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सावन के आखिरी सोमवार पर शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब, जानिए जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त और सही पूजा विधि

नई दिल्ली: सावन के आखिरी सोमवार के मौके पर देशभर के शिव मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। भक्त भगवान शिव के दर्शन कर रहे हैं और शिवलिंग पर जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना में जुटे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन सोमवार को भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

जलाभिषेक और पूजा के लिए ये हैं शुभ मुहूर्त

सावन के आखिरी सोमवार पर भगवान शिव के जलाभिषेक और पूजा के लिए अलग-अलग शुभ समय बताए गए हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 25 मिनट से 5 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। सुबह की पूजा के लिए श्रेष्ठ समय सुबह 6 बजे से 9 बजकर 15 मिनट तक बताया गया है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजे से 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। शाम की पूजा के लिए प्रदोष काल शाम 6 बजकर 30 मिनट से रात 8 बजकर 30 मिनट तक रहेगा।

आखिरी सोमवार पर बन रहे कई शुभ संयोग

सावन के अंतिम सोमवार को प्रीति योग और आयुष्मान योग का संयोग बन रहा है। इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग और प्रदोष काल का भी संयोग रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन शुभ योगों में भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक करने से पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है।

शिवलिंग पर जल चढ़ाने की ये है विधि

भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए तांबे या चांदी के पात्र में शुद्ध जल या गंगाजल लें। उत्तर दिशा की ओर मुख करके जल अर्पित करने की विधि बताई गई है। सबसे पहले जलाधारी के बाएं हिस्से यानी श्री गणेश और फिर दाएं हिस्से यानी भगवान कार्तिकेय को जल अर्पित करें। इसके बाद जलाधारी के मध्य भाग में माता अशोक सुंदरी और फिर गोल हिस्से में माता पार्वती के हस्तकमल पर जल चढ़ाएं।

इसके बाद ‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘श्री शिवाय नमस्तुभ्यं’ मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग पर पतली धारा में जल अर्पित करें।

पंचामृत से अभिषेक के बाद अर्पित करें ये चीजें

सावन सोमवार की पूजा के लिए सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत या पूजा का संकल्प लें। इसके बाद शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बने पंचामृत से अभिषेक करें। फिर शुद्ध जल से शिवलिंग को स्नान कराएं।

इसके बाद भगवान शिव को सफेद चंदन, भस्म, अक्षत, बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र और आंकड़े के फूल अर्पित करें।

शिव चालीसा या रुद्राष्टकम का करें पाठ

पूजा के अंत में शिव चालीसा या रुद्राष्टकम का पाठ किया जा सकता है। इसके बाद भगवान शिव को फल, मिठाई या खीर का भोग लगाएं। धूप-दीप से आरती करें और पूजा के दौरान अनजाने में हुई भूल-चूक के लिए भगवान शिव से क्षमा प्रार्थना करें।

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