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मांसपेशियों में बार-बार ऐंठन और कमजोरी को न समझें मामूली, पोटैशियम असंतुलन भी हो सकता है वजह

नई दिल्ली: मांसपेशियों में बार-बार ऐंठन, पैरों में कमजोरी या बिना अधिक मेहनत के थकान महसूस होना कई बार सामान्य परेशानी लग सकती है, लेकिन लगातार बने रहने वाले इन लक्षणों के पीछे शरीर में पोटैशियम का असंतुलन भी एक कारण हो सकता है। पोटैशियम शरीर के लिए जरूरी इलेक्ट्रोलाइट है, जो नसों के सामान्य कामकाज, मांसपेशियों के संकुचन और शरीर में तरल पदार्थों के संतुलन में अहम भूमिका निभाता है। हालांकि केवल लक्षणों के आधार पर पोटैशियम की कमी की पुष्टि नहीं की जा सकती।
पोटैशियम कम ही नहीं, ज्यादा होना भी परेशानी
शरीर में पोटैशियम का स्तर एक निश्चित सीमा में रहना जरूरी है। इसकी कमी के साथ-साथ अत्यधिक मात्रा भी स्वास्थ्य के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है। ऐसे में बिना चिकित्सकीय सलाह के पोटैशियम की गोलियां या किसी तरह के पूरक लेना उचित नहीं है। खासकर पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे या नियमित दवाएं लेने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
ऐंठन और कमजोरी हो सकती है पोटैशियम की कमी का संकेत
पोटैशियम का स्तर कम होने पर कुछ लोगों में मांसपेशियों की कमजोरी और ऐंठन जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। पैरों में अचानक तेज ऐंठन, सामान्य गतिविधियों के दौरान मांसपेशियों में कमजोरी या असामान्य थकान महसूस हो सकती है। हालांकि इन लक्षणों के पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। लंबे समय तक एक ही मुद्रा में रहना, अत्यधिक व्यायाम, शरीर में पानी की कमी और दूसरे इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन भी ऐंठन की वजह बन सकता है।
लगातार थकान को केवल पोटैशियम की कमी न मानें
कमजोरी या थकान लंबे समय तक बनी रहने पर इसे केवल पोटैशियम की कमी से जोड़ना सही नहीं है। नींद पूरी न होना, तनाव, खून की कमी, पोषण संबंधी कमियां और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी लगातार थकान का कारण बन सकती हैं। यदि कमजोरी बढ़ रही हो या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगे हों तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
गर्मी और ज्यादा मेहनत में बढ़ सकता है इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन
गर्मी में लंबे समय तक पसीना आने या अधिक शारीरिक मेहनत करने से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन प्रभावित हो सकता है। ऐसी स्थिति में अत्यधिक कमजोरी, चक्कर, मांसपेशियों में ऐंठन या अस्वस्थ महसूस होने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सामान्य परिस्थितियों में पर्याप्त तरल पदार्थ और संतुलित भोजन शरीर की जरूरतों को पूरा करने में मदद करते हैं, लेकिन समस्या लगातार बनी रहे तो इसके कारण की जांच जरूरी है।
रक्त जांच से पता चल सकता है पोटैशियम का स्तर
पोटैशियम की कमी या असंतुलन का पता लगाने के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार रक्त जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। जांच के परिणामों के आधार पर आहार में बदलाव या उपचार की आवश्यकता तय की जाती है। पोटैशियम से भरपूर खाद्य पदार्थ संतुलित आहार का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन व्यक्ति को कितनी मात्रा में पोटैशियम की जरूरत है, यह उसकी उम्र, स्वास्थ्य और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
केला फायदेमंद, लेकिन इसे इलाज मानना सही नहीं
केला पोटैशियम का जाना-पहचाना स्रोत है, लेकिन केवल केला खाने को पोटैशियम की कमी का इलाज मानना उचित नहीं है। संतुलित भोजन में विभिन्न पोषक तत्वों और खनिजों का पर्याप्त सेवन जरूरी है। यदि जांच में पोटैशियम की कमी सामने आती है तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार आहार में बदलाव और जरूरत पड़ने पर पूरक की व्यवस्था की जा सकती है।
खुद से पोटैशियम की गोलियां लेना पड़ सकता है भारी
मांसपेशियों में बार-बार ऐंठन या कमजोरी होने पर खुद से पोटैशियम की गोलियां लेना शुरू नहीं करना चाहिए। शरीर में पोटैशियम का स्तर जरूरत से ज्यादा बढ़ना भी गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। इसलिए बार-बार होने वाली ऐंठन, लगातार कमजोरी या अन्य असामान्य लक्षणों की स्थिति में चिकित्सकीय जांच कराना सुरक्षित तरीका है।

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