण से जुड़ी सावधानियों के साथ जोड़ा जाता है। हालांकि दूध और डेयरी उत्पादों का सेवन पूरी तरह बंद करना हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं माना जा सकता। भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और व्यक्ति की अपनी सहनशीलता भी महत्वपूर्ण होती है।



